—Advertisement—

MP News: कांग्रेस का वार केंद्रीय कर हिस्सेदारी कटौती पर, 50 हजार करोड़ के संभावित नुकसान का दावा, पीएम से हस्तक्षेप की मांग

Author Picture
Published On: 18 February 2026
MP
— मध्यप्रदेश कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि कर हिस्सेदारी में कटौती से राज्य को अगले पांच वर्षों में 50 हजार करोड़ रुपये का संभावित नुकसान होगा, पीएम से हस्तक्षेप की मांग की।

—Advertisement—

MP News: कांग्रेस का वार केंद्रीय कर हिस्सेदारी कटौती पर, 50 हजार करोड़ के संभावित नुकसान का दावा, पीएम से हस्तक्षेप की मांग

MP की वित्तीय सेहत को लेकर सियासत तेज हो गई है। 18 फरवरी को राज्य का वार्षिक बजट पेश होने से ठीक पहले प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि नई कर-वितरण नीति से राज्य को अगले पांच वर्षों में करीब 50 हजार करोड़ रुपये का संभावित राजस्व नुकसान हो सकता है। इस मामले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।

केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी घटाई गई

पत्र में कहा गया है कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत केंद्रीय करों में मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी 7.85 प्रतिशत से घटाकर 7.35 प्रतिशत कर दी गई है। कांग्रेस का दावा है कि 0.50 प्रतिशत की यह कटौती 2026 से 2031 के बीच राज्य की आर्थिक स्थिति पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। पटवारी ने इसे सीधे तौर पर विकास योजनाओं, अधोसंरचना परियोजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के लिए खतरा बताया है।

कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि कर हिस्सेदारी में यह कटौती राज्य की वित्तीय मजबूती को कमजोर करेगी और विकास योजनाओं की कार्यान्वयन क्षमता प्रभावित होगी। पत्र में यह भी कहा गया कि यदि सरकार इस स्थिति को नजरअंदाज करती है, तो भविष्य में प्रदेश के वित्तीय संकट और बढ़ सकते हैं।

सार्वजनिक ऋण पर बढ़ता दबाव

पत्र में राज्य की मौजूदा आर्थिक स्थिति को भी गंभीर बताया गया है। कांग्रेस का दावा है कि प्रदेश का कुल सार्वजनिक ऋण लगभग 5.31 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जो राज्य के वार्षिक बजट से अधिक है। चालू वित्तीय वर्ष में ही लगभग 72,900 करोड़ रुपये उधारी ली गई है, और फरवरी माह में तीन बार 5,000 करोड़ रुपये से अधिक उधारी लेने की जानकारी सामने आई है।

कांग्रेस ने यह सवाल भी उठाया है कि जब कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है, तब कर हिस्सेदारी में कटौती राज्य को और वित्तीय संकट में डाल सकती है। पत्र में कहा गया है कि राज्य सरकार को वित्तीय अनुशासन के लिए केंद्रीय मार्गदर्शन की आवश्यकता है।

वित्तीय प्रबंधन पर सवाल

कांग्रेस ने सरकार की वित्तीय प्रबंधन क्षमता पर भी सवाल उठाए हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में स्वीकृत बजटीय प्रावधानों का पूरा उपयोग न हो पाने की आलोचना करते हुए पत्र में कहा गया कि अधोसंरचना और विकास से जुड़े लगभग 1,000 करोड़ रुपये के प्रावधानों में से करीब 70 प्रतिशत राशि खर्च ही नहीं की जा सकी। कांग्रेस का आरोप है कि यह प्रशासनिक अक्षमता और वित्तीय अनुशासन की कमी को दर्शाता है।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि एक ओर सरकार उधारी पर निर्भर है, वहीं दूसरी ओर स्वीकृत धनराशि का प्रभावी उपयोग नहीं हो पा रहा। इससे न केवल विकास कार्य प्रभावित होंगे बल्कि राज्य की वित्तीय स्थिरता भी जोखिम में है।

18 फरवरी को पेश होने वाला बजट

MP का वार्षिक बजट 18 फरवरी को पेश होने वाला है। इससे ठीक पहले कांग्रेस का यह पत्र राजनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से अहम माना जा रहा है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि केंद्र सरकार राज्य की वित्तीय स्थिति की निगरानी सुनिश्चित करे और ऋण प्रबंधन व राजकोषीय अनुशासन को मजबूत करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान करे।

बजट पेश होने से पहले यह पत्र राज्य सरकार के लिए चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस का दावा है कि यदि केंद्र की ओर से समय पर हस्तक्षेप नहीं किया गया तो प्रदेश की आर्थिक सेहत और विकास योजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

किसानों और आम जनता पर असर

राज्य की वित्तीय स्थिति सीधे तौर पर किसानों और आम जनता को प्रभावित कर सकती है। अधोसंरचना और विकास परियोजनाओं में कमी, योजनाओं की धीमी गति और कर्ज बढ़ने से जनता के कल्याणकारी कार्यक्रमों पर असर पड़ सकता है। कांग्रेस ने केंद्र से आग्रह किया है कि राज्य के लिए वित्तीय राहत और सहयोग सुनिश्चित किया जाए।

राजनीतिक और आर्थिक मायने

राज्य में आगामी बजट राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। विपक्षी दल कांग्रेस का यह पत्र सरकार पर दबाव बनाने और बजट में अधिक पारदर्शिता की मांग करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। वहीं आर्थिक दृष्टि से यह पत्र राज्य की वित्तीय स्थिति और कर वितरण नीति पर केंद्र को जवाबदेह ठहराने का प्रयास है।

MP में वित्तीय सियासत अब गर्म हो गई है। कांग्रेस का दावा है कि कर हिस्सेदारी में कटौती से राज्य के विकास और वित्तीय स्थिरता पर गंभीर असर पड़ेगा। वित्तीय प्रबंधन और ऋण पर नियंत्रण के लिए केंद्रीय हस्तक्षेप की मांग कांग्रेस ने साफ तौर पर की है।

निष्कर्ष

18 फरवरी को पेश होने वाले बजट से पहले कांग्रेस का यह पत्र राज्य के वित्तीय स्वास्थ्य, कर हिस्सेदारी और विकास योजनाओं पर ध्यान आकर्षित करने वाला कदम है। पत्र में उठाए गए मुद्दे राजनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण हैं। यह देखना रोचक होगा कि केंद्र और राज्य सरकार इस मामले में किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं और आगामी बजट में क्या कदम उठाए जाते हैं।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp