<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>JainReligion &#8211; Swaraj Vani</title>
	<atom:link href="https://swarajvani.com/tag/jainreligion/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://swarajvani.com</link>
	<description>From politics and jobs to culture and community stories, we deliver timely, unbiased updates that matter.</description>
	<lastBuildDate>Thu, 10 Sep 2026 12:08:30 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=7.1.3</generator>

<image>
	<url>https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/07/cropped-स्वराज-वाणी-1-32x32.png</url>
	<title>JainReligion &#8211; Swaraj Vani</title>
	<link>https://swarajvani.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>पर्युषण महापर्व में आज से कल्पसूत्र वाचन शुरू, 60 से अधिक श्रद्धालुओं ने दीपक एकासना कर की तप आराधना।</title>
		<link>https://swarajvani.com/kalpasutra-recitation-to-begin-today-during/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 10 Sep 2026 12:08:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[JAINS]]></category>
		<category><![CDATA[#Kalpasutra]]></category>
		<category><![CDATA[#KalpasutraRecitation]]></category>
		<category><![CDATA[#ParyushanMahaparva]]></category>
		<category><![CDATA[JainCommunity]]></category>
		<category><![CDATA[Jainism]]></category>
		<category><![CDATA[JainReligion]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://swarajvani.com/?p=356119</guid>

					<description><![CDATA[पर्युषण महापर्व में आज से होगा कल्पसूत्र वाचन का शुभारंभ दीपक एकासना में 60 से अधिक आराधकों ने की तप आराधना, ढोल-बाजों के साथ लाभार्थी परिवार के निवास पर पहुंचा ... <a title="पर्युषण महापर्व में आज से कल्पसूत्र वाचन शुरू, 60 से अधिक श्रद्धालुओं ने दीपक एकासना कर की तप आराधना।" class="read-more" href="https://swarajvani.com/kalpasutra-recitation-to-begin-today-during/" aria-label="Read more about पर्युषण महापर्व में आज से कल्पसूत्र वाचन शुरू, 60 से अधिक श्रद्धालुओं ने दीपक एकासना कर की तप आराधना।">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>पर्युषण महापर्व में आज से होगा कल्पसूत्र वाचन का शुभारंभ</strong></h1>
<p>दीपक एकासना में 60 से अधिक आराधकों ने की तप आराधना, ढोल-बाजों के साथ लाभार्थी परिवार के निवास पर पहुंचा कल्पसूत्र</p>
<p><strong>मेघनगर।</strong> पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के अवसर पर श्री राजेन्द्र सूरी जैन ज्ञान मंदिर में धार्मिक आराधना और विभिन्न अनुष्ठानों का क्रम निरंतर जारी है। महापर्व के तीसरे दिन मंदिर परिसर में श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहा। इस अवसर पर दीपक एकासना का आयोजन किया गया, जिसमें 60 से अधिक श्रद्धालुओं ने तप आराधना कर धर्मलाभ प्राप्त किया।</p>
<p>दीपक एकासना का लाभ कमलेशजी महावीरजी भंडारी परिवार ने लिया। आयोजन की संपूर्ण व्यवस्था परिषद परिवार द्वारा संभाली गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता के कारण मंदिर परिसर पूरे दिन धर्ममय वातावरण से सराबोर रहा।</p>
<h2><strong>श्रावक के कर्तव्यों पर दिया संदेश</strong></h2>
<p>धर्मसभा में पूज्य साध्वीश्रीजी ने श्रावकों के धार्मिक एवं सामाजिक कर्तव्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने श्रुत पूजा, देवद्रव्य वृद्धि, शासन प्रभावना और धार्मिक आराधनाओं के उद्यापन के महत्व को समझाया।</p>
<p>साध्वीश्रीजी ने कहा कि जिनवाणी के प्रति श्रद्धा रखना और ज्ञान की आराधना करना श्रुत पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी प्रकार देवद्रव्य की वृद्धि तथा जिनशासन की प्रभावना से जुड़े कार्यों में सहभागी बनना भी श्रावक का महत्वपूर्ण दायित्व है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि धार्मिक आराधनाओं का उद्यापन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि धर्म के प्रति श्रद्धा, अनुमोदना और समर्पण की भावना को मजबूत करने का माध्यम है। श्रावकों को इन धार्मिक कर्तव्यों को केवल आयोजन तक सीमित न रखते हुए अपने जीवन में आचरण के रूप में अपनाना चाहिए।</p>
<h2><strong>अंगरचना और प्रभावना का लाभ</strong></h2>
<p>पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन परमात्मा की सुंदर अंगरचना का लाभ दिलीपकुमारजी, गौरवजी, अंकितजी एवं मंत्र कोठारी परिवार ने लिया। वहीं प्रवचन की प्रभावना का लाभ भी दिलीपकुमारजी, गौरवजी, अंकितजी, मंत्र कोठारी परिवार, राजेन्द्रजी, प्रमोदजी, अंकितजी, रिधान लुणावत परिवार तथा सोहनलालजी, राहुलजी, रिदित एवं दीर्घ रुनवाल परिवार ने लिया।</p>
<p>श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए पुण्य लाभ अर्जित किया।</p>
<p><img decoding="async" class="size-medium wp-image-356125 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-10-at-4.33.25-AM-1-300x135.jpeg" alt="WhatsApp Image 2026 09 10 at 4.33.25 AM 1" width="300" height="135" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-10-at-4.33.25-AM-1-300x135.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-10-at-4.33.25-AM-1-1024x461.jpeg 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-10-at-4.33.25-AM-1-768x346.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-10-at-4.33.25-AM-1-1536x692.jpeg 1536w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-10-at-4.33.25-AM-1.jpeg 1599w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<h2><strong>कल्पसूत्र वाचन का आज से होगा शुभारंभ</strong></h2>
<p>पर्युषण महापर्व के महत्वपूर्ण धार्मिक प्रसंग कल्पसूत्र वाचन का शुभारंभ आज से होगा। कल्पसूत्र वोहराने का लाभ श्रीमती स्नेहलता मनोहरलालजी हीरालालजी कावड़िया परिवार ने लिया है।</p>
<p>कल्पसूत्र को ढोल-बाजों के साथ लाभार्थी कावड़िया परिवार के निवास स्थान <strong>‘जयंत-राज’</strong> पर ले जाया गया। इस दौरान लाभार्थी परिवार के सदस्यों के साथ श्रीसंघ के सदस्य तथा पूज्य साध्वीश्री मैत्रीकलाश्रीजी म.सा. एवं निरंजनकलाश्रीजी म.सा. भी उपस्थित रहीं।</p>
<p>लाभार्थी परिवार के निवास स्थान पर कल्पसूत्र की विधि-विधानपूर्वक स्थापना की गई। इसके बाद चैत्यवंदन की विधि संपन्न हुई। धार्मिक परंपरा के अनुसार श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ आयोजन में सहभागिता की।</p>
<h2><strong>मंदिर में लाकर होगी अष्टप्रकारी पूजा</strong></h2>
<p>आज प्रातः 8 बजे लाभार्थी कावड़िया परिवार द्वारा कल्पसूत्र को श्री राजेन्द्र सूरी जैन ज्ञान मंदिर में लाया जाएगा। इसके बाद पूज्य साध्वीजी भगवंत को कल्पसूत्र वोहराया जाएगा।</p>
<p>मंदिर में कल्पसूत्र की अष्टप्रकारी पूजन, वासक्षेप पूजन और आरती सहित विभिन्न धार्मिक विधियां संपन्न होंगी। इसके पश्चात पावन कल्पसूत्र वाचन का विधिवत शुभारंभ किया जाएगा।</p>
<p>कल्पसूत्र की आरती का लाभ पंकजजी हीरालालजी राका परिवार ने लिया है। धार्मिक आयोजन में श्रीसंघ के सदस्यों और श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रहने की संभावना है।</p>
<h2><strong>धर्म आराधना से बना भक्तिमय माहौल</strong></h2>
<p>पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन प्रवचन, अंगरचना, दीपक एकासना और कल्पसूत्र आगमन सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन आयोजनों के चलते श्री राजेन्द्र सूरी जैन ज्ञान मंदिर सहित पूरे श्रीसंघ में भक्तिमय एवं धर्ममय वातावरण बना रहा।</p>
<p>श्रद्धालु पर्युषण महापर्व के दौरान तप, त्याग, संयम और धार्मिक आराधना में उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। साध्वीश्रीजी द्वारा दिए जा रहे प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म के सिद्धांतों को जीवन में उतारने तथा आत्मिक साधना की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी जा रही है।</p>
<p>कल्पसूत्र वाचन के शुभारंभ के साथ पर्युषण महापर्व की धार्मिक गतिविधियों में और अधिक उत्साह देखने को मिलेगा। श्रीसंघ के श्रद्धालु इस पावन अवसर पर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागी बनकर धर्मलाभ प्राप्त करेंगे।</p>
<p><img decoding="async" class="size-medium wp-image-356126 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-10-at-4.33.24-AM-1-139x300.jpeg" alt="WhatsApp Image 2026 09 10 at 4.33.24 AM 1" width="139" height="300" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-10-at-4.33.24-AM-1-139x300.jpeg 139w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-10-at-4.33.24-AM-1-473x1024.jpeg 473w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-10-at-4.33.24-AM-1-709x1536.jpeg 709w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-10-at-4.33.24-AM-1.jpeg 739w" sizes="(max-width: 139px) 100vw, 139px" /></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>प्रतिष्ठा शिरोमणि कार्यशाला में निष्क्रमण और केवल ज्ञान कल्याणक पर हुआ विशेष मंथन</title>
		<link>https://swarajvani.com/pratishtha-shiromani-workshop-holds-detailed/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 09 Sep 2026 07:05:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[#JainScholars]]></category>
		<category><![CDATA[#JainTradition]]></category>
		<category><![CDATA[#NishkramanKalyanak]]></category>
		<category><![CDATA[#PratishthaShiromani]]></category>
		<category><![CDATA[JainDharma]]></category>
		<category><![CDATA[Jainism]]></category>
		<category><![CDATA[JainReligion]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://swarajvani.com/?p=355362</guid>

