MP मुख्यमंत्री के मत्स्य उत्पादन दोगुना करने के लक्ष्य का जैन समाज ने किया कड़ा विरोध — राजेश जैन दद्दू*
*अहिंसा के मंच से हिंसा को बढ़ावा देना स्वीकार्य नहीं*
*इंदौर।* MP के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा मत्स्य उत्पादन को तीन साल में 4.45 लाख टन से बढ़ाकर 10 लाख टन करने की घोषणा का राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ एवं सकल जैन समाज की ओर से राजेश जैन दद्दू ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के राकेश गोहिल,मंयक जैन एवं वरिष्ठ समाजसेवी डॉ जैनेन्द्र जैन ने अपने विरोधी वक्तव्य में कहा —
> *”हम मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी का सम्मान करते हैं, वे हमारे जैन धार्मिक मंचों की शोभा बढ़ाते हैं, मुनियों के चरणों में नमन करते हैं, परन्तु एक तरफ मुनियों के सामने अहिंसा परमो धर्म का उद्घोष करना और दूसरी तरफ सरकारी मंच से लाखों-करोड़ों मूक मछलियों की हत्या का व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य रखना, यह दोहरा चरित्र जैन समाज को कतई स्वीकार्य नहीं है।”*
उन्होंने कहा कि नईदुनिया, इंदौर दिनांक 24 अक्टूबर 2026 में प्रकाशित खबर — *”तीन साल में दोगुना से ज्यादा करेंगे मत्स्य उत्पादन”* — पढ़कर पूरा अहिंसा प्रेमी सर्व समाज स्तब्ध है।
*यह विकास नहीं, विनाश है —*
दद्दू ने कहा — “भोपाल में नेशनल फिशरीज कान्क्लेव में मुख्यमंत्री जी ने कहा कि एक लाख नए केज कल्चर स्थापित करेंगे, 57 हजार हेक्टेयर जमीन को सिंचाई के नाम पर मत्स्य पालन में देंगे। मैं पूछता हूँ — क्या मध्य प्रदेश को मत्स्य प्रदेश बनाना है? क्या मछलियों को पैदा करके, उन्हें तड़पा-तड़पाकर मारकर, उनका निर्यात करके ही रोजगार आएगा?”
“जैन धर्म में तो पानी छानकर पीने की बात कही गई है कि एक बूंद में असंख्य जीव हैं, और यहाँ तो लाखों टन जीवों को मारने का सरकारी लक्ष्य रखा जा रहा है। यह तो अहिंसक मध्य प्रदेश की आत्मा पर प्रहार है।”
*मुख्यमंत्री जी को चेतावनी नहीं, निवेदन —*
राजेश जैन दद्दू ने स्पष्ट किया कि यह विरोध किसी राजनीतिक दल का विरोध नहीं है, यह अहिंसा के सिद्धांत की रक्षा के लिए है।
> “हम मुख्यमंत्री जी से मांग करते हैं कि वे इस मत्स्य उत्पादन लक्ष्य को तत्काल वापस लें। यदि रोजगार ही देना है तो जैविक खेती, औषधीय खेती, फूलों की खेती, दुग्ध उद्योग, गो-पालन को बढ़ावा दें। मध्य प्रदेश तो गायों और दूध के लिए जाना जाता है, मछलियों की लाशों के लिए नहीं।”
> “जैन समाज ने हमेशा आपको अपना माना है, आपके मंच सजाए हैं। आप जैन मंचों पर आकर अहिंसा की बात न करें, यदि आपको हिंसा का ही व्यापार बढ़ाना है। समाज देख रहा है।”
उन्होंने सभी जैन सांसदों, विधायकों और जैन संस्थाओं से भी अपील की है कि वे इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री जी तक अपनी पीड़ा पहुंचाएं।
*- राजेश जैन दद्दू*
