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“भारतीय वायुसेना की बढ़ी ताकत: मेटेओर मिसाइल से राफेल विमानों की BVR मारक क्षमता दोगुनी”

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Published On: 31 October 2025
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भारतीय वायुसेना की ताकत में इजाफा – ‘मेटेओर’ मिसाइल से राफेल की शक्ति होगी दोगुनी

नई दिल्ली – उत्साह में घिरी भारतीय वायुसेना अब अपनी वायु श्रेष्ठता को और भी ऊँचाई पर ले जाने की ओर बढ़ रही है। हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आतंकवादियों के ठिकानों पर किए गए शानदार हमलों के बाद, वायुसेना अपनी मारक क्षमता (strike capability) और बढ़ाने की दिशा में सक्रिय है।
इस दिशा में सबसे अहम कदम है यूरोपीय रक्षा कंपनी MBDA द्वारा विकसित Meteor (मेटेओर) मिसाइल को बड़ी संख्या में ख़रीदने का प्रस्ताव। यह मिसाइल भारत की Beyond Visual Range (BVR) क्षमता को नई ऊँचाइयों पर ले जाने में सक्षम मानी जा रही है।


मेटेरो मिसाइल: क्या है खास?

  • मेटेओर एक BVR एयर-टू-एयर मिसाइल (BVRAAM) है, जिसे MBDA ने विकसित किया है।

  • इस मिसाइल में रामजेट प्रणोदन प्रणाली (throttleable ramjet) है, जो इसे अधिक दूरी तक, उच्च गति से एवं गतिशील मोड़ों के अनुरूप उड़ान भरने में सक्षम बनाती है।

  • इसकी “नो-एस्केप ज़ोन” (NEZ) बहुत बड़ी है—अर्थात् जब लक्ष्य इस क्षेत्र में आ जाता है तो उसे बचने का अवसर लगभग समाप्त हो जाता है।

  • सक्रिय रडार से लक्ष्य को लॉक किया जाता है, दो-तरफा डेटा-लिंक (two-way data link) के माध्यम से मिसाइल को बीच में मार्गदर्शित किया जा सकता है, जिससे यह अत्याधुनिक वायुधर वायु-युद्ध (air-air combat) भूमिका निभा सकती है।


भारतीय वायुसेना में मेटेओर का महत्व

  • वर्तमान में, भारतीय वायुसेना के पास Dassault Rafale विमानों में मेटेओर मिसाइलों के तैनाती की योजना है।
  • सूत्र बताते हैं कि अब देश जल्द ही “बड़ी संख्या में” मेटेओर मिसाइलें ख़रीदने का प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय में अंतिम चरण में है। इस ख़रीद से राफेल विमानों की मारक क्षमता दोगुनी या उससे भी अधिक हो सकती है।
  • मेटेओर के आने से भारत की वायु सीमा रक्षा (air-border defence) और भी सुदृढ़ होगी—लंबी दूरी से दुश्मन को निशाना बनाकर मार करने की क्षमता बढ़ेगी।
  • इसके अतिरिक्त, भारत अपनी स्व-निर्मित (indigenous) मिसाइल प्रणालियों जैसे ASTRA Mk‑2 मिसाइल पर भी काम कर रहा है, जिसे आने वाले समय में विमान-रोधी (air-to-air) भूमिका में तैनात किया जाना है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद सशक्त निर्णय

मई में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों और सैन्य ठिकानों को सटीक हमलों में नष्ट किया था। इस अभियान के बाद वायुसेना ने यह निष्कर्ष निकाला कि आगे बढ़ने के लिए उसे अपनी BVR (बाह्य दृष्टि-परिसीमा) मिसाइल क्षमताओं को मजबूत करना होगा।
विश्लेषकों के अनुसार, मेटेओर मिसाइलों की तैनाती से भारत को पहले वार में सफलता (first-shot, first-kill) का लाभ मिलेगा, जिससे दुश्मन को प्रतिक्रिया देने का मौका कम मिलेगा।


क्या चुनौतियाँ हैं?

  • हालांकि मेटेओर एक शक्तिशाली मिसाइल है, पर इसकी विमान-वर्ग (fighter integration) में चुनौतियाँ भी रहीं हैं—मसलन यह कि रूस निर्मित विमान और पुराने रडार प्रणालियों के साथ उसकी अनुकूलता (integration) पर सवाल उठे हैं।
  • यह स्पष्ट नहीं है कि अभी कितनी संख्या में मेटेओर मिसाइलें उपलब्ध हैं, और भारत-निर्मित विमान प्लेटफार्मों (जैसे HAL Tejas Mk1A या आने वाला Mk2) में इसकी तैनाती कब पूरी होगी।
  • रक्षा विशेषज्ञ अलग-अलग अनुमान देते हैं कि मिसाइलों की संख्या, विमान प्लेटफार्म, तथा इंटीग्रेशन का समय क्या होगा—इन सभी में स्पष्टता अभी पूरी नहीं है।

निष्कर्ष

भारत वायुसेना की मारक शक्ति को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है। मेटेओर मिसाइल के आने से राफेल विमानों की क्षमता जितनी बढ़ेगी, उतना ही भारत का वायु-बल दक्षिण एशिया में एक नए पैरामीटर पर स्थिर होगा। इससे दोनों—वायु रक्षा (air defence) और वायु आक्रमण (air strike)-क्षमताएँ—मजबूत होंगी।
यदि यह योजना सफल होती है, तो भारतीय वायुसेना न केवल अपनी सीमाओं की रक्षा में सक्षम होगी, बल्कि क्षेत्रीय वायु श्रेष्ठता (air superiority) की दिशा में भी एक बड़ा कदम आगे बढ़ेगी।

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