सूखा घोषित रतलाम में पानी की बर्बादी का आरोप, बछोड़िया में रोज घंटों चलती है टंकी की मोटर
रतलाम। जिले में सूखे की स्थिति घोषित होने और जल संरक्षण के निर्देशों के बीच पिपलोदा तहसील की ग्राम पंचायत बछोड़िया से सरकारी पानी की कथित बर्बादी का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की सरकारी पानी की टंकी की मोटर रोज दो से तीन घंटे तक लगातार चलती रहती है। इस दौरान टंकी से पानी बहकर व्यर्थ चला जाता है, जबकि गांव के लोग पेयजल की कमी से परेशान हैं।
ग्रामीणों के अनुसार यह किसी एक दिन की घटना नहीं, बल्कि नियमित रूप से हो रही समस्या है। उनका कहना है कि जब जल संकट के बीच लोगों से पानी बचाने की अपील की जा रही है, तब सरकारी व्यवस्था से जुड़े इस मामले पर ध्यान दिया जाना चाहिए। ग्रामीणों ने पानी की आपूर्ति और टंकी संचालन की व्यवस्था की जांच कराने की मांग की है।
रोजाना मोटर चलने और पानी बहने का दावा
बछोड़िया के ग्रामीणों का कहना है कि टंकी की मोटर लंबे समय तक चलने से बड़ी मात्रा में पानी बहकर बर्बाद होता है। ग्रामीणों ने इसे खासतौर पर सूखे की स्थिति में गंभीर मामला बताया है। उनका आरोप है कि पानी की उपलब्धता सीमित होने के बावजूद मोटर संचालन पर निगरानी नहीं रखी जा रही, जिससे टंकी से निकलने वाला पानी उपयोग में आने के बजाय बह जाता है।
हालांकि, बर्बाद पानी की वास्तविक मात्रा का कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। ग्रामीणों ने रोजाना दो से तीन घंटे तक मोटर चलने की बात कही है। इस दावे की पुष्टि और व्यवस्था की स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित विभाग या पंचायत स्तर पर निरीक्षण जरूरी होगा।
जल संकट के बीच ग्रामीणों की चिंता
ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में कई परिवारों को पीने के पानी के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे समय में सरकारी टंकी से पानी बहने की बात सामने आने से लोगों में नाराजगी है। उनका कहना है कि पानी की आपूर्ति का समय और मात्रा व्यवस्थित हो, तो उपलब्ध जल का बेहतर उपयोग किया जा सकता है और लोगों की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
रतलाम जिले को सूखा घोषित किए जाने के बाद जल संरक्षण और उपलब्ध संसाधनों के उचित उपयोग की अहमियत और बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक निर्देशों का असर तभी दिखेगा, जब गांवों में जल आपूर्ति की व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी हो और पानी की बर्बादी रोकने के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह बनाया जाए।
सवाल उठाने पर नल चालक की दादागिरी का आरोप
ग्रामीणों ने पानी के मुद्दे पर सवाल करने पर नल चालक के कथित दुर्व्यवहार का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि जब लोग मोटर के लंबे समय तक चलने और पानी बहने की वजह पूछते हैं, तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। ग्रामीणों के आरोप के अनुसार, सवाल उठाने पर नल चालक दबाव बनाने या दादागिरी दिखाने जैसा व्यवहार करता है।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती। नल चालक का पक्ष भी सामने नहीं आया है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए संबंधित अधिकारी ग्रामीणों की शिकायत सुनें और पानी की टंकी, मोटर संचालन तथा आपूर्ति व्यवस्था का निरीक्षण करें, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
जांच और व्यवस्था सुधारने की मांग
ग्रामीणों ने पंचायत और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की है कि टंकी की मोटर चलाने के समय की जांच की जाए और पानी की आपूर्ति को जरूरत के अनुसार नियंत्रित किया जाए। उनका कहना है कि मोटर संचालन पर निगरानी रखी जाए, टंकी और पाइपलाइन से हो रहे संभावित रिसाव की जांच हो तथा शिकायतों के लिए जिम्मेदार अधिकारी तय किए जाएं।
पानी की उपलब्धता और वितरण की जानकारी गांव में स्पष्ट रूप से साझा करने से भी लोगों की चिंता कम हो सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि जल संकट के दौरान हर बूंद का उपयोग जरूरी है, इसलिए सरकारी व्यवस्था में पानी की बर्बादी रोकने के लिए समय रहते कदम उठाए जाने चाहिए।
इस मामले में पंचायत या जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं कराई गई है। ग्रामीणों की शिकायतों पर जांच और अधिकारियों के पक्ष के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि टंकी संचालन में लापरवाही हुई है या नहीं। फिलहाल ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल ध्यान देकर पानी की बर्बादी रोकने और पेयजल व्यवस्था सुधारने की अपील की है।
