Nagda में 7 नवंबर को नरक चतुर्दशी पर मुक्तेश्वर महादेव मंदिर में सामूहिक दीपयादि श्राद्ध, यम तर्पण और दीपदान का आयोजन सुबह 5 से 6:30 बजे तक होगा।
नरक चतुर्दशी पर पितृ शांति के लिए Nagda में होगा सामूहिक दीपदान और यम तर्पण, 7 नवंबर को विशेष आयोजन
मुक्तेश्वर महादेव मंदिर परिसर में ब्रह्ममुहूर्त में होगा दीपयादि श्राद्ध, पितरों की सद्गति और परिवार की सुख-शांति के लिए श्रद्धालु करेंगे विशेष अनुष्ठान
दैनिक स्वराज वाणी
Nagda (उज्जैन)। दीपावली पर्व की धार्मिक परंपराओं में नरक चतुर्दशी का विशेष महत्व माना जाता है। इस अवसर पर पितरों की आत्मिक शांति, सद्गति एवं परिवार की सुख-समृद्धि की कामना को लेकर नागदा में 7 नवंबर, शनिवार को सामूहिक दीपयादि श्राद्ध, यम तर्पण एवं दीपदान का विशेष धार्मिक आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम चंबल तट स्थित श्री मुक्तेश्वर महादेव मंदिर परिसर में प्रातः 5 बजे से 6:30 बजे तक आयोजित होगा। श्रद्धालुओं से सुबह 4:30 बजे तक आयोजन स्थल पर पहुंचने की अपील की गई है।
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ होगा सामूहिक धार्मिक अनुष्ठान
आयोजन वैदिक कर्मकांड आचार्य पंडित अजय पंड्या एवं पंडित दीपक पंड्या के मार्गदर्शन में संपन्न होगा। कार्यक्रम संयोजक पंडित निलेश मेहता ने बताया कि नागदा में पिछले कई वर्षों से यह धार्मिक परंपरा निभाई जा रही है। इसका उद्देश्य समाज में पितृ स्मरण, धार्मिक संस्कारों एवं सनातन परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
आयोजन में श्रद्धालु विधि-विधान से यम धर्मराज की पूजा, पितृ तर्पण और दीपदान कर अपने पूर्वजों की आत्मिक शांति एवं सद्गति की प्रार्थना करेंगे।
पितरों की शांति और सद्गति के लिए किया जाएगा दीपदान
आचार्य पंडित अजय पंड्या एवं पंडित दीपक पंड्या ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मनुष्य के शुभ-अशुभ कर्म उसके जीवन और मृत्यु के बाद की गति से जुड़े माने जाते हैं। गरुड़ पुराण में भी कर्मों के फल और जीव की गति का वर्णन मिलता है।
मान्यता है कि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के ब्रह्ममुहूर्त में यम धर्मराज के निमित्त दीपदान, पितृ तर्पण एवं श्राद्ध करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है। इस अनुष्ठान के माध्यम से श्रद्धालु अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनके जाने-अनजाने कर्मों के प्रायश्चित एवं सद्गति की कामना करते हैं।
दीपदान से मिलेगा संस्कृति और संस्कारों के संरक्षण का संदेश
आयोजकों के अनुसार नरक चतुर्दशी पर दीपदान केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति सम्मान, श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने की परंपरा भी है। यमदीप का संबंध धार्मिक मान्यताओं में अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति और जीवन में मंगल की कामना से जोड़ा जाता है।
इस आयोजन के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और सनातन धार्मिक परंपराओं से जोड़ने का प्रयास भी किया जाएगा।
श्रद्धालुओं को साथ लानी होगी पूजन सामग्री
आयोजन में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं से चार गन्ने, छह छोटे जल के कुल्हड़, एक छोटा चांदी का दीपक, पांच तांबे के दीपक, 16 मिट्टी के दीपक, रुई की बत्तियां, दो छोटी थालियां, एक बड़ी परात, लोटा, पानी की बाल्टी, काले तिल, जौ, अबीर, चंदन, हल्दी, रोली-कुमकुम, फूल, मिठाई, धानी, बताशे एवं छह दोने साथ लाने का आग्रह किया गया है।
इसके अतिरिक्त पितरों के निमित्त दीपोत्सव मनाने के लिए श्रद्धालु फुलझड़ी, चकरी एवं अनार भी ला सकते हैं। सुबह के समय ठंड को देखते हुए शॉल, स्वेटर, दरी, आसन एवं ऊनी टोपी साथ लाने की सलाह दी गई है।
सुबह 4:30 बजे तक पहुंचने की अपील
कार्यक्रम संयोजक पंडित निलेश मेहता ने नागदा नगर एवं आसपास के क्षेत्रों के धर्मप्रेमी नागरिकों, युवाओं, मातृशक्ति और श्रद्धालु परिवारों से अधिक से अधिक संख्या में आयोजन में सहभागी बनने का आग्रह किया है।
उन्होंने कहा कि यह आयोजन पूर्वजों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के साथ परिवार की सुख-शांति और आने वाली पीढ़ियों तक धार्मिक संस्कार पहुंचाने का अवसर है।
आयोजन संबंधी जानकारी के लिए पंडित अजय पंड्या, पंडित दीपक पंड्या से मोबाइल नंबर 9713708673, 9770370629 तथा कार्यक्रम संयोजक पंडित निलेश मेहता से 9826411331 पर संपर्क किया जा सकता है।
कार्यक्रम की जानकारी ब्राह्मण समाज Nadga युवा संस्कार परिवार के संयोजक निलेश मेहता ने दी।



