शरद पूर्णिमा पर आचार्य विद्यासागर महाराज के जीवन, साधना और संस्कारों का स्मरण
बड़ा जैन मंदिर में महामंडल विधान; बच्चों और दीदियों की प्रस्तुतियों ने मोहा मन
मनोज जैन नायक
मुरैना शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज के जीवन, साधना, त्याग और संस्कारों को समर्पित धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर कमेटी और सकल दिगंबर जैन समाज, मुरैना के संयुक्त तत्वावधान में हुए आयोजन में दिनभर धार्मिक अनुष्ठान हुए। रात में विद्यासागर जैन पाठशाला के बच्चों और दीदियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं।
आचार्यश्री के जीवन प्रसंग सुनाए
परम पूज्य मुनि श्री 108 उपशांतसागर महाराज ने आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने आचार्यश्री के बाल्यकाल, साधना और समाज के प्रति योगदान से जुड़े प्रेरक प्रसंग सुनाए। मुनिश्री ने बताया कि आचार्यश्री का जन्म शरद पूर्णिमा के दिन हुआ था और उनका बाल्यकालीन नाम विद्याधर था। बचपन से ही उनमें धर्म, अध्ययन और आध्यात्मिक चिंतन के संस्कार दिखाई देने लगे थे।
मुनिश्री ने आचार्यश्री के जीवन प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को त्याग, तप, संयम और स्वाध्याय का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि आचार्यश्री का जीवन इन मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देता है।
परम पूज्य आचार्य श्री 108 उदारसागर महाराज ने भी आचार्यश्री के व्यक्तित्व और विचारों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आचार्य विद्यासागर महाराज का जीवन त्याग, तप, संयम और आत्मकल्याण की साधना से जुड़ा रहा। उन्होंने अपने विचारों और कार्यों से समाज तथा राष्ट्र को दिशा दी और शिक्षा एवं संस्कारों के माध्यम से नई पीढ़ी को धर्म और भारतीय संस्कृति से जुड़ने की प्रेरणा दी।
36 समाजबंधुओं ने किया महामंडल विधान
आयोजन के अंतर्गत आचार्य श्री विद्यासागर महामंडल विधान किया गया। इसमें श्री विद्यासागर सर्वोदय पाठशाला के बच्चों, दीदियों और सकल दिगंबर जैन समाज के श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विधान में 36 महामंडलियों की धार्मिक क्रियाएं 36 समाजबंधुओं ने श्रद्धा और भक्तिभाव से संपन्न कीं।
विधानाचार्य संजय शास्त्री और विद्वान नवनीत जैन शास्त्री ने विधि-विधान से पूजन कराया। उन्होंने श्रद्धालुओं को विधान के आध्यात्मिक महत्व की जानकारी भी दी। मंत्रोच्चार और पूजन के बीच मंदिर परिसर भक्तिमय बना रहा।
बच्चों और दीदियों की प्रस्तुतियां रहीं खास
रात्रि में श्री विद्यासागर सर्वोदय पाठशाला के बच्चों ने धार्मिक और संस्कारप्रधान सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। प्रस्तुतियों में जैन धर्म, भारतीय संस्कृति और आचार्यश्री के जीवन-मूल्यों को दर्शाया गया। श्रद्धालुओं ने तालियों के साथ बच्चों का उत्साह बढ़ाया।
पाठशाला की दीदियों ने भी सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर आयोजन को विशेष आकर्षण दिया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों को उनकी प्रतिभा और सहभागिता के लिए पुरस्कार दिए गए। पुरस्कार पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे। समाजबंधुओं ने बच्चों, दीदियों और पाठशाला से जुड़े कार्यकर्ताओं के प्रयासों की सराहना की।
धर्म और संस्कारों का संदेश
आयोजन में धार्मिक अनुष्ठान, शिक्षा, संस्कार और संस्कृति का समन्वय देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने महामंडल विधान के माध्यम से आचार्यश्री के प्रति श्रद्धा व्यक्त की, जबकि बच्चों और दीदियों ने प्रस्तुतियों के जरिए उनके आदर्शों को सामने रखा।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और उन्हें जीवन में अपनाने की प्रेरणा देना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। मंदिर कमेटी और सकल दिगंबर जैन समाज के संयुक्त प्रयासों से आयोजित यह कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक चेतना का संगम बना।