					<description><![CDATA[प्रतिष्ठा शिरोमणि कार्यशाला में निष्क्रमण और केवल ज्ञान कल्याणक पर हुआ विशेष मंथन हस्तलिखित एवं प्रकाशित ग्रंथों के आधार पर प्रतिष्ठा विधियों की समीक्षा, गुरु मां ने की कार्यशाला की ... <a title="प्रतिष्ठा शिरोमणि कार्यशाला में निष्क्रमण और केवल ज्ञान कल्याणक पर हुआ विशेष मंथन" class="read-more" href="https://swarajvani.com/pratishtha-shiromani-workshop-holds-detailed/" aria-label="Read more about प्रतिष्ठा शिरोमणि कार्यशाला में निष्क्रमण और केवल ज्ञान कल्याणक पर हुआ विशेष मंथन">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>प्रतिष्ठा शिरोमणि कार्यशाला में निष्क्रमण और केवल ज्ञान कल्याणक पर हुआ विशेष मंथन</strong></h1>
<h6>हस्तलिखित एवं प्रकाशित ग्रंथों के आधार पर प्रतिष्ठा विधियों की समीक्षा, गुरु मां ने की कार्यशाला की सराहना</h6>
<p><strong>घुवारा।</strong> प्रतिष्ठा शिरोमणि ग्रंथ कार्यशाला के अंतर्गत परम पूज्य गणिनी आर्यिका श्री 105 विन्धश्री माताजी के पावन सान्निध्य में जैन प्रतिष्ठा विधियों और कल्याणकों से जुड़े विषयों पर गहन मंथन किया गया। कार्यशाला में विद्वानों ने हस्तलिखित ग्रंथों, प्रकाशित प्रतिष्ठा ग्रंथों और पुराण ग्रंथों के आधार पर वर्तमान में प्रचलित प्रतिष्ठा विधियों की समीक्षा की।</p>
<p>कार्यशाला के दौरान विशेष रूप से <strong>निष्क्रमण कल्याणक और केवल ज्ञान कल्याणक</strong> की विधियों पर चर्चा हुई। विद्वानों ने प्राचीन ग्रंथों में वर्णित विधियों और वर्तमान में मंचीय रूप से आयोजित की जा रही विधियों के बीच दिखाई देने वाले अंतर पर विचार रखे तथा आवश्यक सुधार की जरूरत बताई।</p>
<h2><strong>निष्क्रमण कल्याणक पर हुई चर्चा</strong></h2>
<p>प्रातःकालीन सत्र में तप कल्याणक, जिसे ग्रंथों में <strong>निष्क्रमण कल्याणक</strong> कहा गया है, विषय पर हस्तलिखित ग्रंथों के आलोक में विशेष मंथन किया गया। वर्तमान प्रतिष्ठा विधि और मंचीय विधि में दिखाई देने वाली विभिन्न भिन्नताओं पर विद्वानों ने अपने विचार रखे।</p>
<p>चर्चा में प्रतिष्ठा ग्रंथों में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। कुछ प्रचलित व्याख्याओं को लेकर भी ग्रंथों और आचार्यों के कथनों के आधार पर पुनर्विचार की आवश्यकता बताई गई। इनमें ब्राह्मी-सुंदरी के ब्रह्मचर्य ग्रहण, तीर्थंकर माता के रुदन तथा तीर्थंकर पिता के वैराग्य भाव जैसे विषय शामिल रहे।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="size-medium wp-image-355366 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-08-at-8.43.28-PM-300x225.jpeg" alt="WhatsApp Image 2026 09 08 at 8.43.28 PM" width="300" height="225" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-08-at-8.43.28-PM-300x225.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-08-at-8.43.28-PM-1024x768.jpeg 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-08-at-8.43.28-PM-768x576.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-08-at-8.43.28-PM-1536x1152.jpeg 1536w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-08-at-8.43.28-PM.jpeg 1600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<h2><strong>गुरु मां ने की कार्यशाला की प्रशंसा</strong></h2>
<p>सत्र के समापन पर परम पूज्य गुरु मां बिंधश्री माताजी ने चर्चा की समीक्षा की और कार्यशाला के आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं देशभर में आयोजित की जानी चाहिए, ताकि प्राचीन ग्रंथों में वर्णित विधियों का अध्ययन और संरक्षण हो सके।</p>
<h2><strong>केवल ज्ञान कल्याणक विधि पर गहन मंथन</strong></h2>
<p>दोपहर के सत्र में <strong>केवल ज्ञान कल्याणक विधि</strong> पर विस्तार से चर्चा हुई। यह चर्चा 22 हस्तलिखित ग्रंथों, 20 प्रकाशित प्रतिष्ठा ग्रंथों और अनेक पुराण ग्रंथों के आधार पर शुरू की गई।</p>
<p>इस दौरान वर्तमान में प्रचलित कई विधियों पर गहन चिंतन किया गया। विशेष रूप से <strong>तिलक दान विधि</strong> पर चर्चा हुई। विद्वानों ने ग्रंथों में वर्णित प्रक्रिया और वर्तमान में कुछ स्थानों पर अपनाई जा रही मंचीय प्रक्रिया के बीच अंतर को सामने रखा।</p>
<p>इसके अलावा केवल ज्ञान कल्याणक के दौरान पालन की जाने वाली शुद्धि, जप, आराधना और अन्य सावधानियों पर भी विचार हुआ। विद्वानों ने कहा कि इन प्रक्रियाओं का धार्मिक महत्व है, लेकिन वर्तमान मंचीय कार्यक्रमों में कई बार इनका पूरी तरह पालन नहीं हो पाता।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-medium wp-image-355367 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-08-at-8.43.27-PM-1-225x300.jpeg" alt="WhatsApp Image 2026 09 08 at 8.43.27 PM 1" width="225" height="300" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-08-at-8.43.27-PM-1-225x300.jpeg 225w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-08-at-8.43.27-PM-1-768x1024.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-08-at-8.43.27-PM-1-1152x1536.jpeg 1152w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-08-at-8.43.27-PM-1.jpeg 1200w" sizes="auto, (max-width: 225px) 100vw, 225px" /></p>
<h2><strong>आगामी आयोजन की पत्रिका का विमोचन</strong></h2>
<p>कार्यशाला के समापन सत्र में परम पूज्य पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में <strong>ऋषभ बिहार, दिल्ली में 7, 8 और 9 अक्टूबर</strong> को आयोजित होने वाली प्रतिष्ठा शिरोमणि कार्यशाला की पत्रिका का विमोचन किया गया।</p>
<p>इसके साथ ही दस लक्षण पर्व के अवसर पर गुरु मां के सान्निध्य में <strong>गिरार जी में आयोजित होने वाले श्रावक संस्कार शिविर</strong> की पत्रिका का भी विमोचन हुआ।</p>
<h2><strong>विद्वानों और समाजजनों की रही सहभागिता</strong></h2>
<p>आयोजन में अनेक विद्वान, संगीतकार, मंच कलाकार और पत्रकार शामिल हुए। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण <strong>दिव्य ध्वनि यूट्यूब चैनल</strong> के माध्यम से किया जा रहा है। संगीतकार <strong>मयंक जैन बड़ागांव</strong> द्वारा प्रतिदिन रात्रि में संगीतमयी आरती कराई जा रही है।</p>
<p>कार्यक्रम में अध्यक्ष <strong>डॉ. विजय जैन</strong>, नरेंद्र कुमार, चंद्र कुमार, राकेश कुमार (लल्लू), संतोष कुमार (संतु), प्रकाश चंद (पप्पू), रजनेश (मंटू), विक्की सिंघई, रानू सेठ, सोनू सिंघई, कीर्ति जैन, रवि सिंघई, राही सिंघई, रीतेश सिंघई, अमर कपासिया, अवशेष जैन सिंघई, सौरभ जैन, सेठ विकास कुमार एवं सेठ दीपू कारीटोरन सहित अनेक समाजजन उपस्थित रहे।</p>
<p>कार्यशाला के माध्यम से प्राचीन ग्रंथों में वर्णित प्रतिष्ठा विधियों के अध्ययन, संरक्षण और उनके मूल स्वरूप पर विचार-विमर्श की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-medium wp-image-355365 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-08-at-8.43.28-PM-1-300x225.jpeg" alt="WhatsApp Image 2026 09 08 at 8.43.28 PM 1" width="300" height="225" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-08-at-8.43.28-PM-1-300x225.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-08-at-8.43.28-PM-1-1024x768.jpeg 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-08-at-8.43.28-PM-1-768x576.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-08-at-8.43.28-PM-1-1536x1152.jpeg 1536w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-08-at-8.43.28-PM-1.jpeg 1600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>जैन धर्म जाति नहीं, अनादि शाश्वत परंपरा; अहिंसा, आत्मसंयम और आध्यात्मिक मुक्ति का मार्ग है</title>
		<link>https://swarajvani.com/jainism-is-not-a-caste-but-an-eternal-timeless/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 05 Sep 2026 08:44:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[JAINS]]></category>
		<category><![CDATA[#Anekantavada]]></category>
		<category><![CDATA[Ahimsa]]></category>
		<category><![CDATA[Aparigraha]]></category>
		<category><![CDATA[JainCommunity]]></category>
		<category><![CDATA[JainDharma]]></category>
		<category><![CDATA[Jainism]]></category>
		<category><![CDATA[JainReligion]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://swarajvani.com/?p=353924</guid>

					<description><![CDATA[&#160; जैन धर्म जाति नहीं, अनादि और शाश्वत आध्यात्मिक परंपरा मुरैना (मनोज जैन नायक) । जैन दर्शन केवल जीवन जीने की पद्धति या किसी विशेष सामाजिक समुदाय की पहचान नहीं है, ... <a title="जैन धर्म जाति नहीं, अनादि शाश्वत परंपरा; अहिंसा, आत्मसंयम और आध्यात्मिक मुक्ति का मार्ग है" class="read-more" href="https://swarajvani.com/jainism-is-not-a-caste-but-an-eternal-timeless/" aria-label="Read more about जैन धर्म जाति नहीं, अनादि शाश्वत परंपरा; अहिंसा, आत्मसंयम और आध्यात्मिक मुक्ति का मार्ग है">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<div class="_wdUoQG_assistantMessage">
<div>
<div class="_wdUoQG_messageCopy _A1mksG_dilContent _pKBN-W_sportsContent" data-assistant-markdown="">
<h1><strong>जैन धर्म जाति नहीं, अनादि और शाश्वत आध्यात्मिक परंपरा</strong></h1>
<p><strong>मुरैना (मनोज जैन नायक) ।</strong> जैन दर्शन केवल जीवन जीने की पद्धति या किसी विशेष सामाजिक समुदाय की पहचान नहीं है, बल्कि यह अनादि और शाश्वत आध्यात्मिक परंपरा है। अहिंसा, अनेकांत, अपरिग्रह और आत्मकल्याण जैसे सार्वभौमिक सिद्धांतों पर आधारित जैन दर्शन प्रत्येक जीव के आध्यात्मिक उत्थान और मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।</p>
<p>जैन परंपरा के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव का उल्लेख प्राचीन भारतीय साहित्य में मिलता है। जैन मान्यता के अनुसार भगवान ऋषभदेव ने मानव समाज को व्यवस्थित जीवन, श्रम, अनुशासन और आत्मसंयम की दिशा प्रदान की। उनके पुत्र चक्रवर्ती सम्राट भरत का भी भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। जैन परंपरा में भारतवर्ष के नाम को भी सम्राट भरत से जोड़ा जाता है।</p>
