मुनियों और आर्यिका माताजी की सुरक्षा के लिए पुलिस व्यवस्था का सदैव उपयोग करें : मुनि सुधासागर
अनहोनी के बाद जागरूक होने से बेहतर है पहले से सतर्क रहना
मुरैना/इंदौर (मनोज जैन नायक। निर्यापक श्रमण मुनि पुगंवश्री सुधासागरजी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मुनियों एवं आर्यिका माताजी के नगर प्रवेश और धार्मिक आयोजनों के दौरान पुलिस सुरक्षा का सदैव उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा दिगंबर श्रमणों एवं आर्यिका माताजी को सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती रही है। ऐसे में समाज को सरकारी सुरक्षा व्यवस्था का लाभ लेकर धार्मिक आयोजनों और विहार के दौरान पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
मुनिश्री ने कहा कि समाज को किसी अनहोनी के बाद यह सोचने की आवश्यकता नहीं पड़नी चाहिए कि यदि पुलिस सुरक्षा होती तो हादसा टल सकता था। धार्मिक जुलूसों एवं श्रमणों के विहार के दौरान पुलिस सुरक्षा लेना और उसका रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखना आवश्यक है। सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत व्यवस्था होने से दुर्घटनाओं की आशंका कम होती है और कानून-व्यवस्था भी मजबूत रहती है। उन्होंने सभी धार्मिक जुलूसों में पुलिस सुरक्षा लेने का आह्वान किया।
जीवन को रिंग रोड की तरह न बनाएं
मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि “जीवन को रिंग रोड की तरह मत बनाओ। रास्ते बहुत हैं, लेकिन मंजिलें कम हैं।” उन्होंने कहा कि कुछ रास्ते ऐसे होते हैं जो घूम-फिरकर व्यक्ति को फिर उसी स्थान पर पहुंचा देते हैं। संसार में रहने वाला जीव जब परेशान होता है तो मंदिर जाता है, जाप करता है और कुछ समय साधुओं की संगति भी करता है। इस प्रकार संसारी जीव पाप से भयभीत होकर बीच-बीच में धर्म करता रहता है, लेकिन उसे अपने जीवन की दिशा और अंतिम मंजिल पर निरंतर विचार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति कषायों के दुष्परिणामों को देखकर कुछ समय के लिए धर्म की ओर बढ़ता है, लेकिन आवश्यकता इस बात की है कि धर्म को जीवन का स्थायी आधार बनाया जाए। धर्म केवल परेशानी के समय सहारा लेने का माध्यम न हो, बल्कि जीवन की दिशा निर्धारित करने वाली शक्ति बने।
जैन समाज और सरकार का संबंध आदर्शपूर्ण
मुनिश्री ने टैक्स का उदाहरण देते हुए कहा कि जैन समाज और सरकार का संबंध हमेशा से आदर्शपूर्ण रहा है। जैन समाज कर के रूप में महत्वपूर्ण योगदान देता है, लेकिन सरकारी सेवाओं का अपेक्षाकृत कम उपयोग करता है। उन्होंने समाज से जागरूक रहने और शासन-प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाओं का उपयोग करने की अपील की।

वस्तु के उपभोग की शुरुआत धर्म और दान से करें
मुनिश्री ने कहा कि “वस्तु के उपभोग की शुरुआत धर्म और दान से करें।” उन्होंने सुबह-शाम मंदिर में शुभ शुरुआत करने की परंपरा विकसित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि सुबह का पहला दान मंदिर में देकर व्यापार का शुभारंभ करने की भावना रखनी चाहिए। घर के बच्चों से लेकर स्त्री-पुरुष तक सभी के संस्कार दान की भावना से प्रारंभ हों।
उन्होंने महिलाओं से भी अपील की कि खरीदारी करते समय अपनी क्षमता के अनुसार कुछ अंश दान के लिए अलग रखें। दान की भावना जीवन में शुभ संस्कारों को जन्म देती है। धर्म, दान और संस्कारों के माध्यम से जीवन में शुभता आती है तथा व्यक्ति के भीतर त्याग और सेवा की भावना विकसित होती है।
इस अवसर पर बाल ब्रह्मचारी महावीर भैया, अध्यक्ष अशोक जी डोशी, दान शिरोमणि आशा रानी पांड्या, सामाजिक संसद अध्यक्ष आनंद जी गोधा, महोत्सव महामंत्री हर्ष जी जैन सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभा का कुशल संचालन अनुराग जैन ने किया, जबकि मंगलाचरण संगीता सेठी ने प्रस्तुत किया।
प्रेषक : विद्वत इन्द्र कुमार जैन, मुरैना
