गौ-हद धाम नगरकोट परिक्रमा की तैयारियों को मिला नया संकल्प
राम-जानकी मंदिर में समाजसेवियों की महत्वपूर्ण बैठक, शरद पूर्णिमा पर परिक्रमा आयोजित करने का निर्णय; अब हर शनिवार होगी साप्ताहिक बैठक
गोहद। जिला ब्यूरो चीफ अभिषेक शर्मा। ब्रज क्षेत्र गौ-हद धाम की धार्मिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक पहचान को व्यापक स्तर पर स्थापित करने और प्रस्तावित गौ-हद धाम नगरकोट परिक्रमा को जनअभियान का स्वरूप देने की दिशा में तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी उद्देश्य से मंगलवार को सदर बाजार स्थित राम-जानकी मंदिर में समाजसेवियों, धार्मिक क्षेत्र से जुड़े लोगों और अभियान के कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में नगरकोट परिक्रमा की रूपरेखा, जनभागीदारी और आयोजन की व्यवस्थाओं को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर गौ-हद धाम नगरकोट परिक्रमा आयोजित की जाएगी। इस निर्णय के बाद अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है। बैठक में मौजूद समाजसेवियों ने कहा कि परिक्रमा को केवल धार्मिक आयोजन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह गोहद की प्राचीन विरासत, धार्मिक आस्था और ब्रज संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।
धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का प्रयास
गोहद क्षेत्र की पहचान लंबे समय से धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ी रही है। अभियान से जुड़े लोगों का मानना है कि क्षेत्र की इस विरासत को व्यवस्थित रूप से सामने लाने और नई पीढ़ी को इससे जोड़ने की आवश्यकता है।
बैठक में कहा गया कि गौ-हद धाम की परिकल्पना इसी उद्देश्य से आगे बढ़ाई जा रही है। नगरकोट परिक्रमा के माध्यम से क्षेत्र के धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों को एक व्यापक धार्मिक-सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
समाजसेवियों ने कहा कि जब स्थानीय नागरिक अपनी विरासत को पहचानेंगे और उससे भावनात्मक रूप से जुड़ेंगे, तभी उसके संरक्षण की दिशा में मजबूत प्रयास संभव होंगे। इसी सोच के साथ अभियान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
शरद पूर्णिमा पर होगी नगरकोट परिक्रमा
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय शरद पूर्णिमा के अवसर पर नगरकोट परिक्रमा आयोजित करने का रहा। प्रस्तावित परिक्रमा को भव्य और व्यवस्थित बनाने के लिए आगामी दिनों में विभिन्न स्तरों पर तैयारियां की जाएंगी।
परिक्रमा के मार्ग, धार्मिक स्थलों से समन्वय, श्रद्धालुओं की सुविधा, स्वयंसेवकों की तैनाती, प्रचार-प्रसार और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर चरणबद्ध तरीके से काम करने की योजना बनाई जा रही है।
अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि परिक्रमा में अधिक से अधिक स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए नगर के विभिन्न सामाजिक वर्गों से संपर्क किया जाएगा।
हर शनिवार होगी नियमित बैठक
अभियान को निरंतर गति देने के लिए बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय यह भी लिया गया कि अब हर शनिवार नियमित साप्ताहिक बैठक आयोजित की जाएगी। इन बैठकों में अभियान की प्रगति की समीक्षा करने के साथ आगामी कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
साप्ताहिक बैठकों में परिक्रमा की तैयारियों से जुड़े अलग-अलग विषयों पर चर्चा होगी। इनमें परिक्रमा मार्ग की व्यवस्था, मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों के प्रबंधन से समन्वय, संतजनों का मार्गदर्शन, जनसंपर्क अभियान, स्वयंसेवक व्यवस्था, प्रचार-प्रसार और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े विषय प्रमुख रहेंगे।
बैठक के माध्यम से यह प्रयास किया जाएगा कि आयोजन से संबंधित प्रत्येक जिम्मेदारी समय रहते तय हो और परिक्रमा के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
अभियान किसी एक व्यक्ति या संगठन तक सीमित नहीं
बैठक में समाजसेवियों ने स्पष्ट किया कि गौ-हद धाम अभियान किसी एक व्यक्ति, संस्था या संगठन का अभियान नहीं होना चाहिए। इसे गोहद के प्रत्येक नागरिक की साझा भावना और जनभागीदारी का स्वरूप देने की आवश्यकता है।
इसी उद्देश्य से समाज के विभिन्न वर्गों को अभियान से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है। संत समाज, युवा, मातृशक्ति, व्यापारी, समाजसेवी, धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि और प्रबुद्ध नागरिकों को अभियान में सक्रिय भूमिका देने पर जोर दिया गया।
