—Advertisement—

,

“12 लाख की टैक्स छूट पर संशय खत्म? वित्त मंत्री ने संसद में रखा नया इनकम टैक्स बिल, जानें क्या है बदलाव”

Author Picture
Published On: 11 August 2025
IMAGE 1675239411

—Advertisement—

आयकर कानून में बड़े बदलाव की ओर कदम, वित्त मंत्री ने लोकसभा में पेश किया नया इनकम टैक्स बिल

नई दिल्ली: भारत में प्रत्यक्ष कर व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव का रास्ता साफ हो गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को लोकसभा में संशोधित इनकम टैक्स बिल, 2025 पेश किया, जिसमें संसदीय चयन समिति की अधिकतर सिफारिशों को शामिल किया गया है। यह नया विधेयक 1961 के आयकर अधिनियम को पूरी तरह से बदलने का आधार बनेगा और लोकसभा में इसे मंजूरी भी मिल गई है।

इससे पहले, सरकार ने 13 फरवरी को पेश किए गए पुराने इनकम टैक्स बिल को वापस ले लिया था। 11 अगस्त को पेश किए गए इस संशोधित मसौदे में सभी सुझाए गए बदलावों को एक ही दस्तावेज में समाहित किया गया है। करदाताओं के लिए राहत की बात यह है कि सालाना 12 लाख रुपये तक की आय पर टैक्स से छूट का प्रावधान जस का तस रखा गया है।

वित्त मंत्री ने क्या कहा
संसद में सीतारमण ने स्पष्ट किया कि चयन समिति से प्राप्त सुझावों में कानूनी स्पष्टता लाने, ड्राफ्टिंग त्रुटियां सुधारने, शब्दावली का मिलान करने और क्रॉस-रेफरेंसिंग जैसे सुधार आवश्यक थे। इन कारणों से फरवरी का बिल वापस लिया गया और नया मसौदा लाया गया, जो अब मौजूदा कानून की जगह लेगा।

चयन समिति की प्रमुख सिफारिशें

  • धारा 21 (संपत्ति का वार्षिक मूल्य): ‘इन नॉर्मल कोर्स’ शब्द हटाकर खाली पड़ी संपत्तियों के वास्तविक और अनुमानित किराए की स्पष्ट तुलना।

  • धारा 22 (हाउस प्रॉपर्टी आय): 30% मानक कटौती नगरपालिका कर घटाने के बाद; निर्माण-पूर्व ब्याज कटौती का दायरा किराए पर दी गई संपत्तियों तक बढ़ाना।

  • धारा 19 (वेतन कटौती – अनुसूची VII): गैर-कर्मचारियों को भी पेंशन फंड से मिलने वाली कम्यूटेड पेंशन पर कटौती की अनुमति।

  • धारा 20 (व्यावसायिक संपत्ति): अस्थायी रूप से खाली पड़ी व्यावसायिक संपत्तियों को ‘हाउस प्रॉपर्टी’ आय में टैक्स से बाहर करना।

समिति का मानना है कि इन बदलावों से कानून में पारदर्शिता और न्यायसंगतता आएगी।

पुराने फरवरी बिल की मुख्य बातें
फरवरी का ड्राफ्ट छह दशकों में सबसे बड़ा टैक्स सुधार माना जा रहा था, जिसमें—

  • सरल भाषा, प्रावधानों का एकीकरण और कम कटौतियों का प्रस्ताव।

  • कुछ अपराधों के लिए कम पेनाल्टी और “पहले भरोसा, बाद में जांच” का सिद्धांत।

  • टैक्स स्लैब, कैपिटल गेन नियम और आय वर्गों में कोई बदलाव नहीं।

  • TDS और डेप्रिसिएशन प्रावधानों को सरल करना, डिजिटल निगरानी और आधुनिक प्रशासनिक ढांचा शामिल था।

यह मसौदा 23 अध्याय, 536 धाराएं और 16 अनुसूचियों से युक्त था, जिसमें आसान समझ के लिए टेबल और फार्मूले दिए गए थे।

नए बिल के पारित होने के बाद भारत में आयकर व्यवस्था का ढांचा आने वाले समय में पूरी तरह बदलने की संभावना है, जिससे टैक्स प्रणाली अधिक पारदर्शी और करदाताओं के लिए सरल होगी।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp