संबल योजना के हितग्राहियों के लिए बड़ी खुशखबरी: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंगलवार को करेंगे 160 करोड़ रुपये का ट्रांसफर
भोपाल।
मध्य प्रदेश सरकार ने अपने असंगठित क्षेत्र और निर्माण श्रमिकों के हित में संचालित संबल योजना के अंतर्गत एक बार फिर राहत भरी खबर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंगलवार, 16 दिसंबर 2025 को इस योजना से जुड़े 7,227 प्रकरणों में कुल 160 करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के खातों में सिंगल क्लिक के माध्यम से ट्रांसफर करेंगे। यह कार्यक्रम प्रदेश के निर्माण श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री और श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल सहित विभिन्न स्थानों से मंत्रीगण और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
निर्माण श्रमिकों के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं का नेटवर्क
मध्य प्रदेश सरकार असंगठित क्षेत्र और निर्माण श्रमिकों के कल्याण के लिए विभिन्न योजनाओं का संचालन कर रही है। निर्माण श्रमिकों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए कई तरह की सहायता दी जाती है। इनमें प्रमुख हैं—
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अनुग्रह सहायता: श्रमिक की मृत्यु होने पर परिवार को आर्थिक मदद प्रदान करना
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स्थायी या आंशिक अपंगता पर सहायता: गंभीर दुर्घटना या बीमारी की स्थिति में आर्थिक सहायता प्रदान करना
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अंत्येष्टि सहायता: श्रमिक के निधन पर अंतिम संस्कार में आर्थिक सहयोग देना
इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य कठिन परिस्थितियों में श्रमिक और उनके परिवार को आर्थिक संबल देना है। इससे न केवल उनका जीवन सुरक्षित बनता है, बल्कि समाज में श्रमिकों की गरिमा और सम्मान भी बढ़ता है।
आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से मुफ्त इलाज का लाभ
संबल योजना के सभी पात्र हितग्राहियों को आयुष्मान भारत निरामय योजना में शामिल किया गया है। इस योजना के तहत लाभार्थी और उनके परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का निःशुल्क चिकित्सा उपचार प्राप्त कर सकते हैं।
इस पहल का बड़ा फायदा यह है कि असंगठित श्रमिक और उनके परिवार स्वास्थ्य संबंधी खर्चों के बोझ से मुक्त हो गए हैं। इसके अलावा, गंभीर रोगों, दुर्घटना या लंबी बीमारी की स्थिति में आर्थिक राहत मिलने से परिवार को मानसिक और सामाजिक सुरक्षा भी मिलती है।

संबल योजना: जीवनभर की आर्थिक सुरक्षा
संबल योजना प्रदेश के असंगठित क्षेत्र में कार्यरत लाखों श्रमिकों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच के रूप में उभरी है। यह योजना श्रमिक को जन्म से लेकर मृत्यु तक विभिन्न प्रकार की आर्थिक सहायता प्रदान करती है।
वास्तव में, यह योजना असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए एक सशक्त “संबल” साबित हुई है। इसके तहत लाभार्थी न केवल दुर्घटनाओं और अप्रत्याशित घटनाओं से सुरक्षित रहते हैं, बल्कि उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।
मध्य प्रदेश में संबल योजना को देश के अन्य राज्यों के लिए आदर्श मॉडल माना जा रहा है। कई राज्य इस योजना को देखकर अपने क्षेत्र के असंगठित श्रमिकों के लिए समान पहल करने की दिशा में विचार कर रहे हैं।
गिग और प्लेटफार्म वर्कर्स को भी मिला लाभ
नीति आयोग की पहल और राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के तहत अब गिग और प्लेटफार्म वर्कर्स को भी संबल योजना में शामिल किया गया है। इस प्रक्रिया के तहत उनका पंजीकरण शुरू कर दिया गया है।
इन श्रमिकों को भी योजना के अंतर्गत सभी लाभ प्राप्त होंगे, जैसे—
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दुर्घटना या मृत्यु पर आर्थिक सहायता
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स्वास्थ्य बीमा के तहत निःशुल्क इलाज
