Thandla-मेघनगर में वर्षितप आराधना: अणु जन्म शताब्दी वर्ष में सामूहिक धार्मिक उत्सव
Thandla, झाबुआ जिले – जैन समाज में वर्षितप की आराधना का महत्व अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस बार यह उत्सव और भी विशेष है क्योंकि यह पूज्य गुरुदेव भगवंत उमेशमुनिजी “अणु” के जन्म शताब्दी वर्ष में हो रहा है। अष्ट वर्षीय वर्षितप आराधना का यह तीसरा वर्ष है, जिसमें मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र सहित अनेक राज्यों के आराधक भाग ले रहे हैं। इस वर्ष अनुमानित रूप से 1,000 से अधिक आराधक वर्षितप आराधना में शामिल होंगे और दृढ़ संकल्प के साथ धार्मिक साधना करेंगे।
वर्षितप आराधना का प्रारंभ
चैत्र विदि अष्टमी, 11 मार्च 2026, बुधवार से वर्षितप आराधना की शुरुआत थांदला और निकटवर्ती मेघनगर में हुई। इस कार्यक्रम का आयोजन पूज्य श्री धर्मदास गण परिषद के आह्वान पर किया गया। बुद्धपुत्र प्रवर्तक देव श्री जिनेन्द्रमुनिजी म.सा. के निर्देशन में सभी आराधक वर्षितप के नियमों का पालन करते हुए उपवास, एकासन तप और पारणें का लाभ उठा रहे हैं।
इस अवसर पर गण के राष्ट्रीय अध्यक्ष भरत भंसाली, महासचिव शैलेष पीपाड़ा, प्रवक्ता देवेंद्र गादिया, संगठन मंत्री विनोद धोका और मीडिया प्रभारी पवन नाहर ने जानकारी साझा की कि तप प्रधान जिन शासन में वर्षितप का महत्व देखते हुए यह आराधना अलग-अलग स्थानों पर सामूहिक रूप से आयोजित की जा रही है।
Thandla में वर्षितप आराधना
थांदला नगर में वर्षितप आराधकों की संख्या इस बार 91 है, जिन्होंने उपवास से वर्षितप आराधना शुरू की। प्रथम उपवास के पश्चात आयोजित पारणों के पूर्व, महासतिया पूज्याश्री निखिलशीलाजी म.सा. और माताजी पूज्याश्री दिव्यशीलाजी म.सा. के सानिध्य में महामंत्र नवकार का जाप हुआ। इसके बाद आराधकों ने बियासन का प्रत्याख्यान ग्रहण किया और महामांगलिक श्रवण का लाभ उठाया।
जयकार यात्रा थांदला नगर के स्थानक भवन से निकलकर महावीर भवन पर समाप्त हुई। इस अवसर पर स्वर्गीय भंवरलाल लोढ़ा की स्मृति में जिनेन्द्र कुमार, अल्केश और प्रांजल लोढ़ा परिवार ने सभी तपस्वियों को पारणों का लाभ प्रदान किया।

मेघनगर में वर्षितप आराधना
मेघनगर में पहली बार 63 आराधकों ने उपवास से वर्षितप आराधना शुरू की। इसके अलावा 20 आराधक एकासन तप के माध्यम से वर्षितप आराधना कर रहे हैं। आराधना के प्रथम पारण का लाभ सुरेशचंद्र, अमित और दीपक मेहता परिवार ने लिया।
संघ अध्यक्ष रवि सुराणा, सचिव विपुल धोका, चातुर्मास समिति अध्यक्ष प्रफुल्ल गादिया, व्यवस्थापक पंकज वागरेचा और युवा अध्यक्ष सौरभ खिमेसरा ने बताया कि यह संख्या और बढ़ने की संभावना है। झाबुआ जिले के अन्य स्थानों जैसे पेटलावद, बामनिया, खवासा और रायपुरिया में भी सामूहिक वर्षितप आराधना आयोजित की जा रही है।
अणु स्मृति दिवस का आयोजन
थांदला संघ की ओर से त्रिदिवसीय अणु स्मृति दिवस का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर पूज्य गुरुदेव की गुणानुवाद सभा, अणु के नाम एक शाम, धार्मिक प्रतियोगिताएँ, जाप और चारित्र आराधना आदि कार्यक्रम शामिल हैं।
संघ के कोषाध्यक्ष रजनीकांत शाहजी, युवाध्यक्ष प्रांजल लोढ़ा, महिला मंडल अध्यक्षा किरण श्रीश्रीमाल, अखिल भारतीय चंदना श्राविका मण्डल प्रभारी इंदु कुवाड़ और प्रवक्ता पवन नाहर ने बताया कि यह आयोजन दो दशक से अधिक के अंतराल के बाद थांदला में हो रहा है।
इस अवसर पर कुशलगढ़ से आए उग्र विहारी तपस्विराज कानमुनिजी म.सा. के अग्रणी शिष्य, धर्मदास गण के प्रभावशाली संत पूज्य श्री पंकजमुनिजी म.सा. भी उपस्थित रहेंगे और आराधकों को आशीर्वाद देंगे।

अन्य स्थानों पर सामूहिक वर्षितप
झाबुआ जिले में मूर्तिपूजक श्रीसंघ द्वारा वर्षितप का लाभ लिया जा रहा है।
- थांदला और मेघनगर के अलावा पेटलावद, बामनिया, खवासा और रायपुरिया जैसे क्षेत्रों में भी आराधक वर्षितप आराधना में भाग ले रहे हैं।
- इस बार विभिन्न राज्यों के हजारों आराधक सामूहिक वर्षितप के माध्यम से धार्मिक अनुशासन और तपस्या का अनुभव कर रहे हैं।
निष्कर्ष
थांदला-मेघनगर में वर्षितप आराधना न केवल जैन धर्म की धार्मिक परंपरा को जीवित रख रही है, बल्कि यह समाज में आत्म-नियंत्रण, तपस्या और सामूहिक अनुशासन की भावना को भी मजबूत कर रही है।
पूज्य गुरुदेव भगवंत उमेशमुनिजी “अणु” के जन्म शताब्दी वर्ष में इस वर्षितप आराधना का आयोजन विशेष रूप से ऐतिहासिक महत्व रखता है। यह कार्यक्रम केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि समाज में धार्मिक चेतना और सामूहिक अनुशासन का प्रतीक भी बन गया है।
