ग्राम राजगढ़ (बागली) में मानवता की दीपावली: “घर-घर दिवाली, हर घर दिवाली”
गांव राजगढ़ (बागली) में मनाया गया सेवा-स्नेह का पर्व
मध्य प्रदेश के बागली क्षेत्र के समीप स्थित ग्राम राजगढ़ में इस वर्ष एक प्रेरणादायी दिवाली कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसे संचालित किया गया था भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट द्वारा। “घर-घर दिवाली, हर घर दिवाली” के संकल्प के अंतर्गत यह उत्सव बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और ग्रामीण-समुदाय के लिए समर्पित रहा। यह वही गांव है जिसे ट्रस्ट ने हाल ही में गोद लिया है, और जहाँ संगठन सेवा एवं विकास के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ा रहा है।
शुरुआत एवं आदर-समारोह
कार्यक्रम की शुरुआत मंदिर परिसर में माँ भारती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से की गई। इसके पश्चात् ग्राम के वरिष्ठ नागरिकों को दुपट्टा ओढ़ा कर सम्मानित किया गया तथा एक माताजी को साड़ी भेंट कर आदरपूर्वक सम्मान प्रदान किया गया। यह एक प्रतीक-कार्य था कि सेवा-प्रेम और मानवीय संवेदना ही असल दिवाली की रोशनी है।
बच्चों के लिए आनंद-उत्सव
इसके बाद बच्चों के लिए एक रंग-बिरंगा और उल्लास-पूर्ण कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम में निम्नलिखित प्रमुख क्रियाएँ संपन्न हुईं:
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घर का बना भोजन एवं मिठाई वितरण।
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रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन, जिसमें ग्रामीण-बच्चों ने बढ़चढ़ कर भाग लिया।
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प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त बच्चों को पुरस्कार वितरण।
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सभी बच्चों में नए कपड़े वितरित किए गए।
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अंत में फुलझड़ी व पटाखों के साथ दीपावली उत्सव मनाया गया।
इन गतिविधियों के माध्यम से ट्रस्ट ने यह संदेश दिया कि सामाजिक-समरसता, बच्चों की खुशियाँ और ग्राम-समुदाय का सशक्त होना ही असली उत्सव है।
संदेश-वाक्य और उद्देश्य
ट्रस्ट ने इस अवसर पर इस भाव-वाक्य को प्रमुखता से रखा —
“सोने-चांदी की चमक नहीं, असली चमक तो अपनों के चेहरों की मुस्कान में है—और यही सच्चा कमाया हुआ धन है। जब हर गांव खुशहाल होगा, तभी भारत समृद्ध और सशक्त बनेगा। यही हमारी दीपावली का सच्चा उद्देश्य है।”
यह संदेश इस बात को रेखांकित करता है कि सेवा-कार्य सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में स्थायी सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम है।
कार्यक्रम का संचालन एवं भूमिका
इस सेवा-दीपावली कार्यक्रम का सफल संचालन हुआ श्रीमती शोभा गोस्वामी (उज्जैन संभाग अध्यक्ष) के मार्गदर्शन में। साथ ही कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी रही किरण देवड़ा, ग्राम के सरपंच श्री राम प्रसाद जाटवा, एवं अनेक स्थानीय कार्यकर्ताओं एवं ग्रामीणों की।
साथ ही ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुनील सिंह यादव जी का संदेश भी कार्यक्रम का उत्साह-स्तर बढ़ाने वाला रहा। उन्होंने कहा —