<h3><strong>अहिंसा और सह-अस्तित्व का संदेश</strong></h3>
<p>जैन धर्म का मूल संदेश <strong>‘परस्परोपग्रहो जीवानाम्’</strong> है, जिसका अर्थ है कि जीव एक-दूसरे के उपकारक हैं। अहिंसा को सर्वोच्च जीवन-मूल्य मानने वाला जैन दर्शन मनुष्य को करुणा, संयम, सह-अस्तित्व और आत्मनियंत्रण का संदेश देता है।</p>
<p>आज जब दुनिया हिंसा, तनाव, असहिष्णुता और संघर्ष जैसी चुनौतियों से गुजर रही है, ऐसे समय में जैन दर्शन के अहिंसा और सह-अस्तित्व के सिद्धांत और भी प्रासंगिक हो जाते हैं। जैन धर्म मनुष्य को केवल बाहरी उपलब्धियों की ओर नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मकल्याण की दिशा में भी प्रेरित करता है।</p>
<h3><strong>जातिगत पहचान से अलग है धार्मिक पहचान</strong></h3>
<p>आधुनिक सामाजिक व्यवस्था में कई बार जैन को धर्म के बजाय जातिगत पहचान के रूप में देखा जाता है। यह दृष्टिकोण जैन दर्शन की व्यापकता और मौलिकता को सीमित करता है। जाति सामाजिक, पारिवारिक या वंशगत पहचान हो सकती है, जबकि धर्म व्यक्ति की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आस्था से जुड़ा विषय है।</p>
<p>जैन समाज में विभिन्न सामाजिक जातियां और उपसमूह मौजूद हैं। खंडेलवाल, पोरवाल, मोदी, सिंघई, गोलछा, पटवारी सहित कई सामाजिक पहचानें जैन समाज में प्रचलित हैं। इनकी सामाजिक पहचान अलग-अलग हो सकती है, लेकिन धार्मिक दृष्टि से इन सभी की मूल पहचान जैन धर्म से जुड़ी हुई है।</p>
<h3><strong>धार्मिक पहचान को लेकर जागरूकता जरूरी</strong></h3>
<p>आगामी राष्ट्रीय जनगणना के संदर्भ में भी धार्मिक पहचान को लेकर जागरूकता आवश्यक है। जनगणना प्रपत्र में धर्म और जाति से संबंधित जो आधिकारिक प्रावधान एवं विकल्प उपलब्ध हों, उन्हें समझकर प्रत्येक व्यक्ति को अपनी वास्तविक धार्मिक और सामाजिक पहचान का सही उल्लेख करना चाहिए।</p>
<p>यदि सरकारी प्रपत्र में धर्म के लिए पृथक विकल्प उपलब्ध हो, तो जैन धर्मावलंबियों को अपनी धार्मिक पहचान स्पष्ट रूप से <strong>‘जैन’</strong> के रूप में दर्ज करानी चाहिए। यह केवल किसी दस्तावेज में एक शब्द दर्ज कराने का विषय नहीं, बल्कि अपनी धार्मिक पहचान और परंपरा के प्रति जागरूकता से भी जुड़ा हुआ है।</p>
<h3><strong>धर्म केवल नाम नहीं, आचरण भी है</strong></h3>
<p>धार्मिक पहचान केवल नाम के पीछे ‘जैन’ लिखने तक सीमित नहीं है। यह व्यक्ति के विचार, व्यवहार, संस्कार और जीवन मूल्यों में भी दिखाई देती है। अहिंसा, संयम, सत्य, अपरिग्रह और आत्मचिंतन जैसे सिद्धांत जैन जीवन-दर्शन की महत्वपूर्ण विशेषताएं हैं।</p>
<p>साथ ही, जहां सरकारी अथवा प्रशासनिक दस्तावेजों में धर्म की जानकारी दर्ज की जाती है, वहां अपनी वास्तविक धार्मिक पहचान स्पष्ट रूप से अंकित कराना जागरूक नागरिकता का हिस्सा है।</p>
<h3><strong>नई पीढ़ी को जैन दर्शन से जोड़ने की आवश्यकता</strong></h3>
<p>आज आवश्यकता इस बात की है कि जैन समाज अपनी गौरवशाली परंपरा और मौलिक सिद्धांतों के प्रति अधिक जागरूक बने। नई पीढ़ी को जैन धर्म की ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक विरासत से परिचित कराने के साथ उसके मूल सिद्धांतों को जीवन में अपनाने के लिए भी प्रेरित किया जाना चाहिए।</p>
<p>जैन धर्म को केवल किसी जाति या सामाजिक समूह की पहचान के रूप में देखने के बजाय इसे अहिंसा, आत्मसंयम, करुणा और आध्यात्मिक मुक्ति का मार्ग बताने वाली स्वतंत्र एवं शाश्वत परंपरा के रूप में समझना आवश्यक है।</p>
<p>जैन दर्शन का संदेश किसी एक समाज तक सीमित नहीं है। जीव मात्र के प्रति करुणा, हिंसा से दूर रहने, आवश्यकताओं को सीमित करने और आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश पूरी मानवता के लिए महत्वपूर्ण है।</p>
<p>इसलिए जैन समाज के लिए अपनी धार्मिक पहचान और परंपरा के प्रति जागरूक होना जितना आवश्यक है, उतना ही जरूरी है कि आने वाली पीढ़ियों तक जैन दर्शन के मूल सिद्धांतों को सही स्वरूप में पहुंचाया जाए।</p>
<p><strong>जैन धर्म की पहचान जाति से नहीं, बल्कि उसके शाश्वत सिद्धांतों, आस्था, आचरण और आध्यात्मिक दर्शन से है। अहिंसा और आत्मसंयम पर आधारित यह परंपरा भारतीय संस्कृति की प्राचीन आध्यात्मिक धारा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।</strong></p>
<p><strong>लेखक — अरिहंत जैन मलगुवां</strong></p>
</div>
</div>
<div data-message-intervention=""></div>
</div>
<div class="_wdUoQG_messageActions _wdUoQG_assistantMessageActions" role="group" aria-label="Response actions" data-assistant-message-actions="" data-message-actions=""></div>
<div data-conversation-inline-beacon-slot=""></div>
<div class="wm-app-disclosureThreadEnd" data-mobile-disclosure-thread-end="">
<div class="wm-app-privacyPositioner">
<div data-compact-disclaimer="ChatGPT is AI and can make mistakes." data-privacy-notice=""></div>
</div>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Nagda में 36 दिवसीय नवकार कलश यात्रा के तहत निकली भव्य यात्रा, श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से नवकार महामंत्र का किया स्मरण</title>
		<link>https://swarajvani.com/navkar-mahamantra-echoes-in-nagda-as-devote/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Sep 2026 11:26:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[nagda]]></category>
		<category><![CDATA[#NavkarMahamantra]]></category>
		<category><![CDATA[Devotees]]></category>
		<category><![CDATA[JainCommunity]]></category>
		<category><![CDATA[JainReligion]]></category>
		<category><![CDATA[Nagda]]></category>
		<category><![CDATA[NavkarKalashYatra]]></category>
		<category><![CDATA[ReligiousEvent]]></category>
		<category><![CDATA[Spirituality]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://swarajvani.com/?p=353060</guid>

					<description><![CDATA[&#160; Nagda में गूंज रहा नवकार महामंत्र, श्रद्धा और भक्ति के साथ निकली नवकार कलश यात्रा 36 दिवसीय धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने लिया धर्मलाभ, नवकार महामंत्र ... <a title="Nagda में 36 दिवसीय नवकार कलश यात्रा के तहत निकली भव्य यात्रा, श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से नवकार महामंत्र का किया स्मरण" class="read-more" href="https://swarajvani.com/navkar-mahamantra-echoes-in-nagda-as-devote/" aria-label="Read more about Nagda में 36 दिवसीय नवकार कलश यात्रा के तहत निकली भव्य यात्रा, श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से नवकार महामंत्र का किया स्मरण">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<h1><strong>Nagda में गूंज रहा नवकार महामंत्र, श्रद्धा और भक्ति के साथ निकली नवकार कलश यात्रा</strong></h1>
<h3>36 दिवसीय धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने लिया धर्मलाभ, नवकार महामंत्र जाप से भक्तिमय हुआ नगर</h3>
<p><strong>Nagda ।</strong> नगर में इन दिनों नवकार महामंत्र की आध्यात्मिक गूंज सुनाई दे रही है। 23 अगस्त से प्रारंभ हुए 36 दिवसीय नवकार मंत्र से अभिमंत्रित नवकार कलश यात्रा के अंतर्गत गुरुवार, 3 सितंबर को श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उत्साह के साथ नवकार कलश यात्रा निकाली गई। परम पूज्य साध्वीजी भगवंत श्री अर्हमव्रता श्रीजी म.सा. आदि ठाणा-4 की पावन निश्रा में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं और धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।</p>
<p>नवकार महामंत्र जाप और कलश यात्रा के माध्यम से नगर में धार्मिक वातावरण बना हुआ है। आयोजन से जुड़े श्रद्धालु नियमित रूप से धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होकर आत्मिक शांति, सुख, समृद्धि और समाज में सकारात्मक ऊर्जा की मंगलकामना कर रहे हैं।</p>
<h3><strong>जीरावला अनुष्ठान के बाद शुरू हुआ चल समारोह</strong></h3>
<p>गुरुवार को निर्धारित धार्मिक कार्यक्रम के अनुसार जीरावला अनुष्ठान के पश्चात प्रातः 11 बजे प्रधान पाठशाला भवन से नवकार कलश यात्रा का चल समारोह प्रारंभ हुआ। श्रद्धालु धार्मिक भावनाओं के साथ कलश लेकर यात्रा में शामिल हुए। नवकार महामंत्र के स्मरण और जाप के बीच निकली यात्रा में भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था।</p>
<p>यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने नवकार महामंत्र का निरंतर स्मरण किया। धार्मिक आयोजन होने के कारण पूरे मार्ग पर भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्रावक-श्राविकाओं ने अनुशासन और श्रद्धा के साथ यात्रा में भाग लेकर धार्मिक लाभ प्राप्त किया।</p>
<h3><strong>श्रद्धालुओं की रही बड़ी सहभागिता</strong></h3>
<p>नवकार कलश यात्रा में नगर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रावक-श्राविकाएं और धर्मप्रेमी नागरिक शामिल हुए। धार्मिक आयोजन के प्रति लोगों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। कई श्रद्धालुओं ने नवकार महामंत्र के जाप के साथ अपनी आध्यात्मिक साधना को आगे बढ़ाया।</p>
<p>आयोजकों के अनुसार 36 दिवसीय इस आयोजन का उद्देश्य नवकार महामंत्र की आराधना के माध्यम से धार्मिक वातावरण को मजबूत करना और समाज में सुख, शांति एवं समृद्धि की भावना को बढ़ावा देना है। इसी भावना के साथ प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-medium wp-image-353067 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-03-at-4.18.05-AM-300x200.jpeg" alt="WhatsApp Image 2026 09 03 at 4.18.05 AM" width="300" height="200" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-03-at-4.18.05-AM-300x200.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-03-at-4.18.05-AM-1024x682.jpeg 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-03-at-4.18.05-AM-768x512.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-03-at-4.18.05-AM.jpeg 1280w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<h3><strong>दोपहर से शुरू हुआ नवकार महामंत्र जाप</strong></h3>
