Bihar Election 2025: NDA में दरार के संकेत! चिराग पासवान प्रशांत किशोर के साथ मिलकर खेल सकते हैं बड़ा राजनीतिक दांव
पटना, 7 अक्टूबर 2025:
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राज्य की सियासत में एक बार फिर भूचाल आ गया है। एनडीए (NDA) गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर चल रही रस्साकशी अब खुलकर सामने आने लगी है। सूत्रों के मुताबिक, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने चुनाव रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) की जनसुराज पार्टी (Jan Suraaj Party) से गठबंधन की संभावनाओं पर बातचीत शुरू कर दी है।
इस खबर ने न केवल बिहार बल्कि दिल्ली के सियासी गलियारों में भी हलचल मचा दी है।
NDA में सीट बंटवारे को लेकर बढ़ा तनाव
एनडीए गठबंधन में शामिल लोजपा (आर), जेडीयू (JDU) और भाजपा (BJP) के बीच सीट शेयरिंग को लेकर चर्चा पिछले कई हफ्तों से जारी है।
सूत्रों के अनुसार, चिराग पासवान 25 से 35 सीटों की मांग पर अड़े हुए हैं। उन्होंने साफ संकेत दिए हैं कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई तो वे कोई दूसरा रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे।
एनडीए के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि भाजपा चिराग को सीमित सीटें देने के पक्ष में है, जबकि जेडीयू पहले से ही लोजपा (आर) के विस्तार को लेकर असहज है।
इसी बीच प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज ने संकेत दिए हैं कि “राजनीति में दरवाजे हमेशा खुले रहते हैं।” इससे यह कयास और मजबूत हो गया है कि आने वाले दिनों में चिराग पासवान और प्रशांत किशोर का राजनीतिक गठबंधन बिहार के चुनावी समीकरण को पूरी तरह बदल सकता है।
क्या चिराग का यह कदम ‘प्रेशर पॉलिटिक्स’ है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चिराग पासवान की इस रणनीति के पीछे दो मकसद हो सकते हैं —
पहला, एनडीए से ज्यादा सीटें हासिल करने के लिए दबाव बनाना,
और दूसरा, अपनी राजनीतिक स्वतंत्रता और जनाधार को फिर से मजबूत करना।
चिराग पासवान को 2020 के विधानसभा चुनाव का अनुभव याद है, जब उन्होंने एनडीए से अलग होकर अकेले मैदान में उतरने का फैसला किया था।
भले ही उस चुनाव में लोजपा (आर) को बहुत ज्यादा सीटें नहीं मिलीं, लेकिन पार्टी ने जेडीयू को कई सीटों पर भारी नुकसान पहुंचाया था।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, “2020 में लोजपा (आर) का वोट शेयर सीमित था, लेकिन उसका असर निर्णायक साबित हुआ।” यही वजह है कि इस बार भी एनडीए चिराग के किसी भी ‘अलगाव’ को हल्के में नहीं ले रहा।
जनसुराज के साथ गठबंधन की अटकलें तेज़
प्रशांत किशोर ने पिछले कुछ महीनों में बिहार की राजनीति में अपनी उपस्थिति को लगातार मजबूत किया है।
उनकी पार्टी जनसुराज गांव-गांव में जनसंवाद और यात्रा अभियान चला रही है।
किशोर कई बार सार्वजनिक रूप से चिराग पासवान की राजनीति की तारीफ भी कर चुके हैं।
अब जब दोनों के बीच बातचीत की खबरें सामने आई हैं, तो यह संकेत मिलता है कि बिहार में नया तीसरा मोर्चा भी बन सकता है।
एलजेपी (आर) के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया,
“राजनीति में विकल्प हमेशा मौजूद रहते हैं। अगर हमारी शर्तें पूरी नहीं हुईं, तो हम दूसरे विकल्पों पर विचार करने को मजबूर होंगे।”
यह बयान एनडीए के लिए सीधा संदेश माना जा रहा है कि लोजपा (आर) किसी भी समय रास्ता बदल सकती है।
शाहाबाद से मैदान में उतर सकते हैं चिराग पासवान
एलजेपी (आर) के सूत्रों के मुताबिक, इस बार पार्टी 30 से 40 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।
पार्टी राज्यसभा या विधान परिषद सीट की मांग नहीं कर रही है, बल्कि सीधा जनादेश हासिल करने की रणनीति बना रही है।
सूत्रों के अनुसार, चिराग पासवान शाहाबाद इलाके की किसी सीट से खुद चुनाव मैदान में उतर सकते हैं।
वहीं पार्टी के कई युवा चेहरों को भी इस बार मौका दिए जाने की संभावना है।
एनडीए के सामने नई चुनौती
एनडीए गठबंधन पहले से ही कई चुनौतियों से जूझ रहा है।
जीतनराम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने भी अपने-अपने गुटीय समीकरणों के आधार पर सीटों की मांग बढ़ा दी है।
ऐसे में चिराग पासवान का यह कदम भाजपा-जेडीयू गठबंधन के लिए सिरदर्द साबित हो सकता है।
अगर यह तनाव बढ़ता गया तो सीट बंटवारे की घोषणा में देरी हो सकती है, जिससे विपक्षी गठबंधन (I.N.D.I.A) को राजनीतिक बढ़त मिल सकती है।
2020 की तरह दोहराएगा इतिहास?
2020 के विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान ने खुद को “मोदी का हनुमान” बताते हुए चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया था, लेकिन उन्होंने जेडीयू के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया।
उस वक्त एनडीए को भले ही सरकार बनाने में सफलता मिली, लेकिन नीतीश कुमार की पार्टी को भारी नुकसान हुआ।
राजनीतिक विश्लेषक अब यही पूछ रहे हैं — “क्या 2025 में इतिहास खुद को दोहराने जा रहा है?”
अगर चिराग पासवान फिर से एनडीए से दूरी बनाते हैं और प्रशांत किशोर जैसे रणनीतिकार के साथ हाथ मिलाते हैं, तो बिहार का चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।
राजनीतिक माहौल गर्म, बयानबाज़ी तेज़
इस खबर के बाद बिहार में राजनीतिक तापमान बढ़ गया है।
जेडीयू और भाजपा के नेता इसे “मीडिया की अटकल” बता रहे हैं,
जबकि लोजपा (आर) ने न तो इनकार किया है और न ही पुष्टि की है।
प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी की ओर से भी अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
हालांकि, राजनीतिक हलकों में कहा जा रहा है कि अगर यह गठबंधन बनता है तो यह युवाओं और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं को आकर्षित कर सकता है।
निष्कर्ष: बिहार की राजनीति में नया मोड़ तय
बिहार चुनाव 2025 से पहले एनडीए की यह अंदरूनी खींचतान राज्य की राजनीति को नई दिशा दे सकती है।
चिराग पासवान का रुख स्पष्ट करता है कि वे अब ‘छोटे भाई’ की भूमिका में नहीं रहना चाहते।
अगर आने वाले दिनों में एनडीए सीट बंटवारे का मसला सुलझा नहीं पाता, तो चिराग और प्रशांत किशोर का गठबंधन बिहार की सियासी तस्वीर को पूरी तरह से बदल सकता है।
राजनीति के जानकार मानते हैं — “यह गठबंधन एनडीए और विपक्ष, दोनों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।”
