—Advertisement—

लिथियम-निकेल प्रोसेसिंग को बढ़ावा देगी केंद्र सरकार, पात्र परियोजनाओं को 30% तक कैपेक्स सहायता

Author Picture
Published On: 4 November 2026
ffffffff

—Advertisement—

लिथियम-निकेल प्रोसेसिंग को बढ़ावा देगी केंद्र सरकार, पात्र परियोजनाओं को 30% तक कैपेक्स सहायता

नई दिल्ली। भारत में महत्वपूर्ण खनिजों की प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने नई पहल की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग स्कीम को मंजूरी दी गई। इस योजना के तहत देश में लिथियम और निकेल जैसे खनिजों की प्रोसेसिंग से जुड़ी परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए पूंजीगत खर्च पर 30 प्रतिशत तक सहायता देने का प्रावधान बताया गया है।

लिथियम और निकेल बैटरी निर्माण तथा इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र के लिए अहम खनिज हैं। इनकी प्रोसेसिंग क्षमता देश में विकसित होने से बैटरी और ईवी उद्योग को घरेलू स्तर पर जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। सरकार की यह पहल महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भारत की उत्पादन और प्रसंस्करण क्षमता को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है।

कैपेक्स सहायता से बढ़ेंगी प्रोसेसिंग परियोजनाएं

कैबिनेट की मंजूरी वाली योजना का मुख्य उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों की प्रोसेसिंग से जुड़ी परियोजनाओं में निवेश को प्रोत्साहित करना है। पूंजीगत खर्च यानी कैपेक्स पर 30 प्रतिशत तक सहायता मिलने से पात्र परियोजनाओं की शुरुआती लागत कम करने में मदद मिल सकती है। इससे कंपनियों को लिथियम और निकेल प्रोसेसिंग से जुड़ी इकाइयां स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

योजना में सहायता पाने की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और अन्य विस्तृत शर्तों की जानकारी संबंधित दिशा-निर्देश जारी होने पर स्पष्ट होगी। परियोजनाओं को योजना का लाभ तय मानकों और सरकारी नियमों के अनुसार मिलेगा।

बैटरी और इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र को मिल सकता है लाभ

लिथियम का उपयोग बैटरी निर्माण में किया जाता है, जबकि निकेल भी बैटरी और अन्य औद्योगिक उपयोगों के लिए महत्वपूर्ण है। इन खनिजों की प्रोसेसिंग देश में बढ़ने से बैटरी विनिर्माण से जुड़ी आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। इससे इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र को भी लाभ पहुंचने की संभावना है, क्योंकि ईवी उद्योग में बैटरी की उपलब्धता और उत्पादन अहम भूमिका निभाते हैं।

भारत में प्रोसेसिंग क्षमता का विस्तार होने से उद्योगों को घरेलू स्तर पर तैयार सामग्री के विकल्प मिल सकते हैं। हालांकि, इसका वास्तविक असर परियोजनाओं की स्थापना, उत्पादन क्षमता और योजना के क्रियान्वयन के बाद ही सामने आएगा।

महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा

क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग स्कीम को महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में देश की क्षमताएं विकसित करने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। लिथियम और निकेल की प्रोसेसिंग को समर्थन देकर सरकार बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहन और संबंधित विनिर्माण क्षेत्रों के लिए आधार तैयार करना चाहती है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिल सकता है।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp