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EOW की सख्त कार्रवाई: डाकतार कर्मचारी गृह निर्माण सोसायटी में बड़ा घोटाला, पूर्व पदाधिकारियों पर FIR

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Published On: 23 December 2025
Indore EOW action on housing society
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EOW की सख्त कार्रवाई: डाकतार कर्मचारी गृह निर्माण सोसायटी के पूर्व पदाधिकारियों पर FIR, बड़ा घोटाला उजागर

इंदौर। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने डाकतार कर्मचारी गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित से जुड़े एक बड़े और लंबे समय से चले आ रहे घोटाले का पर्दाफाश किया है। इस मामले में संस्था के तत्कालीन अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और एक लाभार्थी के खिलाफ गंभीर आपराधिक धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। जांच में सामने आया है कि सहकारी संस्था के मूल उद्देश्य को दरकिनार करते हुए नियमों की खुलेआम अनदेखी की गई और गैर-सदस्यों व अपात्र व्यक्तियों को अवैध रूप से भूखंडों का आवंटन किया गया। इस पूरे प्रकरण में पद का दुरुपयोग, धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेजों का निर्माण और आपराधिक साजिश के स्पष्ट प्रमाण मिले हैं।

सोसायटी का उद्देश्य और नियमों की अनदेखी

डाकतार कर्मचारी गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित का गठन 20 जनवरी 1975 को किया गया था। संस्था का मुख्य उद्देश्य डाक विभाग के कर्मचारियों और अन्य पात्र सदस्यों को आवासीय भूखंड उपलब्ध कराना था, ताकि आवासहीन सदस्यों को घर बनाने का अवसर मिल सके। सहकारी संस्थाओं के संचालन के लिए तय नियमों के अनुसार केवल पात्र सदस्यों को ही भूखंड आवंटित किया जाना था और एक परिवार को सीमित लाभ देने का प्रावधान था।
लेकिन EOW की जांच में यह सामने आया कि तत्कालीन पदाधिकारियों ने इस उद्देश्य को पूरी तरह नजरअंदाज कर निजी लाभ के लिए नियमों का उल्लंघन किया और संस्था को अपने स्वार्थ का माध्यम बना लिया।

किन लोगों पर दर्ज हुआ मामला

EOW द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में संस्था के तत्कालीन अध्यक्ष श्रीकांत घण्टे (निवासी चन्द्रलोक कॉलोनी, इंदौर), तत्कालीन उपाध्यक्ष सुभाष दुबे (निवासी नंदानगर, वर्तमान पता संचार नगर, इंदौर) और लाभार्थी ईसाई उर्फ सलीम पिता वली मोहम्मद (निवासी वैभव नगर, कनाडिया रोड) को आरोपी बनाया गया है।
इसके अलावा, एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि इस घोटाले में अन्य लोगों की भूमिका भी हो सकती है, जिनकी जांच फिलहाल जारी है। जांच के आधार पर आगे और नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

गैर-सदस्यों को किया गया अवैध भूखंड आवंटन

जांच में यह गंभीर तथ्य सामने आया कि तत्कालीन अध्यक्ष श्रीकांत घण्टे ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए संस्था के गैर-सदस्य सलीम को संचार नगर एक्सटेंशन क्षेत्र में कई भूखंड आवंटित कर दिए। इनमें 1500 वर्गफीट और 750 वर्गफीट के आवासीय भूखंड के साथ-साथ 3500 वर्गफीट का एक व्यवसायिक भूखंड भी शामिल है।
सहकारी संस्था के नियमों के अनुसार किसी भी गैर-सदस्य को इस तरह का लाभ देना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद न केवल आवंटन किया गया, बल्कि उसे वैध दिखाने के लिए दस्तावेजों में हेरफेर भी की गई।

एक ही परिवार को पहुंचाया गया अनुचित लाभ

EOW की जांच में यह भी सामने आया कि तत्कालीन उपाध्यक्ष सुभाष दुबे ने अपने पद का गलत इस्तेमाल करते हुए अपने ही परिवार के सदस्यों को अवैध रूप से भूखंड दिलवाए। जांच के अनुसार, उनकी पत्नी विद्यादेवी, बड़े भाई सत्यनारायण दुबे और पिता स्वर्गीय मांगीलाल दुबे के नाम पर संचार नगर एक्सटेंशन में अलग-अलग 1500 वर्गफीट के भूखंड आवंटित किए गए।
इस तरह एक ही परिवार को कई भूखंड देकर सहकारिता अधिनियम और संस्था के नियमों का खुला उल्लंघन किया गया, जिससे अन्य पात्र सदस्यों के अधिकारों का हनन हुआ।

फर्जी सदस्यता और कूटरचित दस्तावेज

इस पूरे घोटाले का सबसे गंभीर पहलू कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल है। EOW की जांच में यह उजागर हुआ कि गैर-सदस्य सलीम को संस्था का सदस्य दर्शाने के लिए फर्जी रसीदें, झूठे सदस्यता क्रमांक और अन्य दस्तावेज तैयार किए गए।
इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर न केवल सदस्यता दिखाई गई, बल्कि भूखंडों का आवंटन भी कर दिया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, यह कृत्य धोखाधड़ी, कूटरचना और आपराधिक साजिश की श्रेणी में आता है।

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इन धाराओं में दर्ज हुई FIR

EOW ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (कीमती सुरक्षा की कूटरचना), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से कूटरचना), 471 (कूटरचित दस्तावेज का उपयोग), 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मामला दर्ज किया है।
इसके साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी) और 13(2) के तहत भी अपराध पंजीबद्ध किया गया है, जो सरकारी या अर्ध-सरकारी पद का दुरुपयोग कर अनुचित लाभ लेने से संबंधित है।

अन्य लाभार्थियों की जांच जारी

EOW का कहना है कि फिलहाल जांच प्रारंभिक चरण में है और जिन लोगों को नियम विरुद्ध तरीके से भूखंडों का लाभ मिला है, उनकी सूची खंगाली जा रही है। जांच के दौरान यदि और भी अनियमितताएं सामने आती हैं या अन्य पदाधिकारियों की संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि इस तरह के मामलों में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

सहकारी संस्थाओं के लिए चेतावनी

यह मामला केवल एक संस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सहकारी तंत्र के लिए एक चेतावनी माना जा रहा है। EOW की इस कार्रवाई से यह संदेश गया है कि सहकारी संस्थाओं में पद पर बैठे लोगों द्वारा यदि नियमों का उल्लंघन किया जाता है और सार्वजनिक संसाधनों का दुरुपयोग किया जाता है, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई तय है।
प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि इस मामले के बाद अन्य सहकारी संस्थाओं के पुराने रिकॉर्ड भी खंगाले जा सकते हैं।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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