—Advertisement—

Ujjain महाकाल मंदिर में 22 अप्रैल 2026 को भव्य भस्म आरती, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

Author Picture
Published On: 22 April 2026
Ujjain
— महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन में 22 अप्रैल 2026 को भव्य भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार और भक्तों की अपार भीड़ ने माहौल को भक्तिमय बना दिया

—Advertisement—

Ujjain महाकाल मंदिर में 22 अप्रैल 2026 को भव्य भस्म आरती, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

Ujjain महाकालेश्वर मंदिर में 22 अप्रैल 2026, बुधवार को एक बार फिर भक्ति और आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। ब्रह्म मुहूर्त में आयोजित विशेष भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का दिव्य स्वरूप भस्म से अलंकृत किया गया और मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” के जयघोष से गूंज उठा।

यह दिन धार्मिक दृष्टि से भी विशेष रहा क्योंकि आज वैशाख शुक्ल षष्ठी तिथि है, जिसे ज्योतिष और पंचांग के अनुसार शुभ माना जाता है। इसी शुभ संयोग में बाबा महाकाल की आरती और दर्शन का महत्व और भी बढ़ गया।

ब्रह्म मुहूर्त में हुई भव्य भस्म आरती

सुबह तड़के ब्रह्म मुहूर्त में जैसे ही मंदिर के कपाट खुले, विधिवत पूजा-अर्चना के साथ भस्म आरती की शुरुआत हुई। वैदिक मंत्रोच्चार और घंटियों की ध्वनि के बीच बाबा महाकाल का अभिषेक किया गया।

इस दौरान भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई, जो इस मंदिर की सबसे अनोखी और प्राचीन परंपरा मानी जाती है। भस्म आरती के माध्यम से भगवान शिव के उस स्वरूप का दर्शन होता है, जो सृष्टि के संहार और पुनर्निर्माण का प्रतीक है।

श्रद्धालुओं के अनुसार, इस आरती के दर्शन करना जीवन में अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है और इसे एक दिव्य अनुभव कहा जाता है।

दिव्य श्रृंगार और विशेष पूजन

भस्म आरती से पहले भगवान महाकाल का पारंपरिक अभिषेक किया गया। जल, दूध और पंचामृत से स्नान कराने के बाद बाबा का विशेष श्रृंगार किया गया।

भांग, चंदन और फूलों से सजाकर उन्हें अलौकिक रूप दिया गया। भस्म अर्पण के बाद पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। मंदिर के पुजारियों द्वारा किए गए मंत्रोच्चार ने पूरे परिसर को पवित्रता और भक्ति के माहौल में डुबो दिया।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़, सुबह से ही उमड़ा सैलाब

Ujjain भस्म आरती और विशेष दिन के कारण देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे। सुबह से ही मंदिर परिसर में लंबी कतारें लग गईं। भक्तों ने “हर-हर महादेव” और “जय महाकाल” के जयकारों के साथ बाबा के दर्शन किए।

श्रद्धालुओं का कहना है कि महाकाल के दर्शन मात्र से मन को अद्भुत शांति और ऊर्जा प्राप्त होती है। कई भक्तों ने इसे जीवन का सबसे बड़ा आध्यात्मिक अनुभव बताया।

ऑनलाइन व्यवस्था और नई दर्शन प्रणाली

Ujjain मंदिर प्रशासन ने भस्म आरती में शामिल होने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। अब श्रद्धालुओं को आरती में शामिल होने के लिए ऑनलाइन बुकिंग कराना अनिवार्य कर दिया गया है।

इसके अलावा भस्म आरती दर्शन के लिए 200 रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया है। यह व्यवस्था भीड़ नियंत्रण और सुचारू दर्शन व्यवस्था बनाए रखने के लिए लागू की गई है।

मंदिर प्रशासन का कहना है कि नई व्यवस्था से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिल रही है और भीड़ प्रबंधन आसान हुआ है।

धार्मिक महत्व और पंचांग का संयोग

आज का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह वैशाख शुक्ल षष्ठी तिथि है। हिंदू धर्म में इस तिथि को शुभ कार्यों और पूजा-पाठ के लिए उत्तम माना जाता है।

इस विशेष तिथि पर भगवान महाकाल की भस्म आरती का आयोजन होने से इसका महत्व और भी बढ़ गया। ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह दिन सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक माना जा रहा है।

मंदिर परिसर में आध्यात्मिक माहौल

पूरे मंदिर परिसर में भक्ति और आस्था का अद्भुत माहौल देखने को मिला। घंटियों की आवाज, मंत्रोच्चार और भक्तों के जयकारों ने वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया।

श्रद्धालु भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल के दिव्य स्वरूप को देखकर भावविभोर हो गए। कई भक्तों की आंखों में आंसू थे, जो उनकी गहरी आस्था और भक्ति को दर्शा रहे थे।

महाकाल दर्शन का महत्व

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग को 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे प्रमुख माना जाता है। यहां भगवान शिव को कालों के काल “महाकाल” के रूप में पूजा जाता है।

मान्यता है कि महाकाल के दर्शन और भस्म आरती में शामिल होने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

निष्कर्ष

22 अप्रैल 2026 को उज्जैन में आयोजित भस्म आरती ने एक बार फिर यह साबित किया कि महाकाल मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है।

भस्म आरती, दिव्य श्रृंगार, पंचांग का शुभ संयोग और श्रद्धालुओं की अपार भीड़ ने इस दिन को विशेष और अविस्मरणीय बना दिया। मंदिर में गूंजते “हर-हर महादेव” के जयकारे इस बात का प्रमाण थे कि बाबा महाकाल की भक्ति आज भी उतनी ही गहरी और अटूट है।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp