MP Budget 2026 को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मोहन यादव सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। जानें किसानों, महिलाओं और युवाओं से जुड़े बड़े मुद्दे।
MP Budget 2026: कमलनाथ का आरोप—‘जनहित गायब’, मोहन यादव सरकार के बजट पर सियासी घमासान
मध्य प्रदेश का MP Budget 2026 पेश होते ही प्रदेश की राजनीति गरमा गई है।
मोहन यादव सरकार के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा प्रस्तुत बजट को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे जनता के साथ विश्वासघात करार दिया है।
कमलनाथ ने कहा कि बजट में घोषणाओं की जगह “बातों के बताशे” परोसे गए हैं और चुनाव पूर्व किए गए प्रमुख वादों का कोई उल्लेख नहीं किया गया।
MP Budget 2026 क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है
MP Budget 2026 मोहन यादव सरकार का तीसरा बजट है, जिसे विकास, कृषि, महिला सशक्तिकरण और रोजगार पर केंद्रित बताया गया।
सरकार ने कई योजनाओं की घोषणा की, जिनमें—
- 1 लाख सोलर सिंचाई पंप
- फसल बीमा के लिए बड़ा प्रावधान
- महिलाओं के लिए योजनाओं का विस्तार
- भर्ती और अधोसंरचना विकास
सरकार का दावा है कि यह बजट विकास को गति देगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करेगा।
कमलनाथ का बजट पर सीधा हमला
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने MP Budget 2026 को लेकर कहा:
“इस बजट में जनहित पूरी तरह सफाचट है। जनता से किए गए वादे गायब हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने चुनाव से पहले किए गए वादों को बजट में शामिल ही नहीं किया।
चुनावी वादों का मुद्दा फिर गरमाया
कमलनाथ ने भाजपा को उसके चार बड़े वादों की याद दिलाई:
- धान का MSP ₹3100 प्रति क्विंटल
- गेहूं का MSP ₹2700 प्रति क्विंटल
- लाड़ली बहन योजना ₹3000 प्रतिमाह
- गैस सिलेंडर ₹450 में
उनका कहना है कि MP Budget 2026 में इन वादों का कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं दिया गया।
किसानों से जुड़े वादों पर सवाल
कृषि मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
कमलनाथ ने कहा कि किसानों के लिए घोषित योजनाएँ ज़मीन पर कितनी उतरेंगी, इसका कोई ठोस वित्तीय मॉडल प्रस्तुत नहीं किया गया।
उन्होंने पूछा:
- पिछले बजट की घोषणाओं का क्या हुआ?
- MSP बढ़ाने का वादा कहाँ गया?
- लागत और आय संतुलन पर सरकार की नीति क्या है?
महिलाओं और युवाओं को लेकर भी उठे प्रश्न
लाड़ली बहन योजना को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए कि राशि बढ़ाने की बात तो की जा रही है, लेकिन वित्तीय व्यवस्था स्पष्ट नहीं है।
कमलनाथ का आरोप:
- महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा का भरोसा अधूरा
- युवाओं के लिए स्थायी रोजगार मॉडल नहीं
- घोषणाएँ ज्यादा, क्रियान्वयन कम
केंद्र-राज्य आर्थिक संबंध पर भी बहस
कमलनाथ ने वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा से पूछा कि—
- केंद्र से मिलने वाले कर हिस्से में कमी की भरपाई कैसे होगी?
- संयुक्त योजनाओं की राशि में देरी पर क्या रणनीति है?
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार “केंद्र पर अत्यधिक निर्भर” है।
सरकार बनाम विपक्ष: राजनीतिक संदेश
जहाँ विपक्ष इसे “वादाखिलाफी का बजट” बता रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि—
- कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया
- विकास और कल्याण योजनाएँ जारी रहेंगी
- 2027 तक योजनाओं का विस्तार होगा
स्पष्ट है कि MP Budget 2026 अब आर्थिक दस्तावेज से ज्यादा राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका है।
निष्कर्ष: बजट से ज्यादा बना राजनीतिक मुद्दा
MP Budget 2026 ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में मध्य प्रदेश की राजनीति विकास बनाम वादों की बहस पर घूमेगी।
एक तरफ सरकार इसे विकासोन्मुख बजट बता रही है,
दूसरी तरफ विपक्ष इसे जनता से विश्वासघात कह रहा है।
आने वाले महीनों में असली परीक्षा होगी—घोषणाएँ जमीन पर कितनी उतरती हैं।
