Indore के एमवाय अस्पताल में शुरू हुई फ्रोजन सेक्शन सुविधा, अब 30 मिनट में कैंसर की पुष्टि संभव
मध्यप्रदेश के Indore स्थित प्रमुख सरकारी मेडिकल संस्थान एमवाय अस्पताल इंदौर में मरीजों के लिए एक बड़ी और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधा शुरू की गई है। अस्पताल के सर्जरी विभाग में अब फ्रोजन सेक्शन लैब के माध्यम से ट्यूमर में कैंसर की मौजूदगी की जांच मात्र 20 से 30 मिनट में की जा सकेगी। यह तकनीक चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव मानी जा रही है, क्योंकि पहले इस प्रक्रिया में 2 से 3 दिन तक का समय लग जाता था।
इस नई सुविधा के शुरू होने के बाद अब डॉक्टर ऑपरेशन के दौरान ही यह तय कर पाएंगे कि संबंधित टिशू कैंसरयुक्त है या नहीं। इससे न केवल इलाज की गति बढ़ेगी, बल्कि मरीज को बार-बार ऑपरेशन कराने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। सर्जरी अधिक सटीक और प्रभावी हो सकेगी, जिससे मरीजों की जान बचाने में भी मदद मिलेगी।
फ्रोजन सेक्शन तकनीक क्या है?
फ्रोजन सेक्शन एक अत्याधुनिक पैथोलॉजी तकनीक है, जिसका उपयोग ऑपरेशन के दौरान ट्यूमर या संदिग्ध टिशू की तुरंत जांच के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया में ऑपरेशन के दौरान निकाले गए टिशू को तुरंत माइनस 10 डिग्री सेल्सियस या उससे कम तापमान पर जमाया जाता है।
इसके बाद उस टिशू को बेहद पतली स्लाइड में काटकर माइक्रोस्कोप के जरिए जांच की जाती है। पैथोलॉजी विशेषज्ञ इस स्लाइड का अध्ययन कर यह पता लगाते हैं कि उसमें कैंसर कोशिकाएं मौजूद हैं या नहीं।
इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 20 से 30 मिनट का समय लगता है, जिसके बाद डॉक्टरों को तुरंत रिपोर्ट मिल जाती है। इसी आधार पर सर्जन ऑपरेशन को आगे बढ़ाने या बदलने का निर्णय लेते हैं।
मरीजों को क्या फायदा मिलेगा?
इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ उन मरीजों को होगा जिनके शरीर में गांठ (ट्यूमर) पाई जाती है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं होता कि वह कैंसर है या नहीं। पहले ऐसे मामलों में डॉक्टर बायोप्सी रिपोर्ट का इंतजार करते थे।
अब तक की प्रक्रिया में:
- ट्यूमर का नमूना लैब भेजा जाता था
- रिपोर्ट आने में 2 से 3 दिन लगते थे
- तब तक सर्जरी या तो टाल दी जाती थी
- या अधूरी छोड़नी पड़ती थी
- कई मामलों में मरीज को दोबारा ऑपरेशन कराना पड़ता था
लेकिन अब फ्रोजन सेक्शन तकनीक से ऑपरेशन टेबल पर ही तुरंत निर्णय लिया जा सकेगा। इससे मरीजों का समय बचेगा, जोखिम कम होगा और इलाज तेज हो जाएगा।
ऑपरेशन के दौरान सफल उपयोग
हाल ही में अस्पताल में इस तकनीक का सफल उपयोग किया गया। गॉल ब्लैडर ट्यूमर से पीड़ित दो मरीजों का ऑपरेशन किया गया, जिसमें फ्रोजन सेक्शन का उपयोग किया गया।
एक मरीज के मामले में:
- पहले सीटी स्कैन में ट्यूमर का संदेह था
- ऑपरेशन के दौरान तीन अलग-अलग लिंफ नोड की जांच की गई
- लगभग 25 मिनट में कैंसर की पुष्टि कर दी गई
- इसके बाद सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया गया
इसी तरह दूसरे मरीज के मामले में भी ट्यूमर की जांच ऑपरेशन के दौरान ही की गई और तुरंत निर्णय लेकर इलाज किया गया।
इस तकनीक के आने से सर्जनों को वास्तविक समय में निर्णय लेने में मदद मिल रही है, जिससे इलाज अधिक सुरक्षित और प्रभावी बन रहा है।
किन अंगों के ट्यूमर की जांच संभव है?
