नन्दचक्र तपस्वियों के वर्षीतप समान हुए पारणें
मयंक-नरेन्द्र श्री श्रीमाल परिवार ने लिया नवकारसी व स्वामीवात्सल्य का लाभ
पहली बार हुए ऐतिहासिक नन्दचक्र की पूर्णता पर निकली भव्य जयकार यात्रा
Thandla । धर्मनगरी थांदला में चल रहे धर्मोत्कर्ष तत्त्वज्ञ चातुर्मास में तप-आराधना का अनुपम दृश्य देखने को मिल रहा है। जैनाचार्य पूज्य गुरुदेव श्री उमेशमुनिजी म.सा. ‘अणु’ की दिव्य कृपा एवं बुद्धपुत्र प्रवर्तक देव पूज्य श्री जिनेन्द्रमुनिजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती, संघहित चिंतक तत्वज्ञ पूज्य गुरुदेव श्री धर्मेन्द्रमुनिजी, रोचक वक्ता पूज्य श्री संदीपमुनिजी आदि ठाणा-8 एवं सरलमना महासती पूज्या श्री निखिलशीलाजी म.सा. आदि ठाणा-4 की पावन निश्रा में धर्म आराधना का ऐसा ठाठ लगा है कि थांदला सहित डूंगर-मालवा-निमाड़ का धार्मिक वातावरण तपमय हो उठा है।
इसी क्रम में एक साथ 12 मासक्षमण के साथ 36 तपस्वियों द्वारा पहली बार नन्दचक्र की भव्य आराधना की गई जिनमें 31 तपस्वी उपवास से कठिन साधना कर रहे है वही शेष निवि एकासन से तप में शामिल है। करीब 29 दिनों तक चले इस नन्दचक्र में 22 दिन तप और 9 दिन पारणें के रहे। तपस्वियों ने 1 उपवास पारणा, बेला, चौला और अट्ठाई की चढ़ती लड़ी के पश्चात उसी क्रम में उतरती तपस्या पूर्ण करते हुए नन्दचक्र की ऐतिहासिक आराधना संपन्न की।
नन्दचक्र की धूम, घर-घर गूंजे मंगल गीत
नन्दचक्र तप की इस अनूठी आराधना की चर्चा पूज्य श्री धर्मदास गण परिषद ही नहीं, बल्कि सकल जैन समाज में श्रद्धा और अनुमोदना का विषय बनी हुई है। तपस्वियों की अनुमोदना में विभिन्न स्थानों पर मंगल गीत गाए जा रहे हैं और उनके तप-पराक्रम की सुखसाता पूछी जा रही है। श्रीसंघ अध्यक्ष प्रदीप गादिया एवं प्रवक्ता पवन नाहर ने बताया कि नन्दचक्र की पूर्णता एवं ऐतिहासिक सफलता पर थांदला श्रीसंघ द्वारा तपस्वियों की अनुमोदना में भव्य जयकार यात्रा निकाली गई।
सादगी में निकली जयकार यात्रा, उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
तपस्वियों के जयकारों के साथ सादगीपूर्वक पैदल निकली जयकार यात्रा में नन्दचक्र तपस्वियों के साथ वर्षीतप एवं श्रेणीतप के आराधक, थांदला श्रीसंघ के सदस्य तथा डूंगर-मालवा के विभिन्न संघों से बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं एवं तपस्वियों के रिश्तेदार शामिल हुए। यात्रा के दौरान वातावरण तप, त्याग और अनुमोदना के जयकारों से गूंज उठा। तपस्वियों के प्रति श्रद्धा और गुरुभक्ति का यह दृश्य धर्मनगरी के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

“समय का प्रमाद किए बिना धर्म पुरुषार्थ में मानव जीवन सार्थक करें”
जयकार यात्रा के पश्चात आयोजित धर्मसभा में तत्वज्ञ पूज्य श्री धर्मेन्द्रमुनिजी म.सा. ने सभी तपस्वियों के निर्मल तप की अनुमोदना करते हुए कहा कि द्रव्य, क्षेत्र, काल और भाव की अनुकूलता होने पर ही तप आराधना संभव होती है, इसलिए समय का प्रमाद किए बिना मानव जीवन को धर्म पुरुषार्थ से सार्थक करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नन्दचक्र में 76 वर्षीय श्रावक से लेकर 19 वर्षीय युवा तक तप आराधना कर रहे हैं, वहीं दो तपस्वी सजोड़ों द्वारा भी नन्दचक्र की साधना की गई है। यह सब गुरुदेव के आशीर्वाद तथा तपस्वियों की अटूट श्रद्धा और समर्पण का परिचायक है। उन्होंने मासक्षमण की ओर अग्रसर तपस्वियों की भी अनुमोदना करते हुए उनके उज्ज्वल आध्यात्मिक भविष्य की मंगलकामना की।
श्रीसंघ और वीर परिवार ने किया तपस्वियों का बहुमान
श्रीसंघ सचिव हितेश शाहजी ने धर्मसभा का संचालन करते हुए श्रीसंघ के बहुमान के लिए तप का बहुमान तप से चली आ रही परंपरा का निर्वहन करते हुए नन्दचक्र के सभी तपस्वियों को एक दूसरे के द्वारा बहुमान करवाया इस दौरान वीर परिवार के सदस्यों ने भी तपस्वियों का बहुमान कर तप की अनुमोदना की। इस अवसर पर सजोड़ नन्दचक्र आराधक मयंक-नरेन्द्रकुमार श्रीश्रीमाल परिवार ने तपस्वियों की अनुमोदना में नवकारसी एवं स्वामीवात्सल्य का लाभ लिया। वहीं श्रेणीतप आराधक मंगलेश श्रीश्रीमाल ने प्रवचन प्रभावना का लाभ लिया।
धर्मलता महिला मंडल अध्यक्ष किरण नरेंद्रकुमार श्रीश्रीमाल ने सभी तपस्वियों की सुखसाता पूछते हुए तप अनुमोदना में पधारे सभी गुरुभक्तों के प्रति आभार व्यक्त किया। सकल आयोजन में श्रीसंघ व महिला मंडल के पदाधिकारियों सहित श्री ललित जैन नवयुवक मण्डल की सक्रिय योगदान रहा। नन्दचक्र की इस ऐतिहासिक आराधना ने थांदला की धर्मधरा पर तप, त्याग, संयम और गुरुभक्ति की ऐसी अमिट छाप छोड़ी, जिसकी गूंज लंबे समय तक जैन समाज में सुनाई देती रहेगी।

