Damoh News: गौवंश संरक्षण और सुगम यातायात के लिए ‘सड़क से गौशाला की ओर’ अभियान
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने श्रीराम गौशाला हटा का किया निरीक्षण, एक माह में निराश्रित गौवंश को गौशालाओं तक पहुंचाने का लक्ष्य
कोमल अहिरवार, जिला ब्यूरो चीफ
दमोह/हटा। जिले में निराश्रित एवं असहाय गौवंश के संरक्षण और सड़कों पर यातायात को सुगम बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने ‘सड़क से गौशाला की ओर’ अभियान प्रारंभ किया है। सेवा संकल्प अभियान एवं मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के अंतर्गत कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने हटा स्थित श्रीराम गौशाला का निरीक्षण किया। उन्होंने गौशाला में उपलब्ध सुविधाओं, गौवंश के संरक्षण, चारे-पानी, देखरेख एवं अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने गौशाला संचालकों और सेवा कार्य से जुड़े लोगों से चर्चा की। उन्होंने गौवंश की संख्या, उनके स्वास्थ्य, उपलब्ध स्थान और नियमित देखरेख के संबंध में जानकारी प्राप्त की। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि गौशालाओं में पहुंचाए जाने वाले निराश्रित गौवंश की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा जाए।
गौशाला की व्यवस्थाओं पर जताया संतोष
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने निरीक्षण के बाद कहा कि श्रीराम गौशाला में गौवंश के लिए अच्छी व्यवस्थाएं पाई गई हैं। यहां सेवा कार्य से जुड़े लोग समर्पण और सेवाभाव के साथ काम कर रहे हैं। वे गौमाता के संरक्षण और देखरेख से संबंधित अपने दायित्वों का पूरी जिम्मेदारी से निर्वहन कर रहे हैं।
उन्होंने गौशाला से जुड़े लोगों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि गौवंश का संरक्षण केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। इस कार्य में समाज, स्वयंसेवी संगठनों, गौसेवकों और आम नागरिकों की सहभागिता भी आवश्यक है। सामूहिक प्रयास से ही निराश्रित गौवंश को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया जा सकता है।
सड़कों पर नहीं भटकेगा निराश्रित गौवंश
कलेक्टर ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा ‘सड़क से गौशाला की ओर’ अभियान चलाया जा रहा है। इसका प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी असहाय और निराश्रित गौवंश सड़कों पर बैठने या भटकने के लिए मजबूर न हो। सड़कों पर मिलने वाले ऐसे गौवंश की पहचान कर उसे शासन द्वारा संचालित अथवा मान्यता प्राप्त गौशालाओं में भेजा जाएगा।
गौशालाओं में संबंधित गौवंश को सुरक्षित आश्रय देने के साथ उसके चारे, पानी, उपचार और नियमित देखरेख की व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। प्रशासन द्वारा अभियान को प्रभावी बनाने के लिए स्थानीय निकायों, ग्राम पंचायतों, पशुपालन विभाग एवं गौशाला प्रबंधन के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा।
सड़क दुर्घटनाओं पर लगेगी रोक
कलेक्टर यादव ने कहा कि सड़कों और प्रमुख मार्गों पर गौवंश के बैठने से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। विशेष रूप से रात के समय सड़क पर बैठे पशु कई बार वाहन चालकों को दिखाई नहीं देते, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। इससे वाहन चालक, राहगीर और गौवंश—तीनों की सुरक्षा प्रभावित होती है।
इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने अभियान को प्रभावी रूप से संचालित करने का निर्णय लिया है। सड़कों से गौवंश को हटाकर गौशालाओं में पहुंचाने से दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी। इसके साथ ही यातायात में आने वाले अवरोधों को दूर कर आवागमन को अधिक सुरक्षित और सुगम बनाया जा सकेगा।
एक माह के भीतर कार्रवाई का लक्ष्य
कलेक्टर ने कहा कि आगामी एक माह के भीतर सड़कों पर बैठने अथवा विचरण करने वाले निराश्रित गौवंश को गौशालाओं तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए संबंधित विभागों और अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रियता से कार्य करने के निर्देश दिए जाएंगे।
प्रशासन की योजना के अनुसार पहले उन स्थानों को चिह्नित किया जाएगा, जहां बड़ी संख्या में गौवंश सड़कों पर बैठता या घूमता दिखाई देता है। प्रमुख सड़कों, बाजारों, नगरीय क्षेत्रों और दुर्घटना संभावित मार्गों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। वहां से गौवंश को सुरक्षित तरीके से गौशालाओं तक पहुंचाने की कार्रवाई की जाएगी।
जनसहयोग से सफल होगा अभियान
जिला प्रशासन ने नागरिकों से भी अभियान में सहयोग करने की अपेक्षा की है। लोगों से अपील की गई है कि वे अपने पालतू पशुओं को सड़कों पर बेसहारा न छोड़ें और निराश्रित गौवंश दिखाई देने पर संबंधित स्थानीय निकाय या प्रशासन को सूचना दें।
‘सड़क से गौशाला की ओर’ अभियान से जहां गौवंश को सुरक्षित आश्रय और संरक्षण मिल सकेगा, वहीं सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं एवं यातायात अवरोधों में कमी आने की उम्मीद है। प्रशासन का कहना है कि विभागीय समन्वय, गौशाला प्रबंधन और जनसहयोग के माध्यम से अभियान को जिलेभर में प्रभावी बनाया जाएगा।
