ग्रेसिम CSR फंड के उपयोग पर उठे सवाल, प्रभावित ग्रामीणों और किसानों को लाभ नहीं मिलने का आरोप
जनसुनवाई में भारतीय किसान यूनियन मंच ने उठाया मामला
संवाददाता: जीवन लाल जैन
ग्रेसिम उद्योग के CSR (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) फंड के उपयोग को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। भारतीय किसान यूनियन मंच के प्रदेश कवि देव सिंह गुर्जर ने जनसुनवाई में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए CSR फंड के वितरण और उपयोग की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
देव सिंह गुर्जर ने आरोप लगाया कि उद्योग से प्रभावित ग्रामीणों और किसानों तक CSR फंड का वास्तविक लाभ नहीं पहुंच पा रहा है। उनका कहना है कि जिस उद्देश्य से CSR राशि का प्रावधान किया गया है, उसके अनुसार इसका उपयोग स्थानीय लोगों के विकास और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए होना चाहिए, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग दिखाई दे रही है।
प्रभावित गांवों और किसानों को प्राथमिकता देने की मांग
भारतीय किसान यूनियन मंच के प्रदेश कवि देव सिंह गुर्जर का कहना है कि किसी भी उद्योग की स्थापना और संचालन का सीधा प्रभाव आसपास के क्षेत्रों पर पड़ता है। उद्योगों के कारण स्थानीय लोगों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जिनमें पर्यावरण, रोजगार, कृषि और सामाजिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे क्षेत्रों के विकास के लिए CSR फंड महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, रोजगार प्रशिक्षण और अन्य जनहित सुविधाओं को मजबूत किया जा सकता है। लेकिन यदि यह राशि प्रभावित क्षेत्रों तक नहीं पहुंचती है तो CSR का मूल उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता।
उन्होंने मांग की कि CSR फंड का सबसे पहले लाभ उन गांवों और किसानों को मिलना चाहिए जो उद्योग की गतिविधियों से सीधे प्रभावित हैं।

अन्य क्षेत्रों में लाभ पहुंचाने का लगाया आरोप
देव सिंह गुर्जर ने आरोप लगाया कि CSR फंड का उपयोग प्रभावित क्षेत्रों के बजाय अन्य स्थानों पर किया जा रहा है। उन्होंने इस बात पर सवाल उठाए कि जब उद्योग से जुड़े प्रभावों को झेलने वाले ग्रामीण और किसान अपनी मूलभूत समस्याओं के समाधान की उम्मीद करते हैं, तो उन्हें योजनाओं का पर्याप्त लाभ क्यों नहीं मिल रहा।
उन्होंने CSR योजनाओं के चयन, राशि के आवंटन और कार्यों के क्रियान्वयन की प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की है। उनका कहना है कि CSR फंड के तहत किए गए कार्यों की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि राशि कहां और किस उद्देश्य से खर्च की गई।
अधिकारियों की भूमिका पर भी उठाए सवाल
भारतीय किसान यूनियन मंच के प्रदेश कवि देव सिंह गुर्जर ने CSR फंड के संचालन को लेकर अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि फंड के उपयोग में अनियमितताएं हो सकती हैं और इसकी जांच आवश्यक है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच के दौरान CSR फंड से जुड़े सभी दस्तावेज, खर्च का विवरण, लाभार्थियों की सूची और किए गए विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति की समीक्षा की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

जनसुनवाई में प्रशासन के सामने रखी मांगें
देव सिंह गुर्जर ने जनसुनवाई के माध्यम से प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि CSR फंड जनता के हित के लिए होता है और इसमें किसी भी प्रकार की अनियमितता स्वीकार नहीं की जा सकती।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि:
- CSR फंड के उपयोग की विस्तृत जांच कराई जाए।
- प्रभावित गांवों और किसानों को प्राथमिकता के आधार पर लाभ दिया जाए।
- फंड से किए गए कार्यों की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
- यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के अधिकारों और हितों की रक्षा करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
CSR फंड का उद्देश्य और महत्व
कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी CSR का उद्देश्य कंपनियों को समाज के विकास में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करना है। बड़ी कंपनियां अपने लाभ का एक हिस्सा सामाजिक विकास कार्यों में खर्च करती हैं।
CSR के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, शिक्षा को बढ़ावा देना, पर्यावरण संरक्षण, कौशल विकास, ग्रामीण विकास और अन्य जनहित कार्य किए जाते हैं।
विशेष रूप से औद्योगिक क्षेत्रों में CSR की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि उद्योगों के आसपास रहने वाले लोगों को विकास योजनाओं से सीधा लाभ मिलने की उम्मीद रहती है।
ग्रामीणों और किसानों की समस्याओं पर ध्यान देने की मांग
भारतीय किसान यूनियन मंच का कहना है कि प्रभावित ग्रामीणों और किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता से सुना जाना चाहिए। उनका मानना है कि उद्योगों के आसपास रहने वाले लोगों को विकास योजनाओं का सबसे अधिक लाभ मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि CSR राशि का सही उपयोग होने से क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर हो सकती हैं और ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार आ सकता है।
पारदर्शिता को लेकर उठे सवाल
CSR फंड के उपयोग में पारदर्शिता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों की मांग रहती है कि कंपनियों द्वारा किए जा रहे CSR कार्यों की जानकारी आम जनता तक पहुंचनी चाहिए।
देव सिंह गुर्जर ने भी इसी तरह की पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि उनके क्षेत्र के विकास के लिए निर्धारित राशि का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है।
निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आएगी वास्तविक स्थिति
फिलहाल CSR फंड को लेकर लगाए गए आरोपों पर प्रशासनिक जांच और कार्रवाई का इंतजार है। निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि CSR राशि का उपयोग निर्धारित नियमों के अनुसार हुआ है या नहीं।
यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि आरोपों में तथ्य नहीं पाए जाते हैं तो स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।
प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद
भारतीय किसान यूनियन मंच ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उचित कदम उठाएगा। संगठन का कहना है कि CSR फंड का उद्देश्य समाज के कमजोर और प्रभावित वर्गों को लाभ पहुंचाना है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की लापरवाही या अनियमितता नहीं होनी चाहिए।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है और CSR फंड के उपयोग को लेकर क्या स्थिति सामने आती है।
