आबकारी नीति 2026-27: ठेकेदारों और अधिकारियों के सुझावों का दौर
MP में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई आबकारी नीति बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस नीति के निर्माण के लिए आबकारी विभाग ने शराब ठेकेदारों, बार संचालकों और विभागीय अधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठकों का आयोजन किया, जिसमें कई महत्वपूर्ण और रोचक सुझाव सामने आए।
ठेकेदारों का मुख्य जोर इस बात पर था कि आबकारी ठेकों की रिजर्व प्राइज घटाई जाए और ठेके के आधार पर न्यूनतम लिफ्टिंग की सीमा कम की जाए, ताकि कारोबार में निवेश करना आसान हो और अधिक लोग नीलामी में भाग ले सकें। वहीं, आबकारी विभाग के अधिकारी चाहते हैं कि शराब की एमएसपी (न्यूनतम बिक्री मूल्य) और एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) तय करने का अधिकार जिला स्तर पर दिया जाए, जिससे स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कीमतों को नियंत्रित किया जा सके।
MP उपमुख्यमंत्री ने बुलाई विभागीय बैठक
उपमुख्यमंत्री और वाणिज्य कर मंत्री जगदीश देवड़ा ने विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक बुलाकर स्पष्ट किया कि नई आबकारी नीति ऐसी बनाई जाए जो विभाग की आय बढ़ाए और साथ ही प्रवर्तन (Enforcement) को भी मजबूत करे। उनके निर्देश पर आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल ने प्रदेश के प्रमुख आबकारी ठेकेदारों, बार संचालकों और अधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठकें आयोजित की।
इन बैठकों में ठेकेदारों ने अपनी आमदनी बढ़ाने और कारोबार को सुगम बनाने के लिए कई सुझाव प्रस्तुत किए। ठेकेदारों का कहना था कि रिजर्व प्राइज में हर साल की जाने वाली 20 प्रतिशत वृद्धि बहुत अधिक है, इसे घटाकर 10 प्रतिशत किया जाना चाहिए ताकि अधिक से अधिक लोग ठेकों की नीलामी में भाग ले सकें। इसके अलावा, ठेकेदारों ने यह सुझाव दिया कि आबकारी ठेकों में ड्यूटी के तहत निर्धारित 85 प्रतिशत लिफ्टिंग को भी कम किया जाए।
ठेकेदारों की अन्य मांगें
ठेकेदारों ने यह भी कहा कि शराब पर लगने वाला वैट कम किया जाए क्योंकि संचालन लागत लगातार बढ़ रही है और मुनाफा घट रहा है। उनका तर्क था कि मार्जिन बढ़ाया जाए ताकि ठेकेदारों का लाभ सुनिश्चित हो। इसके साथ ही ठेकेदारों ने निम्नलिखित सुझाव दिए:
- लाइसेंस फीस में बदलाव करके इसे ज्यादा सुविधाजनक बनाया जाए।
- पॉलिसी को दो से तीन साल के लिए लागू किया जाए ताकि निवेश और संचालन में स्थिरता आए।
- बार की एमजीक्यू (न्यूनतम ग्रॉस क्वांटिटी) कम की जाए।
- टैक्सेशन का नाम बदलकर इसे जीएसटी (GST) के तहत लाभकारी बनाया जाए।
- शराब पर वैट केवल एक बार लगाया जाए, न कि लिफ्टिंग और ग्राहक को परोसने दोनों समय।
इन बैठकों में लगभग 100 ठेकेदारों ने हिस्सा लिया और अपने सुझाव साझा किए।
अधिकारियों की प्राथमिकताएँ
दूसरी ओर, आबकारी विभाग के अधिकारियों ने नई नीति के संदर्भ में कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। अधिकारियों का मानना है कि शराब की एमएसपी और एमआरपी तय करने का अधिकार जिला स्तर को दिया जाए, ताकि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार मूल्य नियंत्रण किया जा सके।
इसके अलावा अधिकारियों ने कहा कि विभाग में अमले की संख्या बढ़ाई जाए, आधुनिक लैब स्थापित की जाए और डिजिटल अल्कोहल मीटर उपलब्ध कराया जाए। अधिकारियों का यह भी सुझाव है कि बड़ी कंपनियों की महंगी शराब में नकली ब्रांड की शिकायतें अक्सर आती हैं, इसलिए ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम लागू किया जाना चाहिए ताकि सप्लाई चेन पर पूरी तरह नजर रखी जा सके।
नीति बनाने में दिशा और उद्देश्य
उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार करने के संकेत दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रवर्तन को और तेज किया जाए, अमले की संख्या बढ़ाई जाए और ऐसी नीति बनाई जाए जो विभाग की आय में वृद्धि करने के साथ-साथ अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण भी सुनिश्चित करे।
सरकार की कोशिश है कि नई आबकारी नीति राजस्व वृद्धि और व्यापारिक स्थिरता दोनों को ध्यान में रखते हुए बनाई जाए। इसके तहत यह भी ध्यान रखा जाएगा कि ठेकेदारों और बार संचालकों के संचालन में आसानी हो और साथ ही नकली शराब और अवैध बिक्री पर कड़ी निगरानी रखी जा सके।
आगे की प्रक्रिया
नई आबकारी नीति के लिए यह मंथन का दौर अभी जारी है। आने वाले दिनों में इस पर और व्यापक चर्चा की संभावना है, जिसमें सभी हितधारकों के सुझावों को ध्यान में रखते हुए नीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।
सरकार का लक्ष्य है कि नीति ऐसी हो जो ठेकेदारों के लिए लाभकारी हो, विभाग के लिए आय बढ़ाए, और साथ ही नकली शराब, अवैध बिक्री और अन्य अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करे।
इस प्रकार मध्य प्रदेश में आबकारी नीति में बदलाव की प्रक्रिया नए अध्याय की ओर बढ़ रही है, जिसमें ठेकेदारों और अधिकारियों के सुझावों को संतुलित करके व्यापारिक स्थिरता और सरकारी राजस्व दोनों को सुनिश्चित किया जाएगा।
