Jain Philosophy

हमें कर्मों से नहीं, परिणाम बिगड़ने से डरना चाहिए: पं. संयम शास्त्री
संसार भावना: चतुरगति के भ्रमण से आत्म-जागरण तक, जैन दर्शन देता है निज स्वरूप पहचानने का संदेश
अशरण भावना: संसार के सभी सहारे क्षणभंगुर, मुक्ति के मार्ग पर शुद्ध आत्मा ही अंतिम शरण
सम्यग्दर्शन के आठों अंगों का पालन आवश्यक : आचार्यश्री उदारसागर
सामर्थ्य को पहचानो, आत्मा के विष को छोड़कर कल्याण की ओर बढ़ो: मुनिश्री सुधासागर महाराज
Indore news देवी अहिल्या विश्वविद्यालय-कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ के बीच MOU, जैन दर्शन और प्राकृत भाषा में होगा बड़ा काम
श्रीकृष्ण के जीवन में लोकमंगल, कर्म और करुणा का संदेश, जैन दर्शन की दृष्टि से समझें नारायण का शाश्वत आदर्श
मुरैना में आचार्यश्री उदारसागर ने समझाया अमूढ़दृष्टि का महत्व, अंधविश्वास से बचने की दी सीख
आकांक्षाओं से मुक्ति ही आत्मकल्याण का मार्ग, आचार्यश्री उदारसागर ने बताया नि:कांक्षित का महत्व
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