भोपाल में नवरात्रि की धूम: ‘प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बींदणी’ की टीम ने अंडरप्रिविलेज्ड बच्चियों और स्थानीय महिलाओं संग खेला गरबा
भोपाल, 30 सितंबर 2025: नवरात्रि, देवी शक्ति का पवित्र पर्व, इस बार और भी खास बन गया जब लोकप्रिय शो ‘प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बींदणी’ की कलाकारों ने झीलों की नगरी भोपाल का दौरा किया और अंडरप्रिविलेज्ड बच्चियों व स्थानीय महिलाओं के साथ गरबा खेलकर उत्सव की रौनक बढ़ाई।
सन नियो के इस शो की टीम में मुख्य कलाकार गौरी शेलगांवकर, आकाश जग्गा और मोनिका खन्ना शामिल थे, जिन्होंने नवरात्रि के अवसर पर भोपाल में कई गतिविधियों में भाग लिया। कलाकारों ने न केवल अपने प्रशंसकों से मुलाकात की, बल्कि एनजीओ में रहने वाली बच्चियों के लिए गरबा के कपड़े भी भेंट किए और उनके साथ गरबा खेलकर इस त्योहार को और सार्थक बनाया।
शो की कहानी और संदेश
‘प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बींदणी’ का केंद्र किरदार घेवर है, जिसे गौरी शेलगांवकर ने जीवंत ढंग से निभाया है। शो की कहानी राजस्थान के एक छोटे से गाँव की साहसी और जीवंत लड़की घेवर के इर्द-गिर्द घूमती है। माता-पिता के असमय निधन के बाद उसका पालन-पोषण उसके बड़े भाई और भाभी ने किया। लेकिन उसकी शांत और खुशहाल जिंदगी में एक नया तूफ़ान तब आता है, जब उसके जीवन में एक नवजात बच्चा प्रवेश करता है। इस घटना से दो पूरी तरह अलग दुनिया के लोग जुड़ते हैं और घेवर कई चुनौतियों और संघर्षों का सामना करती है। शो महिला सशक्तिकरण, प्यार और त्याग की कहानी को दर्शाता है। इसे हर दिन रात 9 बजे सन नियो पर देखा जा सकता है।
कलाकारों के अनुभव
गौरी शेलगांवकर, जिन्होंने घेवर का किरदार निभाया है, ने कहा,
“भोपाल में नवरात्रि का यह खास दिन मेरे लिए बेहद यादगार रहा। हमें अपने कई फैंस से मुलाकात करने का अवसर मिला, जिन्होंने हमें हमारे किरदार के नाम से पहचाना। सबसे खास पल था एनजीओ की उन नन्हीं कन्याओं से मिलना और उनके साथ गरबा खेलना। उनके चेहरे की मुस्कान और अनुभव मेरे लिए अमूल्य थे। इस पहल से ‘दिल से जियो’ की फिलॉसफी साकार होती दिखी।”
आकाश जग्गा, जिन्होंने कुंदन का किरदार निभाया है, ने अनुभव साझा किया,
“नवरात्रि के दौरान भोपाल आना और नन्हीं कन्याओं से मिलकर उनका आशीर्वाद लेना किसी सौभाग्य से कम नहीं था। उनके साथ गरबा खेलना और उनका परिवार बनकर समय बिताना इस यात्रा का सबसे खूबसूरत हिस्सा रहा। साथ ही हम भोपाल के लोकल स्नैक्स जैसे पोहा और जलेबी का आनंद भी लिया।”
मोनिका खन्ना, जिन्होंने रमकुड़ी का किरदार निभाया है, ने कहा,
“नवरात्रि के अवसर ने हमें शूटिंग से समय निकालकर समाज के लिए कुछ सार्थक करने का अवसर दिया। एनजीओ की बच्चियों और स्थानीय महिलाओं से मिलकर उनके साथ गरबा खेलना और अन्य गतिविधियों में भाग लेना बेहद खूबसूरत अनुभव था। यह यात्रा मुझे हमेशा याद रहेगी।”
नवरात्रि का संदेश और समापन
भोपाल में इस यात्रा ने न केवल कलाकारों और दर्शकों को जोड़ा, बल्कि नवरात्रि के वास्तविक भाव—भक्ति, आनंद और एकता—को भी जीवित किया। यह आयोजन साबित करता है कि हर बेटी और हर महिला में देवी का स्वरूप विद्यमान है और उन्हें सम्मान और सशक्तिकरण दिया जाना चाहिए।
इस प्रकार, ‘प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बींदणी’ की टीम का भोपाल दौरा नवरात्रि के त्योहार को एक नई ऊँचाई पर ले गया, जहाँ कलाकारों और आम जनता ने मिलकर इस पर्व की रौनक और सार्थकता को महसूस किया।