कार्यकर्ताओं का मानना है कि जब अभियान में समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी होगी, तब गौ-हद धाम की परिकल्पना को अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सकेगा।
युवाओं और नई पीढ़ी को जोड़ने पर जोर
बैठक में इस बात पर भी विचार किया गया कि क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को केवल वर्तमान पीढ़ी तक सीमित न रखा जाए। युवाओं और बच्चों को भी गोहद की ऐतिहासिक एवं धार्मिक पहचान से परिचित कराने की जरूरत है।
अभियान से जुड़े लोगों के अनुसार, नगरकोट परिक्रमा जैसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़ने का अवसर मिलेगा। युवाओं को स्वयंसेवक के रूप में जोड़कर उन्हें आयोजन की विभिन्न जिम्मेदारियां देने पर भी विचार किया जा रहा है।
धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं को मिल सकती है दिशा
गौ-हद धाम अभियान को केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित रखने के बजाय क्षेत्र के विकास और धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं से जोड़ने पर भी चर्चा हुई।
समाजसेवियों का कहना है कि यदि गोहद के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को व्यवस्थित रूप से पहचान दिलाई जाए तथा श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाएं विकसित हों, तो क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को भी गति मिलने की संभावना है।
हालांकि इसके लिए लंबे समय तक निरंतर प्रयास और विभिन्न स्तरों पर समन्वय की आवश्यकता होगी।

“विचार से संकल्प और संकल्प से जनभागीदारी”
बैठक में उपस्थित लोगों ने कहा कि किसी भी बड़े अभियान की शुरुआत एक विचार से होती है, लेकिन उसे सफल बनाने के लिए संकल्प और जनभागीदारी आवश्यक है। गौ-हद धाम अभियान को भी इसी भावना के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।
समाजसेवियों ने कहा कि गोहद की पहचान केवल वर्तमान समय की नहीं है, बल्कि इसके पीछे धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं की लंबी विरासत है। इस विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
नगरकोट परिक्रमा को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत माना जा रहा है। शरद पूर्णिमा पर प्रस्तावित परिक्रमा को लेकर अभी से तैयारियां शुरू करने और प्रत्येक शनिवार बैठक के माध्यम से कार्यों की समीक्षा करने का निर्णय इसी उद्देश्य से लिया गया है।
जनभागीदारी से बनेगा अभियान मजबूत
अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं ने गोहदवासियों से अपील की कि वे इस पहल को केवल एक धार्मिक कार्यक्रम न मानें, बल्कि इसे अपनी मातृभूमि और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने के अवसर के रूप में देखें।
समाज के लोगों से आग्रह किया गया कि वे अभियान से जुड़कर अपने सुझाव दें, तैयारियों में सहयोग करें और नगरकोट परिक्रमा को सफल बनाने में अपनी भूमिका निभाएं।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि समाज के सभी वर्ग एकजुट होकर आगे आते हैं तो गौ-हद धाम की परिकल्पना को व्यापक रूप दिया जा सकता है और गोहद को धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान के नए आयाम से जोड़ा जा सकता है।
आस्था, विरासत और संस्कृति को जोड़ने का संकल्प
राम-जानकी मंदिर में आयोजित बैठक का संदेश स्पष्ट रहा कि गोहद की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। शरद पूर्णिमा पर प्रस्तावित नगरकोट परिक्रमा इस अभियान का महत्वपूर्ण पड़ाव होगी।
अब प्रत्येक शनिवार होने वाली बैठकों में तैयारियों को गति दी जाएगी और जनसंपर्क के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को अभियान से जोड़ा जाएगा।
अभियान से जुड़े लोगों ने एक स्वर में संकल्प व्यक्त किया—
“अपनी मातृभूमि से जुड़ें, अपनी विरासत को पहचानें और गौ-हद धाम के निर्माण के संकल्प में सहभागी बनें।”
गौ-हद धाम अभियान अब नियमित बैठकों, सामाजिक सहभागिता और जनसंपर्क के माध्यम से आगे बढ़ेगा। आयोजकों को उम्मीद है कि शरद पूर्णिमा पर आयोजित होने वाली नगरकोट परिक्रमा गोहद की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का व्यापक संदेश देगी।
गोहद बने—गौ-हद धाम।
आस्था • विरासत • संस्कृति • जनभागीदारी