<p>नवकार कलश यात्रा के समापन के पश्चात दोपहर 11 बजे से श्री नवकार महामंत्र जाप का शुभारंभ हुआ। यह जाप 4 सितंबर को प्रातः 8 बजे तक निरंतर चलेगा। नवकार महामंत्र जाप का आयोजन शरद स्टोर्स परिवार, रानी लक्ष्मीबाई मार्ग, नागदा जंक्शन स्थित यहां किया गया है।</p>
<p>महामंत्र जाप के दौरान श्रद्धालु सामूहिक रूप से नवकार महामंत्र का जाप कर रहे हैं। धार्मिक वातावरण में होने वाले इस सामूहिक जाप में नगर के विभिन्न परिवारों और धर्मप्रेमी नागरिकों की सहभागिता बनी हुई है।</p>
<h3><strong>शरद स्टोर्स परिवार बना आयोजन का लाभार्थी</strong></h3>
<p>गुरुवार को आयोजित नवकार महामंत्र जाप एवं नवकार कलश यात्रा के लाभार्थी चातुर्मास अध्यक्ष एवं शरद स्टोर्स परिवार हैं। लाभार्थी परिवार द्वारा धार्मिक आयोजन में सहभागिता करते हुए नवकार महामंत्र जाप और कलश यात्रा के कार्यक्रम में अपना योगदान दिया गया।</p>
<p>धार्मिक आयोजनों में लाभार्थी परिवारों की सहभागिता को समाज में सेवा, धर्म और सामूहिक आध्यात्मिक साधना की भावना से जोड़कर देखा जाता है। आयोजन से जुड़े लोगों ने लाभार्थी परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया।</p>
<h3><strong>36 दिवसीय आयोजन में लगातार धार्मिक गतिविधियां</strong></h3>
<p>23 अगस्त से प्रारंभ हुआ यह 36 दिवसीय धार्मिक आयोजन नागदा में लगातार श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। आयोजन के दौरान नवकार महामंत्र की आराधना, जाप और अन्य धार्मिक गतिविधियों में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं।</p>
<p>नवकार महामंत्र जैन धर्म में विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। श्रद्धालु इसके जाप को आत्मशुद्धि, आध्यात्मिक उन्नति और मन की शांति से जोड़कर देखते हैं। इसी भावना के साथ नगर में चल रहे इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोग अपनी सहभागिता दर्ज करा रहे हैं।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-medium wp-image-353068 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-03-at-4.18.04-AM-300x200.jpeg" alt="WhatsApp Image 2026 09 03 at 4.18.04 AM" width="300" height="200" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-03-at-4.18.04-AM-300x200.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-03-at-4.18.04-AM-1024x682.jpeg 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-03-at-4.18.04-AM-768x512.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-03-at-4.18.04-AM.jpeg 1280w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<h3><strong>नगर में बना भक्तिमय माहौल</strong></h3>
<p>नवकार कलश यात्रा के दौरान नगर का माहौल धार्मिक और भक्तिमय नजर आया। श्रद्धालुओं के सामूहिक रूप से महामंत्र का स्मरण करने से वातावरण में आध्यात्मिकता का संचार हुआ। आयोजन के दौरान धर्मप्रेमी नागरिकों में विशेष उत्साह देखने को मिला।</p>
<p>36 दिवसीय आयोजन के माध्यम से धार्मिक गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। आयोजकों का मानना है कि इस प्रकार के सामूहिक धार्मिक आयोजन समाज में आपसी एकता, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करते हैं।</p>
<h3><strong>सुख, शांति और समृद्धि की मंगलकामना</strong></h3>
<p>आयोजन में शामिल श्रद्धालु नगर, समाज और सभी परिवारों के लिए सुख, शांति एवं समृद्धि की मंगलकामना कर रहे हैं। नवकार महामंत्र जाप के माध्यम से श्रद्धालु धार्मिक आराधना में सहभागी बन रहे हैं।</p>
<p>धर्मसभा और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से लोगों को अपने जीवन में सकारात्मकता, संयम और आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा भी मिलती है। इसी उद्देश्य से 36 दिवसीय आयोजन को श्रद्धापूर्वक आगे बढ़ाया जा रहा है।</p>
<h3><strong>अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से सहभागिता का आग्रह</strong></h3>
<p>आयोजकों ने समस्त श्रावक-श्राविकाओं एवं धर्मप्रेमी नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर नवकार महामंत्र जाप और धार्मिक आराधना का लाभ लेने का अनुरोध किया है।</p>
<p>आयोजकों ने कहा कि सामूहिक धार्मिक आराधना में प्रत्येक श्रद्धालु की सहभागिता आयोजन को और अधिक सार्थक बनाती है। इसलिए समाज के सभी वर्गों से इस धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने और नवकार महामंत्र की आराधना का लाभ लेने की अपील की गई है।</p>
<h3><strong>निरंतर जारी रहेगा धार्मिक आयोजन</strong></h3>
<p>नागदा में 23 अगस्त से प्रारंभ हुई 36 दिवसीय नवकार कलश यात्रा के माध्यम से धार्मिक गतिविधियों का क्रम लगातार जारी है। गुरुवार को निकली कलश यात्रा और उसके बाद शुरू हुए नवकार महामंत्र जाप ने नगर के वातावरण को भक्तिमय बना दिया।</p>
<p>श्रद्धालु पूरे उत्साह और आस्था के साथ इस आयोजन में भाग ले रहे हैं। आने वाले दिनों में भी धार्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला जारी रहेगा। आयोजकों और श्रद्धालुओं को उम्मीद है कि नवकार महामंत्र की सामूहिक आराधना से नगर में सुख, शांति, समृद्धि और सद्भाव की भावना और मजबूत होगी।</p>
<p><strong>नागदा से जीवनलाल जैन की रिपोर्ट।</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मुनियों और आर्यिका माताजी की सुरक्षा के लिए पुलिस व्यवस्था का सदैव उपयोग करें : मुनि सुधासागर</title>
		<link>https://swarajvani.com/munishri-sudhasagar-calls-for-police-security/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 03 Sep 2026 10:19:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Morena]]></category>
		<category><![CDATA[#AryikaMataji]]></category>
		<category><![CDATA[#MunishriSudhasagar]]></category>
		<category><![CDATA[#PoliceSecurity]]></category>
		<category><![CDATA[#ReligiousProcession]]></category>
		<category><![CDATA[JainReligion]]></category>
		<category><![CDATA[JainSaints]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://swarajvani.com/?p=353013</guid>

					<description><![CDATA[मुनियों और आर्यिका माताजी की सुरक्षा के लिए पुलिस व्यवस्था का सदैव उपयोग करें : मुनि सुधासागर अनहोनी के बाद जागरूक होने से बेहतर है पहले से सतर्क रहना मुरैना/इंदौर ... <a title="मुनियों और आर्यिका माताजी की सुरक्षा के लिए पुलिस व्यवस्था का सदैव उपयोग करें : मुनि सुधासागर" class="read-more" href="https://swarajvani.com/munishri-sudhasagar-calls-for-police-security/" aria-label="Read more about मुनियों और आर्यिका माताजी की सुरक्षा के लिए पुलिस व्यवस्था का सदैव उपयोग करें : मुनि सुधासागर">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>मुनियों और आर्यिका माताजी की सुरक्षा के लिए पुलिस व्यवस्था का सदैव उपयोग करें : मुनि सुधासागर</strong></h1>
<p class="isSelectedEnd"><strong>अनहोनी के बाद जागरूक होने से बेहतर है पहले से सतर्क रहना</strong></p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>मुरैना/इंदौर (मनोज जैन नायक।</strong> निर्यापक श्रमण मुनि पुगंवश्री सुधासागरजी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मुनियों एवं आर्यिका माताजी के नगर प्रवेश और धार्मिक आयोजनों के दौरान पुलिस सुरक्षा का सदैव उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा दिगंबर श्रमणों एवं आर्यिका माताजी को सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती रही है। ऐसे में समाज को सरकारी सुरक्षा व्यवस्था का लाभ लेकर धार्मिक आयोजनों और विहार के दौरान पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd">मुनिश्री ने कहा कि समाज को किसी अनहोनी के बाद यह सोचने की आवश्यकता नहीं पड़नी चाहिए कि यदि पुलिस सुरक्षा होती तो हादसा टल सकता था। धार्मिक जुलूसों एवं श्रमणों के विहार के दौरान पुलिस सुरक्षा लेना और उसका रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखना आवश्यक है। सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत व्यवस्था होने से दुर्घटनाओं की आशंका कम होती है और कानून-व्यवस्था भी मजबूत रहती है। उन्होंने सभी धार्मिक जुलूसों में पुलिस सुरक्षा लेने का आह्वान किया।</p>
<h3><strong>जीवन को रिंग रोड की तरह न बनाएं</strong></h3>
<p class="isSelectedEnd">मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि <strong>“जीवन को रिंग रोड की तरह मत बनाओ। रास्ते बहुत हैं, लेकिन मंजिलें कम हैं।”</strong> उन्होंने कहा कि कुछ रास्ते ऐसे होते हैं जो घूम-फिरकर व्यक्ति को फिर उसी स्थान पर पहुंचा देते हैं। संसार में रहने वाला जीव जब परेशान होता है तो मंदिर जाता है, जाप करता है और कुछ समय साधुओं की संगति भी करता है। इस प्रकार संसारी जीव पाप से भयभीत होकर बीच-बीच में धर्म करता रहता है, लेकिन उसे अपने जीवन की दिशा और अंतिम मंजिल पर निरंतर विचार करना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि व्यक्ति कषायों के दुष्परिणामों को देखकर कुछ समय के लिए धर्म की ओर बढ़ता है, लेकिन आवश्यकता इस बात की है कि धर्म को जीवन का स्थायी आधार बनाया जाए। धर्म केवल परेशानी के समय सहारा लेने का माध्यम न हो, बल्कि जीवन की दिशा निर्धारित करने वाली शक्ति बने।</p>
<h3><strong>जैन समाज और सरकार का संबंध आदर्शपूर्ण</strong></h3>
