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MP विधानसभा का बजट सत्र समय से पहले समाप्त, कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, विपक्ष ने उठाए सवाल

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Published On: 28 February 2026
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— “मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र समय से पहले समाप्त: सरकार का दावा पूर्णता का, विपक्ष ने उठाए महत्वपूर्ण मुद्दों से बचने के आरोप”

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MP विधानसभा का बजट सत्र समय से पहले समाप्त, कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, विपक्ष ने उठाए सवाल

MP विधानसभा का बजट सत्र शुक्रवार को तय समय से पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। पहले यह सत्र 6 मार्च 2026 तक चलना था, लेकिन सत्र के दौरान लगातार हो रहे हंगामे और विधायी कार्यों के संपन्न होने के कारण इसे समय से पहले समाप्त कर दिया गया। विधानसभा स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर ने सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा की।

सरकार का दावा

सत्र समाप्ति के बाद संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयर्गीय ने कहा कि बजट सत्र के दौरान जो एजेंडा कार्यमंत्रणा समिति में तय किया गया था, वह सदन में पूरी तरह से संपन्न हुआ। उन्होंने यह भी दावा किया कि निर्धारित कार्यसूची के सभी मुद्दों पर चर्चा हुई और विपक्ष का भी पूरा सहयोग रहा। मंत्री के अनुसार, सत्र के दौरान 100 प्रतिशत एजेंडा पूर्ण हुआ और सदन की कार्यवाही संतोषजनक रही।

विजयर्गीय ने सदन के प्रभावी संचालन और दोनों पक्षों के सहयोग की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि समय से पहले सत्र को समाप्त करना किसी भी तरह से कार्यवाही को अधूरी नहीं छोड़ता, बल्कि यह सुनिश्चित करता है कि सदन में निर्धारित कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हो।

विपक्ष का विरोध

हालांकि, मुख्य विपक्षी दल, कांग्रेस, ने सरकार के दावों पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के विधायक सचिन यादव ने कहा कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं की गई। उनका आरोप है कि सरकार विशेष रूप से किसानों के हित और अन्य जनहित से जुड़े मामलों पर गंभीर विमर्श से बच रही थी।

विपक्ष ने कहा कि बजट सत्र के समय से पहले समाप्त होने का निर्णय जनता के सामने पारदर्शिता के अभाव और संवैधानिक जिम्मेदारियों से भागने के रूप में देखा जा सकता है। नेता प्रतिपक्ष उमर सिंघार ने भी आरोप लगाया कि सरकार कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याओं और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा टाल रही थी, इसलिए सत्र को जल्दबाजी में समाप्त किया गया।

विपक्ष का मानना है कि समय से पहले सत्र समाप्त करना एक राजनीतिक निर्णय था, जो जनता के हित में उठाए जाने वाले सवालों को दबाने का प्रयास था। कांग्रेस ने कहा कि अब वे इस मुद्दे को विधानसभा के बाहर और जनसाधारण के बीच उठाएंगे।

सत्र के दौरान कार्यवाही का विवरण

16 फरवरी 2026 से शुरू हुए इस बजट सत्र के दौरान कुल 10 बैठकें हुईं। इन 10 दिनों में विधानसभा की कार्यवाही लगभग 62 घंटे तक चली। सदन की कार्रवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयक पास किए गए और वित्तीय मामलों पर चर्चा हुई।

अध्यक्ष ने बताया कि सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने सहयोग प्रदान किया, जिससे कार्यवाही सुचारू रूप से चल सकी। उन्होंने कहा कि सदन में हो रहे हंगामों के बावजूद, अधिकांश एजेंडा पूरा किया गया।

राजनीतिक बहस और आरोप-प्रत्यारोप

सत्र समाप्ति के तुरंत बाद सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया। कांग्रेस ने कहा कि सरकार जनता के मुद्दों से भाग रही है और केवल दिखावे के लिए कार्यवाही कर रही है। विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने बजट सत्र को जल्द समाप्त करके संवैधानिक जिम्मेदारियों से बचने की कोशिश की।

विपक्ष के नेताओं का कहना है कि सत्र में किसानों के हित, कानून-व्यवस्था की स्थिति और अन्य जनहित के मामलों पर चर्चा नहीं हुई। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने अपने समर्थकों के हितों के लिए कार्यवाही को प्राथमिकता दी, जबकि आम जनता के मुद्दों को अनदेखा किया गया।

सत्र समाप्त होने के बाद की स्थिति

सत्र समाप्त होने के बाद विधानसभा में एक अस्थायी शांति बनी, लेकिन राजनीतिक वाद-विवाद जारी है। विपक्ष ने भविष्य में इन मुद्दों पर जोर देने की योजना बनाई है और आगामी सत्रों में सरकार के खिलाफ सवाल उठाने की तैयारी कर रहा है।

सत्र की अनिश्चितकालीन स्थगन से यह स्पष्ट होता है कि MP विधानसभा में राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है। विपक्ष का कहना है कि केवल एजेंडा पूरा करने का दावा करके समय से पहले सत्र समाप्त करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चुनौती पेश करता है।

निष्कर्ष

MP विधानसभा का बजट सत्र समय से पहले समाप्त होना और अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होना राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटना है। जहां सरकार ने दावा किया कि सभी मुद्दों पर चर्चा हुई और विपक्ष ने सहयोग किया, वहीं विपक्ष ने इसे जनहित से भागने के प्रयास के रूप में देखा।

यह घटना यह भी दर्शाती है कि विधानसभा में कार्यवाही केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसमें सभी दलों की सक्रिय भागीदारी और जवाबदेही आवश्यक है। अब जनता की निगाह अगले सत्र और आगामी विधायी कार्यों पर टिकी हुई है, जिसमें यह देखा जाएगा कि सरकार और विपक्ष दोनों अपने दावों और आरोपों को कैसे संभालते हैं।

 

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