वर्तमान भूमिका के अनुसार नहीं, मूलभूत गुणों के साथ कर्म करें: ब्रह्माकुमारी गोपी दीदी
ज्ञानशिखर में तीन दिवसीय योग तपस्या कार्यक्रम का शुभारंभ
इंदौर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के न्यू पलासिया स्थित ज्ञानशिखर, ओमशांति भवन में लंदन से आईं राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी गोपी दीदी के सान्निध्य में तीन दिवसीय योग तपस्या कार्यक्रम शुरू हुआ। दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर मातृशक्ति के समूह को संबोधित करते हुए गोपी दीदी ने कहा कि मनुष्य को केवल अपनी वर्तमान भूमिका के आधार पर कर्म नहीं करना चाहिए, बल्कि अपने मूलभूत गुणों को पहचानकर उनके अनुरूप व्यवहार करना चाहिए।
गोपी दीदी ने कहा कि मातृशक्ति में त्याग, दया, करुणा और रहम जैसे सहज गुण होते हैं। मां बच्चों की कमियों और कमजोरियों को समझते हुए उनके प्रति शुभभावना रखती है। वह उनके कल्याण की कामना करती है और प्रेम तथा धैर्य से उन्हें परिवर्तन की ओर प्रेरित करती है। ये गुण परमात्मा पिता के गुणों से भी जुड़े हैं। इसी कारण ज्ञान सागर परमात्मा जब सृष्टि पर अवतरित होते हैं, तो ज्ञान का कलश मातृशक्ति के ऊपर रखते हैं।
जगत माता के भाव से निभाएं जिम्मेदारी
उन्होंने कहा कि माताओं की जिम्मेदारी केवल अपने परिवार के कुछ सदस्यों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। स्वयं में जगत माता का भाव रखकर व्यापक दृष्टि से सभी के प्रति जिम्मेदारी निभाने की जरूरत है। गोपी दीदी ने दादी जानकी का उदाहरण देते हुए बताया कि वे स्वयं को विश्व की मां मानती थीं। इसी भावना के साथ उन्होंने पांचों द्वीपों में आध्यात्मिकता का संदेश पहुंचाया।
गोपी दीदी के अनुसार, जब मनुष्य केवल शरीर के नेत्रों से दूसरों को देखता है, तो किसी का व्यवहार अच्छा लगता है और किसी की कमियां दिखाई देती हैं। इससे मन में भेदभाव और अलग-अलग धारणाएं पैदा हो सकती हैं। इसके विपरीत, यदि व्यक्ति स्वयं को आत्मा समझकर भीतर की रोशनी से संसार को देखे और अपने मूलभूत गुणों के आधार पर कर्म करे, तो उसे दूसरों में भी गुण दिखाई देने लगते हैं। इससे उसके अपने कर्म भी श्रेष्ठ बनते हैं।
सकारात्मक सोच से बढ़ती है निर्णय क्षमता
जीवन में सफलता और मन की स्थिरता के लिए गोपी दीदी ने कुछ सुझाव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि मन में किसी के प्रति ईर्ष्या, नफरत या घृणा रखने से बुद्धि की शक्ति प्रभावित होती है और निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो सकती है। इसलिए सभी के प्रति शुभभावना रखनी चाहिए। सकारात्मक दृष्टिकोण से व्यक्ति परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझ पाता है और अपने व्यवहार में संतुलन बनाए रखता है।
उन्होंने दिन के अंत में मन को हल्का करने की सलाह दी। गोपी दीदी ने कहा कि सोने से पहले दिनभर की बातों और चिंताओं को ईश्वर पिता को सौंपकर ईश्वरीय ज्ञान का चिंतन करना चाहिए। इससे मन शांत करके विश्राम करने में सहायता मिल सकती है।
सुबह ध्यान और परमात्मा चिंतन का महत्व
गोपी दीदी ने प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में उठने और दिन की शुरुआत मोबाइल देखने के बजाय मेडिटेशन से करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि सुबह कुछ समय परमात्मा से शक्ति और वरदान प्राप्त करने के भाव में बिताना चाहिए। यह आंतरिक शक्ति दिनभर के कार्यों में सहयोगी बन सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि मन में जरूरत से ज्यादा सूचनाएं जमा करने के बजाय केवल आवश्यक और सकारात्मक विचारों को स्थान देना चाहिए।
पूर्व की आध्यात्मिक विरासत और पश्चिम की आधुनिक सोच का संगम
कार्यक्रम में इंदौर जोन की क्षेत्रीय निदेशिका ब्रह्माकुमारी हेमलता दीदी ने गोपी दीदी का स्वागत और सम्मान किया। उन्होंने बताया कि गोपी दीदी का पालन-पोषण मूलतः अफ्रीका में हुआ और उनकी शिक्षा ब्रिटेन तथा भारत में हुई। उनके व्यक्तित्व में पूर्व की आध्यात्मिक विरासत और पश्चिम की आधुनिक सोच का समन्वय दिखाई देता है।
हेमलता दीदी ने बताया कि लंदन में रहते हुए गोपी दीदी को ईश्वरीय ज्ञान की प्राप्ति हुई। इसके बाद से वे करीब 40 वर्षों से समर्पित भाव से विश्व के विभिन्न हिस्सों में आध्यात्मिक वक्ता और अनुभवी राजयोग शिक्षिका के रूप में सेवाएं दे रही हैं। उनके मार्गदर्शन से अनेक लोगों को जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा मिली है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ स्वागत
कार्यक्रम के शुभारंभ में ब्रह्माकुमारी उषा दीदी और आस्था बहन ने तिलक लगाकर, बैज और गुलदस्ता भेंट कर गोपी दीदी का स्वागत किया। कुमारी नियति ने गीत प्रस्तुत किया, जबकि नन्ही कुमारी दीवी पाठक ने नृत्य की प्रस्तुति देकर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। कार्यक्रम का संचालन ब्रह्माकुमारी अनीता दीदी ने किया।
तीन दिवसीय योग तपस्या कार्यक्रम में आत्मचिंतन, राजयोग और सकारात्मक जीवनशैली से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन दिया जाएगा। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को अपने भीतर के गुणों को पहचानने, शुभभावना बनाए रखने और दैनिक जीवन में आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया गया।
