16.5 किलो के सोने के झुमकों ने बनाया रिकॉर्ड, दुबई में भारत की ज्वेलरी कंपनी की उपलब्धि
जॉयअलुक्कास के ‘मयूर सहस्र’ झुमके 22 कैरेट सोने से बने; 55 कारीगरों ने 5,840 घंटे में तैयार की यह खास कलाकृति
दुबई। सोने और आभूषणों के लिए दुनिया भर में मशहूर दुबई में भारतीय पारंपरिक डिजाइन से प्रेरित एक विशाल झुमका जोड़ी चर्चा में है। जॉयअलुक्कास ज्वेलरी की ओर से तैयार किए गए 22 कैरेट सोने के इन झुमकों का संयुक्त वजन 16.514 किलोग्राम है। ‘मयूर सहस्र’ नाम की इस जोड़ी को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने दुनिया की सबसे भारी सोने की झुमका जोड़ी और सबसे बड़ी झुमका जोड़ी के रूप में मान्यता दी है।
55 कारीगरों ने किया महीनों तक काम
कंपनी के अनुसार, इस जोड़ी को बनाने में 55 कुशल कारीगरों ने कुल 5,840 घंटे काम किया। कई महीनों तक चली इस मेहनत में डिजाइन की बारीकियों और पारंपरिक कारीगरी पर विशेष ध्यान दिया गया। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के मुताबिक, सबसे भारी सोने की झुमका जोड़ी का रिकॉर्ड 12 अक्टूबर 2026 को दुबई में दर्ज किया गया। झुमकों का सार्वजनिक अनावरण 24 अक्टूबर को हुआ।
इनका आकार भी इन्हें आम आभूषणों से अलग बनाता है। रिपोर्टों के अनुसार, प्रत्येक झुमके की लंबाई करीब 1.215 मीटर और व्यास 0.682 मीटर है। इस वजह से इन्हें पहनने के लिए तैयार सामान्य आभूषण की तरह नहीं, बल्कि बड़े आकार की कलाकृति के रूप में देखा जा रहा है। जोड़ी का कुल शुद्ध सोने का वजन 16.514 किलोग्राम बताया गया है।
मोर से प्रेरित है ‘मयूर सहस्र’ का डिजाइन
‘मयूर सहस्र’ नाम का अर्थ ‘एक हजार मोर’ बताया गया है। इसके डिजाइन में मोर के पंखों और पारंपरिक घंटी के आकार वाले झुमके की शैली को शामिल किया गया है। मोर भारतीय परंपरा में सुंदरता और गरिमा का प्रतीक माना जाता है। डिजाइन में इस प्रेरणा को बारीक नक्काशी और सजावटी आकृतियों के जरिए दिखाया गया है।
पारंपरिक झुमका शैली दक्षिण एशियाई आभूषणों में लंबे समय से लोकप्रिय रही है। इस जोड़ी में उसी शैली को असाधारण आकार और वजन में तैयार किया गया है। कारीगरों के सामने चुनौती केवल सोने को आकार देने की नहीं, बल्कि बड़े आकार में डिजाइन की बारीकियों और संतुलन को बनाए रखने की भी रही होगी। कंपनी ने इसे भारतीय आभूषण कारीगरी की क्षमता प्रदर्शित करने वाली रचना बताया है।
दुबई में स्थायी रूप से देख सकेंगे लोग
झुमकों का अनावरण दुबई गोल्ड डिस्ट्रिक्ट स्थित ‘ज्वेल ऑफ जॉय’ शोरूम में किया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इन्हें वहीं स्थायी रूप से सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए रखा जाएगा। इन्हें बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं कराया गया है। स्थानीय निवासी और दुबई आने वाले पर्यटक शोरूम में जाकर इस रिकॉर्डधारी जोड़ी को देख सकेंगे।
इस उपलब्धि ने भारतीय पारंपरिक डिजाइन और कारीगरी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा में ला दिया है। 22 कैरेट सोने, महीनों की मेहनत और 55 कारीगरों के सामूहिक काम से बनी यह जोड़ी अपने वजन और आकार के कारण खास है। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की मान्यता के बाद ‘मयूर सहस्र’ अब दुबई के गोल्ड डिस्ट्रिक्ट में देखने आने वाले लोगों के लिए एक नया आकर्षण बन गई है।
