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सोनी सब के ‘Yaadein’ के आने वाले ट्रैक पर बोले इक़बाल खान: “मानवता के रास्ते में कोई भी सामाजिक नियम आड़े नहीं आना चाहिए”

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Published On: 26 October 2026
Yaadein

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‘Yaadein’ के आगामी ट्रैक में लैंगिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाएंगे डॉ. देव,

गर्भवती मिश्री के इलाज को लेकर गांव में उठेगा विवाद, डॉक्टर के कर्तव्य और सामाजिक मान्यताओं के बीच संघर्ष की कहानी दिखाएगा सोनी सब का शो

इकबाल खान बोले—मानवता के रास्ते में कोई भी सामाजिक मान्यता नहीं आनी चाहिए, जरूरत के समय किसी के साथ खड़ा होना ही सबसे बड़ा मानवीय मूल्य

मुंबई, अक्टूबर 2026। टेलीविजन पर प्रसारित होने वाले सामाजिक सरोकारों से जुड़े धारावाहिक अक्सर समाज की उन समस्याओं को सामने लाते हैं, जिन पर खुलकर चर्चा करना जरूरी है। इसी कड़ी में सोनी सब का शो ‘Yaadein’ अपने आगामी ट्रैक के माध्यम से लैंगिक भेदभाव, सामाजिक रूढ़ियों और मानवीय जिम्मेदारियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों को उठाने जा रहा है। किल्लारी गांव की पृष्ठभूमि पर आधारित इस कहानी में डॉ. देव की भूमिका निभा रहे अभिनेता इकबाल खान एक ऐसी परिस्थिति का सामना करते नजर आएंगे, जहां एक मरीज की जान बचाने का उनका कर्तव्य गांव की पुरानी मान्यताओं से टकरा जाता है।

आगामी कहानी में गर्भवती महिला मिश्री को चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता होती है। एक योग्य डॉक्टर होने के नाते डॉ. देव उसकी मदद करना चाहते हैं, लेकिन गांव के लोग केवल इस वजह से उनके इलाज करने का विरोध करते हैं, क्योंकि वह पुरुष हैं और मिश्री एक महिला है। यह स्थिति न केवल डॉ. देव के पेशेवर दायित्वों की परीक्षा लेती है, बल्कि समाज में गहराई तक जड़ें जमा चुकी लैंगिक असमानता पर भी सवाल खड़े करती है।

गर्भवती मिश्री की मदद करने के लिए आगे आएंगे डॉ. देव

‘यादें’ के आगामी ट्रैक में कहानी उस समय एक गंभीर मोड़ लेती है, जब गांव की गर्भवती महिला मिश्री को इलाज की जरूरत पड़ती है। उसकी परेशानी देखकर डॉ. देव उसे चिकित्सकीय सहायता देना चाहते हैं। उनके लिए किसी मरीज की जान बचाना सबसे पहली प्राथमिकता है। वह मानते हैं कि डॉक्टर का कर्तव्य मरीज की जरूरत के अनुसार उपचार करना है, न कि उसके लिंग या समाज की धारणाओं के आधार पर निर्णय लेना।

हालांकि, किल्लारी गांव के लोगों की सोच उनके सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़ी हो जाती है। गांव वाले इस बात पर अड़े रहते हैं कि एक पुरुष डॉक्टर किसी महिला का इलाज नहीं कर सकता। उनकी यह मान्यता डॉ. देव के लिए मुश्किलें पैदा करती है। एक ओर मिश्री की तकलीफ है, तो दूसरी ओर ग्रामीणों का विरोध। ऐसी परिस्थिति में डॉ. देव के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि वह मिश्री की मदद कैसे करें और लोगों को यह समझाने का प्रयास कैसे करें कि किसी की जान बचाना किसी भी सामाजिक प्रतिबंध से अधिक महत्वपूर्ण है।

ग्रामीणों को मनाने के लिए डॉ. देव बनाएंगे योजना

मिश्री को परेशानी में देखकर डॉ. देव खुद को उसकी मदद करने से रोक नहीं पाते। वह जानते हैं कि यदि समय पर उसे चिकित्सकीय सहायता नहीं मिली, तो उसकी स्थिति और गंभीर हो सकती है। इसलिए वह ग्रामीणों को मनाने के लिए एक योजना बनाते हैं। उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि मिश्री तक जरूरी चिकित्सा सहायता पहुंचाना है।

डॉ. देव की यह कोशिश कहानी में एक नया मोड़ लेकर आती है। वह गांव वालों की सोच बदलने और उन्हें अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित करना चाहते हैं। लेकिन परिस्थितियां उनके मुताबिक आगे नहीं बढ़तीं। जब वह ग्रामीणों को सच्चाई बताने का फैसला करते हैं और स्वीकार करते हैं कि उन्होंने यह कदम केवल मिश्री की मदद करने के लिए उठाया था, तो गांव वाले नाराज हो जाते हैं।

उनकी नाराजगी इतनी बढ़ जाती है कि वे डॉ. देव पर पत्थर बरसाने लगते हैं। यह घटना दिखाती है कि सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देने वाले व्यक्ति को कई बार विरोध और कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद डॉ. देव अपने सिद्धांतों से पीछे हटने को तैयार नहीं होते। उनके लिए मरीज की जान बचाना ही सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

सामाजिक मान्यताओं और मानवता के बीच संघर्ष

‘यादें’ का यह आगामी ट्रैक केवल एक डॉक्टर और ग्रामीणों के बीच होने वाले विवाद तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से धारावाहिक एक व्यापक सामाजिक मुद्दे को सामने लाने का प्रयास कर रहा है। समाज में प्रचलित कुछ परंपराएं और मान्यताएं समय के साथ लोगों की सोच का हिस्सा बन जाती हैं। हालांकि, जब ऐसी मान्यताएं किसी जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करने में बाधा बनने लगती हैं, तब उन पर सवाल उठाना जरूरी हो जाता है।

डॉ. देव का संघर्ष इसी विचार को दर्शाता है। उनका मानना है कि किसी व्यक्ति की सहायता करने से पहले उसकी पहचान, लिंग या सामाजिक स्थिति नहीं देखी जानी चाहिए। खासकर चिकित्सा जैसे पेशे में मरीज का स्वास्थ्य और उसकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

इस कहानी के जरिए दर्शकों के सामने यह सवाल भी रखा जाएगा कि क्या परंपराओं का पालन करना मानवता से अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है? क्या किसी की जान बचाने जैसे जरूरी काम को केवल सामाजिक मान्यताओं के आधार पर रोका जाना उचित है? डॉ. देव का किरदार इन सवालों के माध्यम से दर्शकों को सोचने और अपने आसपास मौजूद रूढ़िवादी धारणाओं पर विचार करने के लिए प्रेरित करेगा।

इकबाल खान ने बताया शिक्षा और संवेदनशीलता का महत्व

आगामी ट्रैक के बारे में बात करते हुए अभिनेता इकबाल खान ने कहा कि हर विश्वास और परंपरा को समय के साथ विकसित होना चाहिए। यदि कोई मान्यता हमें किसी दूसरे इंसान की सहायता करने से रोकती है या समाज को आगे बढ़ने से बाधित करती है, तो यह विचार करना आवश्यक है कि क्या वह आज भी प्रासंगिक है।

इकबाल खान के मुताबिक, डॉ. देव की कहानी के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि मानवता के रास्ते में कोई भी सामाजिक मान्यता नहीं आ

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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