<p class="isSelectedEnd">मुनिश्री ने टैक्स का उदाहरण देते हुए कहा कि जैन समाज और सरकार का संबंध हमेशा से आदर्शपूर्ण रहा है। जैन समाज कर के रूप में महत्वपूर्ण योगदान देता है, लेकिन सरकारी सेवाओं का अपेक्षाकृत कम उपयोग करता है। उन्होंने समाज से जागरूक रहने और शासन-प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाओं का उपयोग करने की अपील की।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-medium wp-image-353015 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-03-at-3.14.55-AM-300x200.jpeg" alt="WhatsApp Image 2026 09 03 at 3.14.55 AM" width="300" height="200" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-03-at-3.14.55-AM-300x200.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-03-at-3.14.55-AM-1024x682.jpeg 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-03-at-3.14.55-AM-768x512.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-03-at-3.14.55-AM-1536x1023.jpeg 1536w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-03-at-3.14.55-AM.jpeg 1600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<h3><strong>वस्तु के उपभोग की शुरुआत धर्म और दान से करें</strong></h3>
<p class="isSelectedEnd">मुनिश्री ने कहा कि <strong>“वस्तु के उपभोग की शुरुआत धर्म और दान से करें।”</strong> उन्होंने सुबह-शाम मंदिर में शुभ शुरुआत करने की परंपरा विकसित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि सुबह का पहला दान मंदिर में देकर व्यापार का शुभारंभ करने की भावना रखनी चाहिए। घर के बच्चों से लेकर स्त्री-पुरुष तक सभी के संस्कार दान की भावना से प्रारंभ हों।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने महिलाओं से भी अपील की कि खरीदारी करते समय अपनी क्षमता के अनुसार कुछ अंश दान के लिए अलग रखें। दान की भावना जीवन में शुभ संस्कारों को जन्म देती है। धर्म, दान और संस्कारों के माध्यम से जीवन में शुभता आती है तथा व्यक्ति के भीतर त्याग और सेवा की भावना विकसित होती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस अवसर पर बाल ब्रह्मचारी महावीर भैया, अध्यक्ष अशोक जी डोशी, दान शिरोमणि आशा रानी पांड्या, सामाजिक संसद अध्यक्ष आनंद जी गोधा, महोत्सव महामंत्री हर्ष जी जैन सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभा का कुशल संचालन अनुराग जैन ने किया, जबकि मंगलाचरण संगीता सेठी ने प्रस्तुत किया।</p>
<p><strong>प्रेषक : विद्वत इन्द्र कुमार जैन, मुरैना</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>णमोकार महामंत्र के जयघोष से आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हुई जैन बगीची</title>
		<link>https://swarajvani.com/jain-bagichi-resonates-chants-of-namokar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 31 Aug 2026 10:02:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Morena]]></category>
		<category><![CDATA[JainBagichi]]></category>
		<category><![CDATA[JainCommunity]]></category>
		<category><![CDATA[Jainism]]></category>
		<category><![CDATA[JainReligion]]></category>
		<category><![CDATA[JainSamaj]]></category>
		<category><![CDATA[NamokarMahamantra]]></category>
		<category><![CDATA[NamokarMantra]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://swarajvani.com/?p=351655</guid>

					<description><![CDATA[&#160; णमोकार महामंत्र के जयघोष से आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हुई जैन बगीची 35 दिवसीय णमोकार महामंत्र अर्चना के तहत नायक परिवार ने कराया संगीतमय महाआरती का आयोजन मुरैना/अम्बाह। मनोज ... <a title="णमोकार महामंत्र के जयघोष से आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हुई जैन बगीची" class="read-more" href="https://swarajvani.com/jain-bagichi-resonates-chants-of-namokar/" aria-label="Read more about णमोकार महामंत्र के जयघोष से आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हुई जैन बगीची">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<h1><strong>णमोकार महामंत्र के जयघोष से आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हुई जैन बगीची</strong></h1>
<h2>35 दिवसीय णमोकार महामंत्र अर्चना के तहत नायक परिवार ने कराया संगीतमय महाआरती का आयोजन</h2>
<p><strong>मुरैना/अम्बाह। मनोज जैन नायक।</strong> नगर की जैन बगीची में रविवार की शाम भक्ति, आराधना और आध्यात्मिक साधना का अनुपम वातावरण देखने को मिला। परम पूज्य गुरु मां गणिनी आर्यिका रत्न 105 श्री संगममति माताजी ससंघ के मंगल सान्निध्य में चल रही <strong>35 दिवसीय णमोकार महामंत्र अर्चना</strong> के अंतर्गत नायक परिवार कमतरी वालों द्वारा संगीतमय महाआरती का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए धार्मिक आराधना का लाभ लिया।</p>
<p>धार्मिक आयोजन का शुभारंभ तहसील के समीप स्थित नायक परिवार के निज निवास से हुआ। शाम करीब 6 बजे श्रद्धालु भक्ति गीतों और णमोकार महामंत्र के जयघोष के साथ जैन बगीची के लिए रवाना हुए। यात्रा के दौरान वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं के जैन बगीची पहुंचने के बाद परिसर में भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण और अधिक गहरा हो गया।</p>
<p>इसके बाद विधि-विधान एवं भक्तिभाव के साथ श्रीजी की संगीतमय महाआरती संपन्न हुई। महाआरती में समाज के महिला-पुरुष, युवा एवं वरिष्ठजन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। भक्ति संगीत और धार्मिक जयघोष के बीच श्रद्धालुओं ने श्रीजी के समक्ष आराधना करते हुए परिवार एवं समाज की सुख-शांति और मंगलकामना की।</p>
<h2><strong>एक घंटे तक हुआ सामूहिक णमोकार महामंत्र जाप</strong></h2>
<p>महाआरती के पश्चात श्रद्धालुओं ने लगभग एक घंटे तक सामूहिक रूप से णमोकार महामंत्र का जाप किया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं द्वारा एक साथ किए गए मंत्रोच्चार से जैन बगीची परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। शांत और भक्तिमय वातावरण में महामंत्र की आराधना ने श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव कराया।</p>
<p>श्रद्धालुओं ने णमोकार महामंत्र का जाप करते हुए अपने जीवन में धर्म, संयम, सद्भाव और संस्कारों को अपनाने का संकल्प लिया। आयोजन के दौरान धार्मिक वातावरण के साथ समाज में एकता और आपसी सद्भाव का संदेश भी देखने को मिला।</p>
<h2><strong>नायक परिवार ने प्राप्त किया महाआरती का पुण्यार्जन</strong></h2>
<p>महाआरती का पुण्यार्जन स्वर्गीय राधाचरण जैन कमतरी वालों के परिजनों ने प्राप्त किया। पुण्यार्जक परिवार में कपूर चंद जैन, हेमलता जैन, हजारी लाल जैन, इंजीनियर अंकित जैन, वर्षा जैन, राहुल जैन, सौरभ जैन, सोनम जैन, मनीष जैन, कल्पना जैन सहित समस्त नायक परिवार कमतरी वाले, डॉक्टर कॉलोनी अम्बाह एवं अहिंसा परिवार दिल्ली के सदस्य शामिल रहे।</p>
<p>परिवारजनों ने धार्मिक आयोजन में सहभागिता को अपना सौभाग्य बताते हुए कहा कि गुरु मां गणिनी आर्यिका रत्न 105 श्री संगममति माताजी ससंघ के मंगल सान्निध्य में चल रही 35 दिवसीय आराधना समाजजनों के लिए आध्यात्मिक साधना का महत्वपूर्ण अवसर है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-medium wp-image-351660 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-31-at-2.27.21-AM-300x135.jpeg" alt="WhatsApp Image 2026 08 31 at 2.27.21 AM" width="300" height="135" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-31-at-2.27.21-AM-300x135.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-31-at-2.27.21-AM-1024x462.jpeg 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-31-at-2.27.21-AM-768x347.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-31-at-2.27.21-AM-1536x694.jpeg 1536w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-31-at-2.27.21-AM.jpeg 1599w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<h2><strong>णमोकार महामंत्र आत्मिक शांति का माध्यम : अंकित जैन</strong></h2>
<p>इस अवसर पर इंजीनियर अंकित जैन ने कहा कि णमोकार महामंत्र जैन धर्म में आत्मिक शांति और आध्यात्मिक साधना का महत्वपूर्ण माध्यम है। महामंत्र की सामूहिक आराधना से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति के भीतर सकारात्मक विचारों का संचार होता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि गुरु मां संगममति माताजी ससंघ के मंगल सान्निध्य में चल रही 35 दिवसीय णमोकार महामंत्र अर्चना के दौरान महाआरती का पुण्यार्जन प्राप्त करना परिवार के लिए गौरव और सौभाग्य का विषय है। ऐसे धार्मिक आयोजनों से नई पीढ़ी को धर्म और संस्कारों से जोड़ने के साथ समाज में सद्भाव, एकता और धार्मिक जागरूकता को भी बढ़ावा मिलता है।</p>
<h2><strong>चातुर्मास समिति और सकल समाज की सहभागिता</strong></h2>
<p>कार्यक्रम का आयोजन चातुर्मास समिति अम्बाह एवं सकल दिगंबर जैन समाज के तत्वावधान में किया गया। आयोजन में समाजजनों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए णमोकार महामंत्र की आराधना का लाभ लिया।</p>
<p>श्रद्धालुओं ने कहा कि इस प्रकार के सामूहिक धार्मिक आयोजन केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समाज में आध्यात्मिक चेतना, संस्कार, भाईचारा और एकजुटता को मजबूत करने का कार्य करते हैं।</p>
<p>35 दिवसीय णमोकार महामंत्र अर्चना के दौरान होने वाले विभिन्न धार्मिक आयोजनों को लेकर समाजजनों में विशेष उत्साह बना हुआ है। जैन बगीची में रविवार को हुए महाआरती और सामूहिक मंत्र जाप ने इसी आध्यात्मिक वातावरण को और अधिक गहरा कर दिया।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मानव शरीर नश्वर और अपवित्र होते हुए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है : आचार्य उदारसागर</title>
		<link>https://swarajvani.com/human-body-is-mortal-yet-precious-it-is-the/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 31 Aug 2026 09:57:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Morena]]></category>
		<category><![CDATA[#AcharyaUdarSagarJi]]></category>
		<category><![CDATA[AcharyaUdarSagar]]></category>
