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Nagda : न समय रिजर्व होता है, न रिवर्स, बीता हुआ पल कभी लौटकर नहीं आता: साध्वीश्री अर्हमव्रताश्रीजी

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Published On: 22 August 2026
Nagda

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न समय रिजर्व होता है, न रिवर्स, बीता हुआ पल कभी लौटकर नहीं आता: साध्वीश्री

नव दिवसीय नवकार आराधना की 23 अगस्त को पारणे के साथ होगी पूर्णाहुति, 100 से अधिक आराधक कर रहे धार्मिक आराधना

Nagda । मानव जीवन में समय सबसे अनमोल संपत्ति है। धन-संपदा के आधार पर मनुष्य दुनिया की अनेक वस्तुओं को खरीदा सकता है, लेकिन बीते हुए समय का एक मिनट भी दुनिया की कोई ताकत वापस नहीं ला सकती। मनुष्य ने अपनी सुविधा के लिए अनेक प्रकार के आविष्कार किए हैं, लेकिन समय को न तो रिजर्व करने का कोई सिस्टम है और न ही उसे रिवर्स करने का। इसलिए जीवन में मिले प्रत्येक क्षण का सदुपयोग करना आवश्यक है।

यह बात शुक्रवार सुबह 9.30 बजे धर्मसभा को संबोधित करते हुए चातुर्मास के लिए पाठशाला भवन में विराजित साध्वीश्री अर्हमव्रताश्रीजी मसा ने कही। उन्होंने श्रद्धालुओं को समय के महत्व को समझाते हुए कहा कि जो समय एक बार गुजर गया, वह दोबारा वापस नहीं आता। मनुष्य के जीवन में कई बार ऐसा होता है कि किसी कार्य को समय रहते पूरा करने के बजाय वह उसे कल पर टाल देता है। लेकिन बीता हुआ समय वापस नहीं आने के कारण टाला गया कार्य कई बार अधूरा ही रह जाता है।

साध्वीश्री ने कहा कि जिस व्यक्ति ने अपने जीवन में समय का सदुपयोग किया, उसका जीवन धन्य हो गया। इसके विपरीत जिसने समय रहते अपने आवश्यक कार्यों को पूरा नहीं किया और उन्हें भविष्य के लिए टालता रहा, वह बाद में पछताने के अलावा कुछ नहीं कर सकता। इसलिए मनुष्य को वर्तमान क्षण को पहचानकर उसका सदुपयोग करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि समय किसी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं करता। प्रत्येक व्यक्ति को दिन में समान समय मिलता है, लेकिन उसका उपयोग किस प्रकार किया जाता है, यही जीवन की दिशा तय करता है। जो व्यक्ति अपने समय का नियोजन करता है और आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता देता है, वह जीवन में आगे बढ़ सकता है। वहीं समय को व्यर्थ गंवाने वाला व्यक्ति अवसर निकल जाने के बाद उसकी कीमत समझता है।

धर्मसभा में साध्वीश्री ने धार्मिक जीवन में भी समय के सदुपयोग का महत्व बताया। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि सांसारिक कार्यों के साथ धर्म और आत्मकल्याण के लिए भी समय निकालना चाहिए। जीवन की व्यस्तता के बीच धार्मिक आराधना, आत्मचिंतन और साधना के लिए निकाला गया समय व्यक्ति के जीवन को सार्थक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

23 अगस्त को नवकार आराधना की पूर्णाहुति

श्री श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन श्रीसंघ नागदा के मीडिया प्रभारी डॉ. विपिन वागरेचा ने बताया कि साध्वीश्री अर्हमव्रताश्रीजी मसा की निश्रा में 14 अगस्त से शुरू हुई नव दिवसीय नवकार आराधना का समापन 23 अगस्त रविवार को पारणे के साथ होगा।

नव दिवसीय आराधना के दौरान 100 से अधिक आराधक प्रतिदिन नवकार मंत्र की माला का जाप कर रहे हैं। इसके साथ ही देववंदन, प्रतिक्रमण सहित विभिन्न धार्मिक क्रियाएं भी नियमित रूप से की जा रही हैं। आराधना को लेकर समाजजनों में उत्साह का वातावरण बना हुआ है और बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं धार्मिक गतिविधियों में सहभागिता कर रहे हैं।

नवकार मंत्र की आराधना को जैन धर्म में विशेष महत्व प्राप्त है। नौ दिवसीय आयोजन के दौरान आराधकों ने नियमित रूप से धार्मिक साधना और संयम के साथ आराधना में सहभागिता की। इस दौरान समाज के विभिन्न परिवारों ने एकासना सहित अन्य धार्मिक लाभ भी लिए।

इन परिवारों ने लिया एकासना का लाभ

मीडिया प्रभारी डॉ. विपिन वागरेचा ने बताया कि नव दिवसीय एकासना का लाभ आजादबेन कांतिलाल नागदा, शरद स्टोर्स, कंचनदेवी मिश्रीमल हिंगड़, प्रकाशचन्द्र हस्तीमल कोठारी, वीरेन्द्रकुमार सुशील सकलेचा, भंवरलाल अमिषकुमार गांग, जवाहरलाल माणकलाल व्होरा, चमेलीदेवी स्वरूपचन्द्र नवलखा तथा मधुदेवी सुभाषचन्द्र नागदा परिवार ने लिया।

आराधना के दौरान समाज के श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुशासन के साथ सहभागिता की। नवकार मंत्र जाप, देववंदन और प्रतिक्रमण जैसी धार्मिक क्रियाओं के माध्यम से आराधकों ने आध्यात्मिक साधना का लाभ लिया।

पारणे के साथ होगा आयोजन का समापन

नव दिवसीय नवकार आराधना की पूर्णाहुति रविवार 23 अगस्त को पारणे के साथ होगी। पारणे का लाभ सोहनबाई जवाहरलाल तांतेड़ परिवार द्वारा लिया जाएगा। इसके साथ ही नौ दिनों से चल रही धार्मिक आराधना का विधिवत समापन होगा।

आराधना के समापन अवसर पर समाजजनों के बड़ी संख्या में उपस्थित रहने की संभावना है। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने साध्वीश्री की निश्रा में धार्मिक गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया।

समय का सदुपयोग ही जीवन की सार्थकता

साध्वीश्री के प्रवचन का मूल संदेश यही रहा कि समय मनुष्य के जीवन की ऐसी संपत्ति है, जिसे न तो जमा किया जा सकता है और न ही बीत जाने के बाद वापस पाया जा सकता है। धन खोने के बाद उसे दोबारा कमाया जा सकता है, कई वस्तुएं टूटने के बाद फिर खरीदी जा सकती हैं, लेकिन बीता हुआ समय किसी भी कीमत पर वापस नहीं आता।

इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने वर्तमान समय की कीमत समझनी चाहिए। जरूरी कार्यों को टालने के बजाय उन्हें समय पर पूरा करना चाहिए और जीवन में धर्म, सेवा, आत्मचिंतन तथा सद्कार्यों के लिए भी समय निकालना चाहिए। समय का सही उपयोग व्यक्ति के जीवन को अनुशासित, सार्थक और सफल बना सकता है।

नव दिवसीय नवकार आराधना जैसे धार्मिक आयोजनों के माध्यम से भी श्रद्धालुओं को अपने व्यस्त जीवन से समय निकालकर आध्यात्मिक साधना से जुड़ने का अवसर मिलता है। ऐसे आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि व्यक्ति को आत्मचिंतन और संयम की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देते हैं।

नागदा से जीवनलाल जैन की रिपोर्ट।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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