Jainism

मुनिश्री 108 उपशान्तसागर जी महाराज की त्याग, तप और साधना से प्रेरणादायी आध्यात्मिक यात्रा, श्रद्धालुओं के लिए बनी मार्गदर्शक
मंदिर की सीमा मत बाँधो, धर्म को असीम कर दो” : मुनि सुधा सागर जी
सबके दिन एक जैसे नहीं होते, संकट में धैर्य रखें और सुख में अहंकार से बचें: आचार्य विशुद्धसागर
सम्मेद शिखरजी तीर्थ पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो : राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ की मांग
गुरु के मार्गदर्शन से ही आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त : आचार्यश्री उदारसागर महाराज
राग दूर करने के लिए मौत का चिंतन और द्वेष मिटाने के लिए मैत्री भाव जरूरी: साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी
शब्दज्ञान भिन्न, आत्मज्ञान भिन्न; आचरण के बिना ज्ञान अधूरा : आचार्य विशुद्धसागर जी महाराज
संतों के चरणों में पाद प्रक्षालन कर अभिषेक जैन मोनू ने मनाया जन्मदिन, समाजजनों ने दी शुभकामनाएं
आचार्य विशुद्धसागर जी महाराज का संदेश: पहले स्वयं का कल्याण करो, फिर दूसरों के बारे में सोचो
रात्रि भोजन नरक का पहला द्वार, इससे त्याग से जीव रक्षा संभव: डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज
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