		<category><![CDATA[Jainism]]></category>
		<category><![CDATA[JainReligion]]></category>
		<category><![CDATA[JainSamaj]]></category>
		<category><![CDATA[MuniUpashantSagarJi]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://swarajvani.com/?p=351646</guid>

					<description><![CDATA[ मानव शरीर नश्वर और अपवित्र होते हुए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है : आचार्य उदारसागर दोष नहीं, गुण देखने की हो दृष्टि; रत्नत्रय की साधना के लिए मानव जीवन को बनाएं ... <a title="मानव शरीर नश्वर और अपवित्र होते हुए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है : आचार्य उदारसागर" class="read-more" href="https://swarajvani.com/human-body-is-mortal-yet-precious-it-is-the/" aria-label="Read more about मानव शरीर नश्वर और अपवित्र होते हुए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है : आचार्य उदारसागर">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong> </strong><strong>मानव शरीर नश्वर और अपवित्र होते हुए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है : आचार्य उदारसागर</strong></h1>
<h2>दोष नहीं, गुण देखने की हो दृष्टि; रत्नत्रय की साधना के लिए मानव जीवन को बनाएं माध्यम</h2>
<p><strong>मुरैना। मनोज जैन नायक।</strong> नगर के जैन उपासना स्थल में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए परम पूज्य आचार्य श्री 108 उदारसागर महाराज ने निर्विचिकित्सा अंग की विस्तृत व्याख्या करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, धर्मात्माओं और मानव जीवन के महत्व का संदेश दिया। आचार्य श्री ने कहा कि धर्म और धर्मात्मा के प्रति मन में कभी घृणा, ग्लानि अथवा मात्सर्य का भाव नहीं रखना चाहिए। दूसरों की साधना, तपस्या और धर्माराधना को देखकर ईर्ष्या करने के बजाय उनके गुणों की अनुमोदना करना चाहिए।</p>
<p>आचार्य श्री ने कहा कि जिसके भीतर गुणग्राहकता का भाव होता है, वही वास्तव में धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ता है। मनुष्य को दूसरों के दोष तलाशने के बजाय उनके भीतर मौजूद गुणों को पहचानने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति पूर्ण नहीं होता, लेकिन प्रत्येक व्यक्ति में कोई न कोई विशेष गुण अवश्य होता है।</p>
<h2><strong>रत्नत्रय की साधना का माध्यम है मानव शरीर</strong></h2>
<p>आचार्य श्री उदारसागर महाराज ने मानव शरीर की उपयोगिता समझाते हुए कमल का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि कमल कीचड़ में खिलता है और पंक में उत्पन्न होने के कारण ही पंकज कहलाता है। इसी प्रकार मानव शरीर नश्वर और अपवित्र होते हुए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी शरीर के माध्यम से <strong>सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान और सम्यक्चरित्र</strong> अर्थात रत्नत्रय की आराधना संभव है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि मानव जीवन केवल भोग-विलास के लिए नहीं मिला है। इसे आत्मकल्याण, साधना और आत्मशुद्धि का माध्यम बनाना चाहिए। जीवन की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब मनुष्य अपने भीतर के विकारों को दूर करते हुए आत्मा के स्वरूप को पहचानने का प्रयास करे।</p>
<p>आचार्य श्री ने कहा कि जो व्यक्ति रत्नत्रयधारी साधक से मात्सर्य करता है, वह वास्तव में रत्नत्रय से प्रेम नहीं करता। केवल बाहरी संयम, धार्मिक वेशभूषा अथवा दिखावा पर्याप्त नहीं है। जब तक मन के भीतर ईर्ष्या, द्वेष और कषाय मौजूद हैं, तब तक आत्मशुद्धि पूर्ण नहीं हो सकती।</p>
<h2><strong>दोष नहीं, गुण देखने की हो दृष्टि</strong></h2>
<p>आचार्य श्री ने बलभद्र के प्रसंग के माध्यम से गुणग्राही दृष्टि का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि बलभद्र ने कुत्ते के दांतों में भी गुण देख लिया था। इससे हमें प्रेरणा मिलती है कि हमारी दृष्टि दोषग्राही नहीं, बल्कि गुणग्राही होनी चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि संसार में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जिसमें केवल गुण ही हों, लेकिन ऐसा भी कोई नहीं है जिसमें कोई गुण न हो। आवश्यकता इस बात की है कि हम सामने वाले व्यक्ति के गुणों को देखने और उनसे सीखने की दृष्टि विकसित करें।</p>
<p>मिठाई और दोने का उदाहरण देते हुए आचार्य श्री ने कहा कि जब तक मिठाई रहती है, तब तक उसके साथ रखा दोना भी उपयोगी और महत्वपूर्ण लगता है, लेकिन मिठाई समाप्त होते ही वही दोना कचरे में फेंक दिया जाता है। इससे स्पष्ट होता है कि वास्तविक महत्व बाहरी आवरण का नहीं, बल्कि उसके भीतर मौजूद वस्तु और उसके गुण का होता है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-medium wp-image-351651 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-31-at-2.26.59-AM-300x169.jpeg" alt="WhatsApp Image 2026 08 31 at 2.26.59 AM" width="300" height="169" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-31-at-2.26.59-AM-300x169.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-31-at-2.26.59-AM-1024x576.jpeg 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-31-at-2.26.59-AM-768x432.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-31-at-2.26.59-AM-1536x864.jpeg 1536w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-31-at-2.26.59-AM.jpeg 1599w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<h2><strong>बाहरी वेशभूषा नहीं, गुण और चरित्र है पहचान</strong></h2>
<p>मिर्जागालिव कवि के प्रसंग का उल्लेख करते हुए आचार्य श्री ने बाहरी वेशभूषा और दिखावे के मोह पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मनुष्य की वास्तविक पहचान उसके कपड़ों, रूप, पद अथवा बाहरी वैभव से नहीं होती। व्यक्ति का वास्तविक मूल्य उसके गुण, चरित्र और आचरण से निर्धारित होता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि बाहरी आवरण के कारण मिलने वाला सम्मान स्थायी और वास्तविक सम्मान नहीं कहा जा सकता। सच्चा सम्मान व्यक्ति के सद्गुणों और उसके व्यवहार से प्राप्त होता है।</p>
<p>आचार्य श्री ने निर्विचिकित्सा का अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि यह केवल घृणा का त्याग करना नहीं है, बल्कि धर्म, धर्मात्मा और धर्म के साधनों के प्रति श्रद्धा एवं प्रेम रखना तथा दूसरों के गुणों की अनुमोदना करना भी है। जब मन से ईर्ष्या, घृणा और मात्सर्य समाप्त होते हैं तथा गुणग्राहकता का भाव विकसित होता है, तभी धर्म जीवन में प्रभावी रूप से उतरता है।</p>
<h2><strong>मोह कम होगा तो जीवन में आएगी शांति</strong></h2>
<p>धर्मसभा में मुनिश्री उपशांत सागर महाराज ने भगवान महावीर के संदेशों को जीवन से जोड़ते हुए कहा कि भगवान महावीर ने बाहरी विजय से अधिक आत्मविजय को महत्व दिया। उन्होंने कहा कि जिसने अपने क्रोध पर विजय प्राप्त कर ली, उसने बहुत बड़ा युद्ध जीत लिया। जिसने लोभ को नियंत्रित कर लिया, उसने बड़ी संपत्ति प्राप्त कर ली और जिसने मोह को कम कर लिया, उसके जीवन में शांति का प्रवेश होने लगा।</p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि आत्मचिंतन से जीवन में वैराग्य और विवेक का जन्म होता है। यदि मनुष्य यह समझ ले कि संसार का सुख केवल प्रतिबिंब है और वास्तविक सुख आत्मा में है, तो उसकी अनावश्यक दौड़ धीरे-धीरे समाप्त होने लगती है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि मनुष्य धन कमाए, लेकिन धन को अपना स्वामी न बनाए। परिवार में रहे, लेकिन अत्यधिक मोह में न डूबे। सम्मान मिले तो अहंकार न करे और अपमान मिले तो टूटे नहीं। आत्मचिंतन और संयम के माध्यम से जीवन को संतुलित बनाया जा सकता है।</p>
<h2><strong>धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित</strong></h2>
<p>धर्मसभा का कुशल संचालन विद्वत् श्री नवनीत जैन शास्त्री, मुरैना ने किया। उन्होंने प्रवचन के विभिन्न प्रसंगों को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत करते हुए श्रद्धालुओं को विषय से जोड़े रखा।</p>
<p>कार्यक्रम का मंगलाचरण नीलेश जैन, सागर ने किया। इसके पश्चात सम्मानीयजनों द्वारा चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन किया गया।</p>
<p>धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं समाजजन उपस्थित रहे। सभी ने आचार्य श्री उदारसागर महाराज और मुनिश्री उपशांत सागर महाराज के प्रेरणादायी विचारों का श्रवण किया।</p>
<p>धर्मसभा के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने जीवन में गुणग्राही दृष्टि अपनाने, दूसरों के गुणों की अनुमोदना करने तथा ईर्ष्या, घृणा और कषायों को कम करते हुए आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-medium wp-image-351650 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-31-at-2.27.00-AM-300x169.jpeg" alt="आचार्य उदारसागर" width="300" height="169" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-31-at-2.27.00-AM-300x169.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-31-at-2.27.00-AM-1024x576.jpeg 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-31-at-2.27.00-AM-768x432.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-31-at-2.27.00-AM-1536x864.jpeg 1536w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-31-at-2.27.00-AM.jpeg 1599w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Thandla : धर्मसभा में तपस्वियों की अनुमोदना, मानव जीवन को धर्म पुरुषार्थ से सार्थक करने का संदेश</title>
		<link>https://swarajvani.com/historic-nandchakra-tap-completed-in-thandla/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 Aug 2026 08:54:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[MADHAY PRADESH NEWS]]></category>
		<category><![CDATA[#Nandchakra]]></category>
		<category><![CDATA[#NandchakraTap]]></category>
		<category><![CDATA[JainCommunity]]></category>