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खाद्यान्न पात्रता पर्ची के जरिए राशन वितरण
यह पहल गिग और प्लेटफार्म वर्कर्स की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करती है, जो असंगठित क्षेत्र में अक्सर जोखिमपूर्ण स्थिति में रहते हैं।
संबल योजना के प्रमुख लाभ एक नजर में
संबल योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को दी जाने वाली सहायता राशि इस प्रकार है—
| सहायता का प्रकार | राशि |
|---|---|
| दुर्घटना में मृत्यु | 4 लाख रुपये |
| सामान्य मृत्यु | 2 लाख रुपये |
| स्थायी अपंगता | 2 लाख रुपये |
| आंशिक स्थायी अपंगता | 1 लाख रुपये |
| अंत्येष्टि सहायता | 5,000 रुपये |
| महिला श्रमिकों के लिए प्रसूति सहायता | 16,000 रुपये |
| बच्चों की उच्च शिक्षा (महाविद्यालय शुल्क) | पूर्ण भुगतान |
इस तरह योजना न केवल निर्माण श्रमिकों बल्कि उनके परिवारों को भी सशक्त और सुरक्षित बनाती है।
अब तक करोड़ों श्रमिकों को मिला सीधा लाभ
संबल योजना की शुरुआत 1 अप्रैल 2018 से हुई थी। उस समय से अब तक—
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1 करोड़ 83 लाख से अधिक श्रमिकों का पंजीकरण किया जा चुका है।
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7 लाख 76 हजार से अधिक प्रकरणों में कुल 7,383 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि लाभार्थियों को प्रदान की जा चुकी है।
ये आंकड़े स्पष्ट रूप से योजना की व्यापकता, प्रभावशीलता और उपयोगिता को दर्शाते हैं।
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संबल योजना न केवल आर्थिक मदद देती है, बल्कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों में सुरक्षा और आत्मविश्वास भी बढ़ाती है।
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दुर्घटना, बीमारी या मृत्यु जैसी अप्रत्याशित परिस्थितियों में परिवार को वित्तीय राहत मिलती है।
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बच्चों की शिक्षा और महिला श्रमिकों की प्रसूति सहायता सामाजिक उत्थान को बढ़ावा देती है।
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स्वास्थ्य बीमा और राशन जैसी सुविधाओं से परिवार के जीवन स्तर में सुधार आता है।
इस प्रकार संबल योजना सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं बल्कि सामाजिक सुरक्षा का मजबूत तंत्र भी बन गई है।
सरकार की लगातार पहल और भविष्य की योजनाएं
प्रदेश सरकार लगातार संबल योजना को और व्यापक और समावेशी बनाने के लिए प्रयासरत है।
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असंगठित श्रमिकों के लिए अधिक सुविधाएं जोड़ने की प्रक्रिया जारी है।
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योजना में नए श्रमिकों और गिग वर्कर्स को शामिल करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
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स्वास्थ्य, शिक्षा और वित्तीय सुरक्षा के क्षेत्रों में लगातार सुधार किया जा रहा है।
इसके अलावा, सरकार योजना के लाभों को डिजिटल माध्यमों से सीधे हितग्राहियों तक पहुँचाने का कार्य भी कर रही है।
निष्कर्ष
संबल योजना मध्य प्रदेश के असंगठित क्षेत्र और निर्माण श्रमिकों के लिए एक मजबूत आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा कवच साबित हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 16 दिसंबर 2025 को 160 करोड़ रुपये का ट्रांसफर न केवल योजना की सफलता को दर्शाता है बल्कि यह राज्य सरकार की श्रमिक कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है।
इस पहल से न केवल लाखों श्रमिकों और उनके परिवारों को आर्थिक संबल मिलेगा, बल्कि उनकी सामाजिक और मानसिक सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। संबल योजना अब प्रदेश के श्रमिकों के लिए जीवनभर का सहारा बन चुकी है और अन्य राज्यों के लिए भी मॉडल योजना के रूप में उभरी है।
