MP News: AI से जांच में नगरीय निकायों की गड़बड़ियां उजागर, टिमरनी और कानड़ के पूर्व CMO की पेंशन में कटौती
खरगोन में दो इंजीनियरों की वेतनवृद्धि रोकी गई
भोपाल। मध्यप्रदेश के नगरीय निकायों में सरकारी खरीदी और विकास कार्यों से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में विभाग ने कार्रवाई की है। टिमरनी और कानड़ के तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (CMO) की पेंशन में कटौती की गई है। वहीं, खरगोन में प्रतिमा स्थापना के काम में अनियमितता के मामले में दो इंजीनियरों की वेतनवृद्धि रोकने के आदेश जारी किए गए हैं।
ये मामले नगरीय निकायों में खरीदी, पेयजल योजना के क्रियान्वयन और निर्माण कार्यों से संबंधित हैं। विभागीय कार्रवाई में सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन पर असर पड़ा है, जबकि सेवा में कार्यरत अधिकारियों को वेतनवृद्धि रोकने का दंड दिया गया है।
टिमरनी के पूर्व CMO की पेंशन से पांच साल तक 10 प्रतिशत राशि रोकी जाएगी
हरदा जिले की टिमरनी नगर पालिका में स्वच्छता सामग्री की खरीदी में अनियमितता के मामले में तत्कालीन CMO राजाराम सोनपुर को दोषी पाया गया। उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए अगले पांच साल तक पेंशन की 10 प्रतिशत राशि रोकने के आदेश दिए गए हैं। इस निर्णय से उनकी पेंशन पर निर्धारित अवधि तक कटौती का असर रहेगा।
इसी तरह, आगर-मालवा जिले की कानड़ नगर परिषद में पेयजल योजना के क्रियान्वयन से जुड़ी वित्तीय अनियमितता के मामले में तत्कालीन CMO पवन मिश्रा पर कार्रवाई की गई है। उनकी पेंशन में 3 प्रतिशत की स्थायी कटौती की गई है। पेयजल योजना आम लोगों से सीधे जुड़ी होती है, इसलिए इसके काम और खर्च में नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होती है।
खरगोन में प्रतिमा स्थापना के मामले में कार्रवाई
खरगोन में प्रतिमा स्थापना के दौरान हुई अनियमितता के मामले में विभाग ने उपयंत्री जितेंद्र सोडा और सहायक यंत्री मनीष महाजन की वेतनवृद्धि रोकने के आदेश दिए हैं। कार्रवाई निर्माण कार्य की प्रक्रिया में सामने आई गड़बड़ी के संबंध में की गई है। उपलब्ध रिपोर्ट में वेतनवृद्धि रोकने की अवधि का उल्लेख नहीं है।
तीनों मामलों में विभागीय कार्रवाई का दायरा अलग-अलग है। टिमरनी और कानड़ में पूर्व CMO की पेंशन पर कार्रवाई हुई, जबकि खरगोन में दो इंजीनियरों की वेतनवृद्धि रोकी गई। इन कदमों के जरिए नगरीय निकायों में सरकारी धन के उपयोग और योजनाओं के क्रियान्वयन में जवाबदेही तय करने की कोशिश की जा रही है।
AI और डिजिटल रिकॉर्ड से खरीदी की निगरानी
प्रदेश में नगरीय निकायों की खरीद प्रक्रिया पर निगरानी के लिए GeM और ई-नगरपालिका पोर्टल के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, डिजिटल रिकॉर्ड और AI की मदद से विभिन्न निकायों में खरीदी के आंकड़ों और दरों में अंतर की पहचान की गई। छह महीने में 201 मामलों में कुल 392 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी भी सामने आई है।
AI का उपयोग रिकॉर्ड और आंकड़ों में संभावित विसंगतियों को चिन्हित करने के लिए किया गया। इसके बाद मामलों की जांच और कार्रवाई विभागीय स्तर पर की गई। अधिकारियों के खिलाफ की गई ये सजाएं अलग-अलग मामलों से संबंधित हैं; उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि इन तीनों प्रकरणों की शुरुआत सीधे AI विश्लेषण से हुई थी।
सरकारी खरीदी और विकास कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए निकायों से नियमों के अनुसार प्रक्रिया अपनाने की अपेक्षा की जाती है। टिमरनी, कानड़ और खरगोन के मामलों में हुई कार्रवाई से यह संदेश गया है कि खरीदी, योजनाओं और निर्माण कार्यों में अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।