		<category><![CDATA[Jainism]]></category>
		<category><![CDATA[JainReligion]]></category>
		<category><![CDATA[Tapasya]]></category>
		<category><![CDATA[Thandla]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://swarajvani.com/?p=349416</guid>

					<description><![CDATA[नन्दचक्र तपस्वियों के वर्षीतप समान हुए पारणें मयंक-नरेन्द्र श्री श्रीमाल परिवार ने लिया नवकारसी व स्वामीवात्सल्य का लाभ पहली बार हुए ऐतिहासिक नन्दचक्र की पूर्णता पर निकली भव्य जयकार यात्रा ... <a title="Thandla : धर्मसभा में तपस्वियों की अनुमोदना, मानव जीवन को धर्म पुरुषार्थ से सार्थक करने का संदेश" class="read-more" href="https://swarajvani.com/historic-nandchakra-tap-completed-in-thandla/" aria-label="Read more about Thandla : धर्मसभा में तपस्वियों की अनुमोदना, मानव जीवन को धर्म पुरुषार्थ से सार्थक करने का संदेश">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नन्दचक्र तपस्वियों के वर्षीतप समान हुए पारणें</p>
<h1><strong>मयंक-नरेन्द्र श्री श्रीमाल परिवार ने लिया नवकारसी व स्वामीवात्सल्य का लाभ</strong></h1>
<p>पहली बार हुए ऐतिहासिक नन्दचक्र की पूर्णता पर निकली भव्य जयकार यात्रा</p>
<p>Thandla । धर्मनगरी थांदला में चल रहे धर्मोत्कर्ष तत्त्वज्ञ चातुर्मास में तप-आराधना का अनुपम दृश्य देखने को मिल रहा है। जैनाचार्य पूज्य गुरुदेव श्री उमेशमुनिजी म.सा. ‘अणु’ की दिव्य कृपा एवं बुद्धपुत्र प्रवर्तक देव पूज्य श्री जिनेन्द्रमुनिजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती, संघहित चिंतक तत्वज्ञ पूज्य गुरुदेव श्री धर्मेन्द्रमुनिजी, रोचक वक्ता पूज्य श्री संदीपमुनिजी आदि ठाणा-8 एवं सरलमना महासती पूज्या श्री निखिलशीलाजी म.सा. आदि ठाणा-4 की पावन निश्रा में धर्म आराधना का ऐसा ठाठ लगा है कि थांदला सहित डूंगर-मालवा-निमाड़ का धार्मिक वातावरण तपमय हो उठा है।</p>
<p>इसी क्रम में एक साथ 12 मासक्षमण के साथ 36 तपस्वियों द्वारा पहली बार नन्दचक्र की भव्य आराधना की गई जिनमें 31 तपस्वी उपवास से कठिन साधना कर रहे है वही शेष निवि एकासन से तप में शामिल है। करीब 29 दिनों तक चले इस नन्दचक्र में 22 दिन तप और 9 दिन पारणें के रहे। तपस्वियों ने 1 उपवास पारणा, बेला, चौला और अट्ठाई की चढ़ती लड़ी के पश्चात उसी क्रम में उतरती तपस्या पूर्ण करते हुए नन्दचक्र की ऐतिहासिक आराधना संपन्न की।</p>
<h2><strong>नन्दचक्र की धूम, घर-घर गूंजे मंगल गीत</strong></h2>
<p>नन्दचक्र तप की इस अनूठी आराधना की चर्चा पूज्य श्री धर्मदास गण परिषद ही नहीं, बल्कि सकल जैन समाज में श्रद्धा और अनुमोदना का विषय बनी हुई है। तपस्वियों की अनुमोदना में विभिन्न स्थानों पर मंगल गीत गाए जा रहे हैं और उनके तप-पराक्रम की सुखसाता पूछी जा रही है। श्रीसंघ अध्यक्ष प्रदीप गादिया एवं प्रवक्ता पवन नाहर ने बताया कि नन्दचक्र की पूर्णता एवं ऐतिहासिक सफलता पर थांदला श्रीसंघ द्वारा तपस्वियों की अनुमोदना में भव्य जयकार यात्रा निकाली गई।</p>
<h2><strong>सादगी में निकली जयकार यात्रा, उमड़ा श्रद्धा का सैलाब</strong></h2>
<p>तपस्वियों के जयकारों के साथ सादगीपूर्वक पैदल निकली जयकार यात्रा में नन्दचक्र तपस्वियों के साथ वर्षीतप एवं श्रेणीतप के आराधक, थांदला श्रीसंघ के सदस्य तथा डूंगर-मालवा के विभिन्न संघों से बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं एवं तपस्वियों के रिश्तेदार शामिल हुए। यात्रा के दौरान वातावरण तप, त्याग और अनुमोदना के जयकारों से गूंज उठा। तपस्वियों के प्रति श्रद्धा और गुरुभक्ति का यह दृश्य धर्मनगरी के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-medium wp-image-349421 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-24-at-1.34.10-AM-300x200.jpeg" alt="WhatsApp Image 2026 08 24 at 1.34.10 AM" width="300" height="200" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-24-at-1.34.10-AM-300x200.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-24-at-1.34.10-AM-1024x682.jpeg 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-24-at-1.34.10-AM-768x512.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-24-at-1.34.10-AM.jpeg 1280w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<h2><strong>“समय का प्रमाद किए बिना धर्म पुरुषार्थ में मानव जीवन सार्थक करें”</strong></h2>
<p>जयकार यात्रा के पश्चात आयोजित धर्मसभा में तत्वज्ञ पूज्य श्री धर्मेन्द्रमुनिजी म.सा. ने सभी तपस्वियों के निर्मल तप की अनुमोदना करते हुए कहा कि द्रव्य, क्षेत्र, काल और भाव की अनुकूलता होने पर ही तप आराधना संभव होती है, इसलिए समय का प्रमाद किए बिना मानव जीवन को धर्म पुरुषार्थ से सार्थक करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नन्दचक्र में 76 वर्षीय श्रावक से लेकर 19 वर्षीय युवा तक तप आराधना कर रहे हैं, वहीं दो तपस्वी सजोड़ों द्वारा भी नन्दचक्र की साधना की गई है। यह सब गुरुदेव के आशीर्वाद तथा तपस्वियों की अटूट श्रद्धा और समर्पण का परिचायक है। उन्होंने मासक्षमण की ओर अग्रसर तपस्वियों की भी अनुमोदना करते हुए उनके उज्ज्वल आध्यात्मिक भविष्य की मंगलकामना की।</p>
<h2><strong>श्रीसंघ और वीर परिवार ने किया तपस्वियों का बहुमान</strong></h2>
<p>श्रीसंघ सचिव हितेश शाहजी ने धर्मसभा का संचालन करते हुए श्रीसंघ के बहुमान के लिए तप का बहुमान तप से चली आ रही परंपरा का निर्वहन करते हुए नन्दचक्र के सभी तपस्वियों को एक दूसरे के द्वारा बहुमान करवाया इस दौरान वीर परिवार के सदस्यों ने भी तपस्वियों का बहुमान कर तप की अनुमोदना की। इस अवसर पर सजोड़ नन्दचक्र आराधक मयंक-नरेन्द्रकुमार श्रीश्रीमाल परिवार ने तपस्वियों की अनुमोदना में नवकारसी एवं स्वामीवात्सल्य का लाभ लिया। वहीं श्रेणीतप आराधक मंगलेश श्रीश्रीमाल ने प्रवचन प्रभावना का लाभ लिया।</p>
<p>धर्मलता महिला मंडल अध्यक्ष किरण नरेंद्रकुमार श्रीश्रीमाल ने सभी तपस्वियों की सुखसाता पूछते हुए तप अनुमोदना में पधारे सभी गुरुभक्तों के प्रति आभार व्यक्त किया। सकल आयोजन में श्रीसंघ व महिला मंडल के पदाधिकारियों सहित श्री ललित जैन नवयुवक मण्डल की सक्रिय योगदान रहा। नन्दचक्र की इस ऐतिहासिक आराधना ने थांदला की धर्मधरा पर तप, त्याग, संयम और गुरुभक्ति की ऐसी अमिट छाप छोड़ी, जिसकी गूंज लंबे समय तक जैन समाज में सुनाई देती रहेगी।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="size-medium wp-image-349420 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-24-at-1.34.10-AM-1-300x162.jpeg" alt="WhatsApp Image 2026 08 24 at 1.34.10 AM 1" width="300" height="162" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-24-at-1.34.10-AM-1-300x162.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-24-at-1.34.10-AM-1-1024x554.jpeg 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-24-at-1.34.10-AM-1-768x416.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/08/WhatsApp-Image-2026-08-24-at-1.34.10-AM-1.jpeg 1218w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Nagda : न समय रिजर्व होता है, न रिवर्स, बीता हुआ पल कभी लौटकर नहीं आता: साध्वीश्री अर्हमव्रताश्रीजी</title>
		<link>https://swarajvani.com/participate-in-nine-day-navkar-aradhana-in-nagda/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Aug 2026 06:38:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[nagda]]></category>
		<category><![CDATA[#NavkarAradhana]]></category>
		<category><![CDATA[#SadhviShri]]></category>
		<category><![CDATA[JainDharma]]></category>
		<category><![CDATA[JainReligion]]></category>
		<category><![CDATA[JainSamaj]]></category>
		<category><![CDATA[Nagda]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://swarajvani.com/?p=348908</guid>

					<description><![CDATA[न समय रिजर्व होता है, न रिवर्स, बीता हुआ पल कभी लौटकर नहीं आता: साध्वीश्री नव दिवसीय नवकार आराधना की 23 अगस्त को पारणे के साथ होगी पूर्णाहुति, 100 से ... <a title="Nagda : न समय रिजर्व होता है, न रिवर्स, बीता हुआ पल कभी लौटकर नहीं आता: साध्वीश्री अर्हमव्रताश्रीजी" class="read-more" href="https://swarajvani.com/participate-in-nine-day-navkar-aradhana-in-nagda/" aria-label="Read more about Nagda : न समय रिजर्व होता है, न रिवर्स, बीता हुआ पल कभी लौटकर नहीं आता: साध्वीश्री अर्हमव्रताश्रीजी">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>न समय रिजर्व होता है, न रिवर्स, बीता हुआ पल कभी लौटकर नहीं आता: साध्वीश्री</strong></h1>
<p><strong>नव दिवसीय नवकार आराधना की 23 अगस्त को पारणे के साथ होगी पूर्णाहुति, 100 से अधिक आराधक कर रहे धार्मिक आराधना</strong></p>
<p><strong>Nagda ।</strong> मानव जीवन में समय सबसे अनमोल संपत्ति है। धन-संपदा के आधार पर मनुष्य दुनिया की अनेक वस्तुओं को खरीदा सकता है, लेकिन बीते हुए समय का एक मिनट भी दुनिया की कोई ताकत वापस नहीं ला सकती। मनुष्य ने अपनी सुविधा के लिए अनेक प्रकार के आविष्कार किए हैं, लेकिन समय को न तो रिजर्व करने का कोई सिस्टम है और न ही उसे रिवर्स करने का। इसलिए जीवन में मिले प्रत्येक क्षण का सदुपयोग करना आवश्यक है।</p>
<p>यह बात शुक्रवार सुबह 9.30 बजे धर्मसभा को संबोधित करते हुए चातुर्मास के लिए पाठशाला भवन में विराजित साध्वीश्री अर्हमव्रताश्रीजी मसा ने कही। उन्होंने श्रद्धालुओं को समय के महत्व को समझाते हुए कहा कि जो समय एक बार गुजर गया, वह दोबारा वापस नहीं आता। मनुष्य के जीवन में कई बार ऐसा होता है कि किसी कार्य को समय रहते पूरा करने के बजाय वह उसे कल पर टाल देता है। लेकिन बीता हुआ समय वापस नहीं आने के कारण टाला गया कार्य कई बार अधूरा ही रह जाता है।</p>
