इंदौर सराफा चौपाटी विवाद: महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने दिया हटाने से साफ इंकार
इंदौर: सराफा चौपाटी को लेकर एक बार फिर गर्मी बढ़ गई है। व्यापारी और स्थानीय निवासी लगातार इसके हटाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने इसे इंदौर की पहचान बताते हुए हटाने से साफ इंकार कर दिया।
महापौर के इस कदम को लेकर सवाल यह उठता है कि पिछले साल उनकी ही बनाई समिति ने सराफा चौपाटी को सार्वजनिक सुरक्षा के लिहाज से खतरे में बताया था और अन्य स्थानों पर स्थानांतरित करने का सुझाव दिया था।
समिति ने क्या कहा था?
12 फरवरी 2024 को महापौर द्वारा गठित समिति के अध्यक्ष राजेंद्र राठौर ने अन्य सदस्यों के साथ निरीक्षण और विचार-विमर्श के बाद 27 फरवरी 2024 को अपनी रिपोर्ट नगर निगम को सौंपी थी। समिति ने रिपोर्ट में बताया कि चौपाटी में प्रतिदिन लगभग 200 दुकानें लगती हैं, जिनमें गैस सिलेंडरों का उपयोग होता है। खासकर सप्ताहांत पर बढ़ती भीड़ और महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दुर्घटना और जनहानि की संभावना गंभीर है।
समिति ने सुझाव दिया कि सराफा चौपाटी के इतिहास और प्रसिद्धि को ध्यान में रखते हुए इसे लालबाग, हरसिद्धि, गांधी हॉल परिसर, शांतिपथ जैसे अन्य स्थानों पर स्थानांतरित किया जा सकता है। इस दौरान नगर निगम द्वारा पार्किंग और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा सकती थी।
रहवासियों और बाजार संघों का विरोध
सराफा चौपाटी के कारण आसपास के 35 परिवार और स्थानीय व्यापारियों को रोजाना कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कोयले और गैस चूल्हों से वायु प्रदूषण बढ़ता है, शोर से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है, और पार्किंग की समस्या भी बनी रहती है।
राजबाड़ा क्षेत्र और आसपास के कई बाजार एसोसिएशन ने मिलकर नगर निगम को पत्र भेजकर चौपाटी के स्थानांतरण का समर्थन किया था। इनमें शक्कर बाजार, एम.टी.एच. क्लॉथ मर्चेंट, चांदी-सोना व्यापारी संघ, सीतलामाता बाजार आदि प्रमुख हैं।
महापौर का स्पष्ट रुख
इन सबके बावजूद महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा, “सराफा चौपाटी हमारी धरोहर और इंदौर की पहचान है। इसे हटाने का कोई विचार नहीं है।”
वहीं सुरक्षा और पर्यावरणीय चिंताओं को देखते हुए कुछ व्यापारियों और रहवासियों ने सुझाव दिया कि पहले की तरह सीमित दुकानें और इलेक्ट्रिक/इंडक्शन चूल्हों का उपयोग किया जाए।


