इंदौर में मुस्लिम कर्मचारियों को हटाने के फरमान पर बवाल, दिग्विजय सिंह बोले – “एकलव्य गौड़ के खिलाफ FIR कराऊँगा”
इंदौर, 27 सितंबर 2025।
मध्यप्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर का सीतलामाता कपड़ा बाजार इन दिनों गहरे विवाद में है। आरोप है कि बीजेपी विधायक मालिनी लक्ष्मण सिंह गौड़ के बेटे एकलव्य सिंह गौड़ ने बाजार के व्यापारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने मुस्लिम कर्मचारियों को 25 सितंबर तक हटा दें और मुस्लिम व्यापारियों को दो महीने के भीतर किराए की दुकानें खाली करने को कहें। इस कथित फरमान ने न सिर्फ शहर बल्कि प्रदेश की राजनीति में भी तूफान खड़ा कर दिया है।
दिग्विजय सिंह का हमला
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इसे धार्मिक भेदभाव और संविधान के खिलाफ बताया है। उन्होंने कहा कि यदि अब तक इस मामले में पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की है तो वे स्वयं थाने जाकर शिकायत करेंगे।
“क्या सिर्फ मुसलमान होना अपराध है? क्या उन्हें काम करने, रोजगार पाने और परिवार पालने का अधिकार नहीं है? बीजेपी विधायक के पुत्र का यह बयान सीधा-सीधा भारतीय संविधान की धज्जियाँ उड़ाता है। यदि पुलिस ने अब तक FIR दर्ज नहीं की है तो मैं खुद जाकर FIR दर्ज कराऊँगा।”
— दिग्विजय सिंह, कांग्रेस नेता
कांग्रेस का आरोप – “सांप्रदायिक कटुता फैलाने की कोशिश”
राज्य कांग्रेस अध्यक्ष जितु पाटवारी और अन्य नेताओं ने भी इस घटना को “संवैधानिक मूल्यों पर हमला” करार देते हुए इंदौर के डिवीजन कमिश्नर से मुलाकात की और मांग की कि एकलव्य गौड़ के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बीजेपी योजनाबद्ध तरीके से सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रही है।
बाजार में असर – 50 से अधिक कर्मचारी बेरोजगार
स्थानीय व्यापारियों और कर्मचारियों का कहना है कि इस कथित निर्देश के बाद बाजार में काम करने वाले कई मुस्लिम कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया गया है। अनुमान है कि अब तक कम से कम 50 से अधिक लोग अपनी रोज़ी-रोटी खो चुके हैं।
कई मुस्लिम दुकानदारों को भी मौखिक रूप से कहा गया कि वे दो महीने में दुकानें खाली करें। इसका विरोध करते हुए व्यापारियों और कर्मचारियों ने राजवाड़ा तक पैदल मार्च निकाला और नारेबाजी की—”हमारा गुनाह सिर्फ इतना है कि हम मुसलमान हैं।”
प्रशासन की स्थिति – “शिकायत के बिना कार्रवाई नहीं”
इंदौर पुलिस कमिश्नर ने कहा कि अब तक इस मामले में उनके पास कोई आधिकारिक शिकायत या FIR दर्ज नहीं हुई है।
ज़ोन-4 के DCP का कहना है कि उनके पास एकलव्य गौड़ के इस कथित बयान का कोई वीडियो या लिखित आदेश उपलब्ध नहीं है। इसलिए फिलहाल केस दर्ज करना संभव नहीं है। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि पीड़ित पक्ष औपचारिक शिकायत करता है तो कानूनन कार्रवाई की जाएगी।
एकलव्य गौड़ का पक्ष
एकलव्य गौड़ का कहना है कि उन्होंने केवल “अनुरोध” किया था कि ऐसे लोगों को हटाया जाए जिनकी “जिहादी मानसिकता” है, ताकि ‘लव जिहाद’ जैसी घटनाओं पर रोक लग सके। लेकिन उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है।
कानूनी पेंच
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि यह आदेश वास्तव में धर्म के आधार पर किसी समुदाय को रोजगार या व्यापार से वंचित करने का है, तो यह भारतीय संविधान के कई अनुच्छेदों—अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 15 (धार्मिक भेदभाव पर रोक), अनुच्छेद 16 (रोजगार में समान अवसर) और अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता)—का उल्लंघन है।
साथ ही, भारतीय दंड संहिता की धारा 153-A (सांप्रदायिक सौहार्द भंग करना) और अन्य संबंधित धाराएँ भी लागू हो सकती हैं।
निष्कर्ष
इंदौर का यह विवाद अब सिर्फ एक बाजार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक और संवैधानिक बहस का मुद्दा बन गया है।
कांग्रेस जहां इसे बीजेपी की “सांप्रदायिक राजनीति” बता रही है, वहीं बीजेपी खेमे में चुप्पी है। पुलिस कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है, और सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या एकलव्य गौड़ के खिलाफ वाकई FIR दर्ज होती है या मामला राजनीति की गहमागहमी में दब जाता है।