<p>साध्वीश्री ने कहा कि जिस व्यक्ति ने अपने जीवन में समय का सदुपयोग किया, उसका जीवन धन्य हो गया। इसके विपरीत जिसने समय रहते अपने आवश्यक कार्यों को पूरा नहीं किया और उन्हें भविष्य के लिए टालता रहा, वह बाद में पछताने के अलावा कुछ नहीं कर सकता। इसलिए मनुष्य को वर्तमान क्षण को पहचानकर उसका सदुपयोग करना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि समय किसी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं करता। प्रत्येक व्यक्ति को दिन में समान समय मिलता है, लेकिन उसका उपयोग किस प्रकार किया जाता है, यही जीवन की दिशा तय करता है। जो व्यक्ति अपने समय का नियोजन करता है और आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता देता है, वह जीवन में आगे बढ़ सकता है। वहीं समय को व्यर्थ गंवाने वाला व्यक्ति अवसर निकल जाने के बाद उसकी कीमत समझता है।</p>
<p>धर्मसभा में साध्वीश्री ने धार्मिक जीवन में भी समय के सदुपयोग का महत्व बताया। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि सांसारिक कार्यों के साथ धर्म और आत्मकल्याण के लिए भी समय निकालना चाहिए। जीवन की व्यस्तता के बीच धार्मिक आराधना, आत्मचिंतन और साधना के लिए निकाला गया समय व्यक्ति के जीवन को सार्थक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।</p>
<h2><strong>23 अगस्त को नवकार आराधना की पूर्णाहुति</strong></h2>
<p>श्री श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन श्रीसंघ नागदा के मीडिया प्रभारी डॉ. विपिन वागरेचा ने बताया कि साध्वीश्री अर्हमव्रताश्रीजी मसा की निश्रा में 14 अगस्त से शुरू हुई नव दिवसीय नवकार आराधना का समापन 23 अगस्त रविवार को पारणे के साथ होगा।</p>
<p>नव दिवसीय आराधना के दौरान 100 से अधिक आराधक प्रतिदिन नवकार मंत्र की माला का जाप कर रहे हैं। इसके साथ ही देववंदन, प्रतिक्रमण सहित विभिन्न धार्मिक क्रियाएं भी नियमित रूप से की जा रही हैं। आराधना को लेकर समाजजनों में उत्साह का वातावरण बना हुआ है और बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं धार्मिक गतिविधियों में सहभागिता कर रहे हैं।</p>
<p>नवकार मंत्र की आराधना को जैन धर्म में विशेष महत्व प्राप्त है। नौ दिवसीय आयोजन के दौरान आराधकों ने नियमित रूप से धार्मिक साधना और संयम के साथ आराधना में सहभागिता की। इस दौरान समाज के विभिन्न परिवारों ने एकासना सहित अन्य धार्मिक लाभ भी लिए।</p>
<h2><strong>इन परिवारों ने लिया एकासना का लाभ</strong></h2>
<p>मीडिया प्रभारी डॉ. विपिन वागरेचा ने बताया कि नव दिवसीय एकासना का लाभ आजादबेन कांतिलाल नागदा, शरद स्टोर्स, कंचनदेवी मिश्रीमल हिंगड़, प्रकाशचन्द्र हस्तीमल कोठारी, वीरेन्द्रकुमार सुशील सकलेचा, भंवरलाल अमिषकुमार गांग, जवाहरलाल माणकलाल व्होरा, चमेलीदेवी स्वरूपचन्द्र नवलखा तथा मधुदेवी सुभाषचन्द्र नागदा परिवार ने लिया।</p>
<p>आराधना के दौरान समाज के श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुशासन के साथ सहभागिता की। नवकार मंत्र जाप, देववंदन और प्रतिक्रमण जैसी धार्मिक क्रियाओं के माध्यम से आराधकों ने आध्यात्मिक साधना का लाभ लिया।</p>
<h2><strong>पारणे के साथ होगा आयोजन का समापन</strong></h2>
<p>नव दिवसीय नवकार आराधना की पूर्णाहुति रविवार 23 अगस्त को पारणे के साथ होगी। पारणे का लाभ सोहनबाई जवाहरलाल तांतेड़ परिवार द्वारा लिया जाएगा। इसके साथ ही नौ दिनों से चल रही धार्मिक आराधना का विधिवत समापन होगा।</p>
<p>आराधना के समापन अवसर पर समाजजनों के बड़ी संख्या में उपस्थित रहने की संभावना है। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने साध्वीश्री की निश्रा में धार्मिक गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया।</p>
<h2><strong>समय का सदुपयोग ही जीवन की सार्थकता</strong></h2>
<p>साध्वीश्री के प्रवचन का मूल संदेश यही रहा कि समय मनुष्य के जीवन की ऐसी संपत्ति है, जिसे न तो जमा किया जा सकता है और न ही बीत जाने के बाद वापस पाया जा सकता है। धन खोने के बाद उसे दोबारा कमाया जा सकता है, कई वस्तुएं टूटने के बाद फिर खरीदी जा सकती हैं, लेकिन बीता हुआ समय किसी भी कीमत पर वापस नहीं आता।</p>
<p>इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने वर्तमान समय की कीमत समझनी चाहिए। जरूरी कार्यों को टालने के बजाय उन्हें समय पर पूरा करना चाहिए और जीवन में धर्म, सेवा, आत्मचिंतन तथा सद्कार्यों के लिए भी समय निकालना चाहिए। समय का सही उपयोग व्यक्ति के जीवन को अनुशासित, सार्थक और सफल बना सकता है।</p>
<p>नव दिवसीय नवकार आराधना जैसे धार्मिक आयोजनों के माध्यम से भी श्रद्धालुओं को अपने व्यस्त जीवन से समय निकालकर आध्यात्मिक साधना से जुड़ने का अवसर मिलता है। ऐसे आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि व्यक्ति को आत्मचिंतन और संयम की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देते हैं।</p>
<p>नागदा से <strong>जीवनलाल जैन की रिपोर्ट</strong>।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>कुर्सी नहीं, व्यक्तित्व बनाता है इंसान को नंबर वन, मुनि सुधासागर जी ने धर्मसभा में दिया प्रेरणादायक संदेश</title>
		<link>https://swarajvani.com/dont-chase-the-top-spot-build-a-personality-that/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 19 Aug 2026 13:01:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[indore]]></category>
		<category><![CDATA[#LordParshvanath]]></category>
		<category><![CDATA[#MuniSudhasagarJi]]></category>
		<category><![CDATA[JainCommunity]]></category>
		<category><![CDATA[Jainism]]></category>
		<category><![CDATA[JainReligion]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://swarajvani.com/?p=347830</guid>

					<description><![CDATA[*👏 जय जिनेन्द्र जी 🙏 नमोस्तु गुरुवर* 1.&#8221;कुर्सी से नहीं, व्यक्तित्व से बनता है नंबर एक&#8221; : मुनि सुधासागर जी“ राजेश जैन दद्दू इंदौर दलाल बाग स्थित देशना मंडप में ... <a title="कुर्सी नहीं, व्यक्तित्व बनाता है इंसान को नंबर वन, मुनि सुधासागर जी ने धर्मसभा में दिया प्रेरणादायक संदेश" class="read-more" href="https://swarajvani.com/dont-chase-the-top-spot-build-a-personality-that/" aria-label="Read more about कुर्सी नहीं, व्यक्तित्व बनाता है इंसान को नंबर वन, मुनि सुधासागर जी ने धर्मसभा में दिया प्रेरणादायक संदेश">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>*👏 जय जिनेन्द्र जी 🙏 नमोस्तु गुरुवर*</strong></p>
<p>1.&#8221;कुर्सी से नहीं, व्यक्तित्व से बनता है नंबर एक&#8221; : मुनि सुधासागर जी“<br />
<strong>राजेश जैन दद्दू </strong><br />
<strong>इंदौर</strong><br />
दलाल बाग स्थित देशना मंडप में श्रंमण संस्कृति के महाश्रमण सुधासागर जी ने धर्म सभा में कहा &#8211; भगवान पार्श्वनाथ का व्यक्तित्व प्रेरणा है। नंबर मत खोजो, अपना चरित्र और क्षमता खोजो</p>
<p>*इंदौर।* चातुर्मास में विराजित श्रमण निर्यापक मुनि पुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज ने आज की धर्मसभा में अपनी मंगल देशना में कहा*&#8221;व्यक्तित्व की महानता&#8221;पर अत्यंत प्रेरणादायक देशना दी। गुरुदेव ने कहा कि कुर्सी से नहीं, व्यक्तित्व से बनता है नंबर एक। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि कल्याण का मार्ग और उपलब्धि का सुख</p>
<p>मुनि श्री ने कहा कल्याण करना बहुत सरल है।&#8221; मोक्षमार्ग पर चलने वाला जीव जब अपनी उपलब्धि को सामने देखता है तो बड़े से बड़े कष्ट भी उसे छोटे लगने लगते हैं। जब हमें किसी चीज की उपलब्धि का सुख दिखाई देता है, तो उस उपलब्धि के सामने कष्टों की परवाह नहीं रहती।&#8221;<br />
पार्श्वनाथ का व्यक्तित्व बनी प्रेरणा</p>
<p>गुरुदेव ने भगवान पार्श्वनाथ का उदाहरण देते हुए कहा अनंत-अनंत जीवों ने कल्याण किया, पर सभी के कल्याणक नहीं मनाए गए। असंख्यात जीवों में से केवल 24 तीर्थंकरों के कल्याणक मनाए गए। और उन 24 में भी भगवान पार्श्वनाथ का व्यक्तित्व ऐसा बना कि आज वे भक्तों के हृदय में एक विशेष स्थान रखते हैं।&#8221;<br />
यही सबसे बड़ी प्रेरणा है &#8211; अपना नंबर मत देखो, अपना व्यक्तित्व बनाओ।&#8221;<br />
महानता का मापदंड<br />
मुनि श्री ने कहा महान आत्माएँ किसी एक नंबर की कुर्सी की मोहताज नहीं होतीं। वे जिस स्थान पर बैठ जाती हैं, वही स्थान महत्वपूर्ण और प्रथम बन जाता है।</p>
<p>हमें बार-बार यह जानने की चिंता रहती है कि हमारा नंबर क्या है? हमें कौन-सी कुर्सी मिली? यही हमारी सबसे बड़ी कमजोरी है।&#8221;</p>
<p>गुरुदेव ने सूत्र दिया -&#8220;आप ऐसा व्यक्तित्व बनाइए कि आप 24वें नंबर पर भी बैठें, तो लोगों की नजरें आपकी ओर हों। सारे कैमरे आपकी तरफ मुड़ जाएँ।&#8221;<br />
क्योंकि एक नंबर की कुर्सी पर बैठने से व्यक्ति नंबर एक नहीं बनता; व्यक्ति का व्यक्तित्व उस कुर्सी को नंबर एक बना देता है।&#8221;</p>
<p>पद नहीं, चरित्र महत्वपूर्ण<br />
आचार्य श्री ने कहा पद आपको बड़ा नहीं बनाता, आपका व्यक्तित्व पद को बड़ा बनाता है।&#8221;<br />
महान आत्माओं को सिंहासन की आवश्यकता नहीं होती। वे जहाँ बैठ जाते हैं, वही स्थान सिंहासन बन जाता है।&#8221;<br />
आसन से कोई सिंह नहीं होता, सिंह से आसन सिंहासन बनता है।&#8221;<br />
भक्तों के भगवान बनना सबसे बड़ी उपलब्धि</p>
<p>मुनि श्री ने कहा साक्षात भगवान बनना तपस्या का परिणाम है, लेकिन भक्तों के भगवान बनना उससे भी कठिन है। सभी तीर्थंकर साधना से भगवान बने, पर भगवान पार्श्वनाथ का व्यक्तित्व ऐसा बना कि वे करोड़ों भक्तों के आराध्य बन गए।<br />
अंत में गुरुदेव ने कहा अपने लिए महान बनना आसान है, लेकिन दूसरों के हृदय में महान बनना कठिन है।&#8221;<br />
इसलिए &#8220;नंबर मत खोजिए, अपना व्यक्तित्व खोजिए। कुर्सी मत खोजिए, अपनी क्षमता खोजिए। सम्मान मत माँगिए, ऐसा चरित्र बनाइए कि सम्मान स्वयं आपके पीछे आए।&#8221;</p>
<p>और ऐसा जीवन बनाइए कि &#8211; आप जहाँ बैठें, वही स्थान नंबर एक बन जाए।&#8221; धर्म सभा में आकाश आलोक कोल, डॉ जैनेन्द्र जैन, आनंद नवीन गोधा सपना मनीष गोधा अखिलेश सोधीया विरेन्द्र जैन श्रुत जैन आदि समाज श्रेष्ठी उपस्थित रहे।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
