Indore के दलाल बाग में मुनिश्री सुधा सागर जी महाराज के सान्निध्य में ‘इंडिया नहीं, भारत बोलो’ पुस्तक का विमोचन हुआ। पुस्तक आचार्य विद्यासागर जी की भावना को समर्पित है।
*इंडिया नहीं, भारत बोलो — संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी की भावना को समर्पित पुस्तक का भव्य विमोचन*
*दलाल बाग indore में जगत पूज्य मुनिश्री सुधा सागर जी महाराज संसघ के सान्निध्य में हुआ लोकार्पण*
*indore | राजेश जैन दद्दू*
विध्या सुधा देशना मंडप दलाल बाग,indore — यह दिन जैन समाज ही नहीं, समस्त भारत प्रेमियों के लिए स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि श्रंमण संस्कृति के महाश्रमण
संत शिरोमणि आचार्य गुरुवर पूज्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज के आशीर्वाद और उनकी भावना के अनुरूप *”भारत को भारत ही बोले”* — इसी संकल्प पर आधारित सुंदर पुस्तक *”इंडिया नहीं, भारत बोलो”* का विमोचन जगत पूज्य मुनिश्री सुधा सागर जी महाराज संसघ के पावन सान्निध्य में संपन्न हुआ।
मंच पर जब पुस्तक का विमोचन हुआ, तो पूरा पांडाल *”भारत माता की जय”* और *”आचार्य श्री विद्यासागर जी की जय”* के जयकारों से पुरा देशना मंडप गूंज उठा।
विमोचन के इस पुण्य अवसर पर राष्ट्रीय जिनशासन संघ के राष्ट्रीय संयोजक राकेश जैन गोहिल पुस्तक के लेखक अर्चित जी जैन, भोपाल
धर्म प्रभावना समिति के आनंद नवीन गोधा, गिरीश जैन गिनी सौरभ बड़जात्या श्रीमती शीला डोडिया जयपुर श्रीमती मुक्ता जैन सोनाली बागढीया और इंदौर की चातुर्मास कमेटी के पदाधिकारीगण*
– एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्रावक-श्राविकाएं
*पुस्तक का संदेश क्या है?*
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज सदैव कहते थे — _दुनिया नहीं, भारत बोलो।_
इंडिया कहना केवल एक नाम नहीं है, यह गुलामी की मानसिकता है। भारत कहना हमारी संस्कृति है, हमारी आत्मा है, हमारे ऋषि-मुनियों की परंपरा है।
इसी भावना को लेखक अर्चित जी जैन ने इस पुस्तक में बड़ी सरल, रोचक और तर्कपूर्ण भाषा में प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक आने वाली पीढ़ी को बताएगी कि हम इंडिया नहीं, भारत के वासी हैं। इस अवसर पर
मुनिश्री सुधा सागर जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा — _जो अपने देश को उसके मूल नाम से पुकारता है, वही सच्चा देशभक्त है।
*यह पुस्तक केवल पुस्तक नहीं, एक आंदोलन है।*
एक आंदोलन — अपनी भाषा के लिए, अपनी संस्कृति के लिए, अपने भारत के लिए।
*निवेदन —*
*राजेश जैन दद्दू*
*,indore*