यह तकनीक शरीर के कई हिस्सों में पाए जाने वाले ट्यूमर की जांच के लिए उपयोगी है। इसमें शामिल हैं:
- पेट से संबंधित कैंसर (लिवर, आंतें, पैंक्रियाज)
- स्तन कैंसर
- गर्दन के ट्यूमर
- हाथ और पैर के सॉफ्ट टिशू ट्यूमर
- महिलाओं में गर्भाशय और अंडाशय के ट्यूमर
इससे डॉक्टर विभिन्न प्रकार के कैंसर की पहचान तुरंत कर सकते हैं और सही समय पर सही इलाज शुरू किया जा सकता है।
मरीजों के लिए आर्थिक और चिकित्सकीय राहत
इस सुविधा का एक और बड़ा फायदा यह है कि यह मरीजों के खर्च को भी कम करती है। डॉ. अरविंद घनघोरिया के अनुसार, यह तकनीक मरीजों के लिए काफी फायदेमंद है क्योंकि:
- निजी अस्पतालों में यह जांच 10,000 से 15,000 रुपये तक खर्च कर सकती है
- लेकिन सरकारी अस्पताल में यह सुविधा पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध है
इससे गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। अब उन्हें महंगे टेस्ट और लंबे इंतजार की परेशानी से नहीं गुजरना पड़ेगा।
कैंसर सर्जरी में बड़ा बदलाव
फ्रोजन सेक्शन तकनीक के आने से कैंसर सर्जरी के तरीके में बड़ा बदलाव आया है। अब डॉक्टर ऑपरेशन के दौरान ही:
- ट्यूमर की प्रकृति का पता लगा सकते हैं
- कैंसर की पुष्टि तुरंत कर सकते हैं
- जरूरत पड़ने पर सर्जरी को उसी अनुसार आगे बढ़ा सकते हैं
- और पूरी तरह सुरक्षित ऑपरेशन कर सकते हैं
इससे मरीजों की रिकवरी भी तेज होगी और दोबारा ऑपरेशन की जरूरत काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण प्रगति
एमवाय अस्पताल इंदौर में फ्रोजन सेक्शन लैब की शुरुआत को मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह सुविधा सरकारी अस्पतालों में आधुनिक तकनीक के उपयोग का एक उदाहरण है।
इससे न केवल इंदौर बल्कि पूरे प्रदेश के मरीजों को लाभ मिलेगा। अब गंभीर बीमारियों की पहचान तेजी से हो सकेगी और समय पर इलाज संभव होगा।
विशेषज्ञों की राय
मेडिकल विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक कैंसर इलाज में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। पहले जहां मरीजों को रिपोर्ट के लिए इंतजार करना पड़ता था, वहीं अब ऑपरेशन के दौरान ही निर्णय संभव होगा।
इससे:
- इलाज की गुणवत्ता बढ़ेगी
- मरीजों का समय बचेगा
- सर्जरी अधिक सटीक होगी
- और मृत्यु दर में कमी आ सकती है
निष्कर्ष
फ्रोजन सेक्शन तकनीक के शुरू होने से एमवाय अस्पताल इंदौर ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाया है। अब ट्यूमर और कैंसर की जांच मिनटों में संभव होगी, जिससे मरीजों को तेज, सटीक और प्रभावी इलाज मिल सकेगा।
यह सुविधा न केवल चिकित्सा क्षेत्र में सुधार लाएगी, बल्कि मरीजों के जीवन को भी सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
