MP News : मध्य प्रदेश की तीन प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं को केंद्र सरकार के कमांड क्षेत्र विकास और आधुनिकीकरण (MCAD) कार्यक्रम के तहत शामिल किया गया है। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के अंतर्गत केंद्र-प्रवर्तित उपयोजना के रूप में कार्यान्वित किया जाएगा। इन परियोजनाओं का मॉडल पूरे देश के अन्य राज्यों में लागू किया जाएगा, ताकि किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा और जल संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
केंद्र सरकार के जलशक्ति मंत्रालय, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग ने राज्य द्वारा प्रस्तुत परियोजनाओं को MCAD फेस-1 के तहत मंजूरी दी है। इसका मुख्य उद्देश्य सिंचाई के लिए उपलब्ध जल संसाधनों का सही और कुशल उपयोग करना है।
एंपावर्ड कमेटी की बैठक में मिली मंजूरी
केंद्र सरकार की एंपावर्ड कमेटी की दूसरी बैठक में मध्य प्रदेश की तीन परियोजनाओं को MCAD फेस-1 के तहत लागू करने की अनुमति दी गई। इस कार्यक्रम के माध्यम से राज्य और जिला स्तर पर क्रियान्वयन समितियों का गठन किया जाएगा।
राज्य सरकार ने राज्य परियोजना प्रबंधन इकाई (SPMU) का गठन किया है। इस इकाई के अध्यक्ष जल संसाधन विभाग के सचिव होंगे। इसके सदस्य होंगे:
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कमांड क्षेत्र विकास आयुक्त
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प्रमुख अभियंता जल संसाधन
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नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (NVDA) के मुख्य अभियंता
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कृषि, उद्यानिकी, हाइड्रोलॉजी और सिचाई प्रबंधन के निदेशक
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योजना से संबंधित अधीक्षण यंत्री और कार्यपालन यंत्री
मुख्य अभियंता जल संसाधन विभाग इस समिति के सदस्य सचिव होंगे।
जिले स्तर पर क्रियान्वयन समितियाँ
एमसीएडी के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सभी जिलों में जिला स्तरीय क्रियान्वयन समितियाँ बनाई जाएंगी।
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इन समितियों के अध्यक्ष जिले के कलेक्टर होंगे।
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सदस्य सचिव के रूप में जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभाग के कार्यपालन यंत्री होंगे।
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अन्य सदस्य होंगे: CEO जिला पंचायत, कृषि एवं उद्यानिकी के उपसंचालक, जिला पंचायत सदस्य, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, जल उपभोक्ता सोसायटी के प्रतिनिधि और महिला सदस्य।
इन समितियों का उद्देश्य सामुदायिक सिंचाई प्रणाली को लागू करना और किसानों को अपनी सिंचाई प्रणालियों के स्वामित्व व प्रबंधन में सशक्त बनाना है।
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इनोवेशन और तकनीकी समाधान
राज्य परियोजना प्रबंधन इकाई राज्य स्तरीय संचालन समिति से प्राप्त नीतिगत निर्देशों और सुझावों के आधार पर योजना का क्रियान्वयन करेगी। इसके तहत मॉडल स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोजीजर बी-5 (SOP B-5) के अनुसार जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
इसमें जल विज्ञान, इंजीनियरिंग और कृषि विशेषज्ञों का सहयोग लिया जाएगा। किसानों की सहभागिता और क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
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किसानों के लिए जल प्रबंधन प्रशिक्षण
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मृदा संरक्षण तकनीकें
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फसल विविधीकरण और उत्पादकता बढ़ाने के प्रशिक्षण सत्र
इस पहल का उद्देश्य किसानों को उनकी सिंचाई प्रणालियों के स्वामित्व में सशक्त बनाना और सतत खेती के लिए तैयार करना है।
एमसीएडी कार्यक्रम के लाभ
एमसीएडी कार्यक्रम से किसानों को कई लाभ होंगे:
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उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग
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फसल उत्पादकता में वृद्धि
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किसानों को सामुदायिक सिंचाई प्रणाली के तहत स्वामित्व और अधिकार
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जिले और राज्य स्तर पर समन्वित जल प्रबंधन और योजना निर्माण
यह योजना केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि उत्पादन और जल संरक्षण में सुधार लाने वाली एक व्यापक पहल है।
राज्य और केंद्र का समन्वय
इस कार्यक्रम में राज्य और केंद्र सरकार का समन्वय मजबूत होगा। परियोजनाओं का समयबद्ध कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा और सभी जिलों में किसानों की भागीदारी होगी।
एमसीएडी कार्यक्रम के तहत लागू परियोजनाएँ देशभर के अन्य राज्यों के लिए मॉडल साबित हो सकती हैं। इससे किसानों की आय बढ़ेगी, जल प्रबंधन सुधार होगा और सतत खेती को बढ़ावा मिलेगा।
भविष्य की योजना
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जल संसाधन और कृषि विभाग के बीच मजबूत समन्वय
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किसानों की सक्रिय भागीदारी
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जल संरक्षण और सिंचाई प्रणालियों में टेक्नोलॉजी और इनोवेशन का प्रयोग
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फसल विविधीकरण और उत्पादकता बढ़ाने के प्रशिक्षण सत्र
इन पहलों से मध्य प्रदेश और देश के अन्य राज्यों में जल प्रबंधन और सिंचाई का एक नया मॉडल तैयार होगा।
प्रमुख बातें
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MP की तीन सिंचाई परियोजनाएँ MCAD फेस-1 में शामिल
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राज्य और जिले स्तर पर समिति गठन
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SOP B-5 के अनुसार जल प्रबंधन और प्रशिक्षण
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सामुदायिक सिंचाई प्रणाली और किसानों को स्वामित्व
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पूरे देश में इन परियोजनाओं का मॉडल आधारित क्रियान्वयन

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