प्रियांक खरगे की नई मांग: आरएसएस गतिविधियों में शामिल सरकारी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, CM को लिखा पत्र
बंगलूरू, कर्नाटक:
कर्नाटक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की गतिविधियों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Siddaramaiah) की सरकार ने पहले ही निर्देश दिए हैं कि सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों, सार्वजनिक मैदानों और राज्य सरकार की अन्य संपत्तियों पर आरएसएस की शाखाएं या कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएं। अब कर्नाटक के कैबिनेट मंत्री प्रियांक खरगे (Priyank Kharge) ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए, आरएसएस की गतिविधियों में शामिल सरकारी कर्मचारियों (Government Employees) के खिलाफ कार्रवाई की मांग मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर की है।
प्रियांक खरगे का पत्र और उनकी मांग
गुरुवार, 16 अक्टूबर 2025 को प्रियांक खरगे ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पत्र लिखकर स्पष्ट किया कि राज्य के सरकारी कर्मचारी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अन्य राजनीतिक संगठनों की गतिविधियों में शामिल होकर कर्नाटक सिविल सेवा (आचरण) नियम, 2021 का उल्लंघन कर रहे हैं।
प्रियांक खरगे ने अपने पत्र में कहा कि नियम 5(1) के तहत कोई भी सरकारी कर्मचारी किसी भी राजनीतिक दल या उससे जुड़े संगठन का सदस्य नहीं हो सकता, न ही किसी राजनीतिक गतिविधि में भाग ले सकता है, न ही समर्थन मांग सकता है या किसी भी तरह से सहायता प्रदान कर सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के दिनों में कई सरकारी कर्मचारी और अधिकारी स्पष्ट निर्देशों के बावजूद आरएसएस और अन्य संगठनों के कार्यक्रमों में शामिल हुए हैं।
प्रियांक खरगे ने मुख्यमंत्री से एक परिपत्र जारी करने का अनुरोध किया है, जिसमें सरकारी कर्मचारियों को आरएसएस और अन्य संगठनों की गतिविधियों में भाग लेने से सख्ती से मना किया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
कर्नाटक सरकार और RSS गतिविधियों का विवाद
कर्नाटक में यह विवाद तब शुरू हुआ जब सिद्धारमैया सरकार ने सरकारी और अर्द्ध-सरकारी संपत्तियों पर आरएसएस शाखाओं और कार्यक्रमों के आयोजन पर रोक लगाने का निर्णय लिया। यह कदम उस समय आया जब विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक मंचों पर आरएसएस की गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ रही थी।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि आरएसएस की गतिविधियों में सरकारी कर्मचारियों की भागीदारी सीधे तौर पर कर्नाटक सिविल सेवा नियम, 2021 के नियम 5(1) का उल्लंघन है। इस नियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी कर्मचारियों को किसी भी राजनीतिक गतिविधि या संगठन से संबद्ध नहीं होना चाहिए, ताकि सरकारी प्रशासन निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से कार्य कर सके।
सरकारी कर्मचारियों के लिए नियम और निर्देश
कर्नाटक सिविल सेवा (आचरण) नियम, 2021 के नियम 5(1) में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि:
-
कोई भी सरकारी कर्मचारी किसी राजनीतिक दल या संगठन का सदस्य नहीं होगा।
-
सरकारी कर्मचारी किसी राजनीतिक गतिविधि में शामिल नहीं होंगे।
-
न तो वह समर्थन मांगेगा और न ही किसी गतिविधि के लिए कोई संसाधन उपलब्ध कराएगा।
इसके बावजूद, कई सरकारी अधिकारी और कर्मचारी आरएसएस और अन्य राजनीतिक संगठनों की शाखाओं और कार्यक्रमों में भाग लेते पाए गए हैं। इससे सरकारी तंत्र की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
प्रियांक खरगे की चेतावनी
अपने पत्र में प्रियांक खरगे ने कहा, “राज्य के सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अन्य संगठनों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों और गतिविधियों में भाग लेने से सख्ती से रोकने और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्देश देने वाला एक परिपत्र जारी करने की सिफारिश की गई है।”
खरगे की यह मांग सरकार के उन कदमों को और प्रभावी बनाने की कोशिश है, जो पहले ही आरएसएस की सरकारी संपत्तियों में गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए लागू किए गए हैं।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
कर्नाटक में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील है। विपक्ष और कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सरकारी कर्मचारियों की भागीदारी आरएसएस जैसी राजनीतिक-सामाजिक संस्थाओं में प्रशासन की निष्पक्षता और विश्वास को प्रभावित कर सकती है। वहीं कुछ समाजसेवी इस कदम को सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और सरकारी कर्मचारियों की राजनीतिक गतिविधियों में भागीदारी रोकने की दिशा में सकारात्मक कदम मान रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया प्रियांक खरगे के अनुरोध पर परिपत्र जारी करते हैं और नियमों का उल्लंघन करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है, तो यह अन्य राज्यों में भी सरकारी कर्मचारियों की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए मिसाल बन सकता है।
निष्कर्ष
कर्नाटक में RSS की गतिविधियों को लेकर उठी यह मांग अब और स्पष्ट हो गई है। प्रियांक खरगे ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि सरकारी कर्मचारियों को आरएसएस और अन्य संगठनों की गतिविधियों में भाग लेने से रोका जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
यह कदम न केवल सरकारी कर्मचारियों की निष्पक्षता बनाए रखने में मदद करेगा, बल्कि सरकारी संसाधनों के सही उपयोग और प्रशासनिक निष्पक्षता को भी मजबूत करेगा।