“दीपावली केवल रोशनी का त्यौहार नहीं, यह प्रेम, सहयोग और मानवीय संवेदना का त्यौहार है। ट्रस्ट द्वारा ग्राम राजगढ़ में मनाई गई यह सेवा-दीपावली समाज के लिए प्रेरणादायक पहल है। जब हम अपने गांव, अपने लोगों की खुशियों के लिए कार्य करते हैं—तभी सच्चे अर्थों में राष्ट्र सेवा होती है।”
ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारी—शिवम तिवारी, कृष्णा यादव, मनीष गुप्ता, संतोष सिंह पवार, डॉ प्रेम कुमार वैद्य, श्रीमती सौंपा चटर्जी, श्रीमती अनीता दुबे, कु. आस्था जैन, श्रीमती मधु शर्मा, जीवनलाल जैन, भावेश नाहर ने भी इस आयोजन में सहयोग एवं उत्साह व्यक्त किया है।
“घर-घर दिवाली, हर घर दिवाली” – एक संकल्प
यह कार्यक्रम इस दिशा-निर्देश को उभारने का प्रयास था कि दिवाली सिर्फ अपने घर तक सीमित न रह जाए, बल्कि हर घर में उजाला, हर गांव में समृद्धि हो। ट्रस्ट ने इस संकल्प के साथ ग्राम-राजगढ़ के नागरिकों के बीच सेवा-भाव, उत्सव-जोश और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दिया। गोद लेने के बाद यह गांव ट्रस्ट की योजनाओं और सामाजिक सक्रियताओं का केंद्र बन चुका है, जिससे न सिर्फ उत्सव-वातावरण बेहतर हुआ है बल्कि सामाजिक जुड़ाव और सामुदायिक सशक्तिकरण का माहौल भी पनपा है।
ग्रामीण-सेवा का सतत क्रम
यह सिर्फ एक उत्सव आयोजन नहीं था, बल्कि उस सतत सामाजिक-दायित्व का प्रतीक बन गया है, जो ट्रस्ट ने ग्राम-राजगढ़ में स्थापित किया है। गोद-लेने के बाद से ट्रस्ट द्वारा चलाए जा रहे सेवा-कार्य जैसे- शिक्षा-समर्थन, भोजन-वितरण (रोटी बैंक), स्वास्थ्य-जागरूकता आदि यहाँ निरंतर जारी हैं। इस तरह यह दीपावली कार्यक्रम उस सक्रिय सेवा-यात्रा का उत्सव स्वरूप था।
प्रभाव और भविष्य की दिशा
इस आयोजन से निम्नलिखित सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है:
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ग्रामीण-समुदाय का उत्सव में सशक्त भागीदारी बढ़ी एवं बच्चों-बुजुर्गों के बीच खुशी और आत्म-सम्मान का भाव जागृत हुआ।
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“घर-घर दिवाली” जैसे रचनात्मक संकल्प ने ग्राम-वासियों में उत्सव को सर्वसमावेशी बनाने का संदेश दिया।
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ट्रस्ट-कार्यकर्ताओं और स्थानीय ग्रामीणों के बीच बेहतर संवाद एवं भरोसा बना, जिससे आने वाले विकास-योजनाओं के लिए रास्ता सहज हुआ।
भविष्य में ट्रस्ट द्वारा इस तरह के आयोजन को नियमित रूप से विस्तारित करने एवं अन्य गांवों में भी “हर घर दिवाली” की अवधारणा को ले जाने की योजना बनाई जा रही है। ग्रामीण विकास एवं सामुदायिक-जुड़ाव को ध्यान में रखते हुए आगामी वर्षों में शिक्षा-उन्नति, स्वास्थ्य-प्रोग्राम, स्वच्छता और पोषण-वितरण जैसे कार्य और गहराई से किये जाने हैं।
इस प्रकार, ग्राम राजगढ़ (बागली) में “मानवता की दीपावली” नामक यह आयोजन दर्शाता है कि किस प्रकार उत्सव-परंपरा को सामाजिक-सेवा के साथ जोड़ा जा सकता है। “घर-घर दिवाली, हर घर दिवाली” का संकल्प न केवल एक वाक्य है, बल्कि समुदाय-बदलाव का प्रेरक मंतर है। भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट का यह कदम यह प्रमाण है कि सामाजिक-सुधार और उत्सव-संस्कृति साथ-साथ चल सकती है, और छोटे-छोटे प्रयासों से ग्रामीण-भारत में बड़ी सकारात्मक लहर बनाई जा सकती है।
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