जौहर यूनिवर्सिटी की ₹426.46 करोड़ की संपत्तियां ED ने कीं अटैच, बाजार मूल्य करीब ₹1,170 करोड़
रामपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। एजेंसी के मुताबिक, अटैच संपत्तियों का मूल्य ₹426.46 करोड़ है, जबकि उनकी मौजूदा बाजार कीमत करीब ₹1,170 करोड़ आंकी गई है। यह कार्रवाई मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, समाजवादी पार्टी नेता और पूर्व मंत्री आजम खान तथा अन्य लोगों से जुड़े मामले में की गई है
26 FIR के आधार पर शुरू हुई जांच
ED के अनुसार, जांच रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज 26 एफआईआर के आधार पर शुरू हुई। इन मामलों में आरोप था कि यूनिवर्सिटी के विस्तार के लिए किसानों की कृषि भूमि पर जबरन कब्जा किया गया। एजेंसी ने यह भी कहा कि जिला प्रशासन की जांच में सिंहानखेड़ा गांव में करीब 34 एकड़ में फैली शत्रु संपत्ति के 45 भूखंडों पर कथित अवैध कब्जे की बात सामने आई थी। शत्रु संपत्ति अभिरक्षक ने पट्टा रद्द किए जाने के बाद जिला प्रशासन के माध्यम से जमीन वापस ली।
सरकारी धन और निर्माण सामग्री के इस्तेमाल का आरोप
जांच एजेंसी का आरोप है कि सरकारी कामों के लिए उपलब्ध धन और संसाधनों का इस्तेमाल यूनिवर्सिटी परिसर के निर्माण में किया गया। ED ने सरकारी ठेके पाने वाली कंपनियों और ट्रस्ट के बीच लेन-देन की भी जांच की है। एजेंसी के मुताबिक, एक ठेकेदार ने सरकारी परियोजनाओं से मिली रकम का हिस्सा यूनिवर्सिटी के लिए निर्माण सामग्री खरीदने में लगाने की बात स्वीकार की। एक अन्य फर्म से ट्रस्ट को दान मिलने की जानकारी भी जांच में सामने आई है।
ED ने यह भी आरोप लगाया कि विधायक और विधान परिषद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से करीब ₹6.60 करोड़ के काम यूनिवर्सिटी परिसर में कराए गए। एजेंसी के मुताबिक, परिसर में पंडाल, ओबीसी छात्रावास और अस्पताल ब्लॉक के निर्माण के लिए राज्य सरकार से ₹23.41 करोड़ की मंजूरी भी मिली थी। इन आरोपों और सरकारी धन के कथित इस्तेमाल की जांच जारी है।
निर्माण लागत और वैध स्रोतों में अंतर
ED के अनुसार, जिला मूल्यांकन अधिकारी की रिपोर्ट में यूनिवर्सिटी परिसर की 59 इमारतों की निर्माण लागत ₹494.46 करोड़ आंकी गई थी। 114 बिक्री विलेखों के जरिए खरीदी गई जमीन का मूल्य ₹4.63 करोड़ जोड़े जाने पर परिसर की कुल अनुमानित लागत ₹499.09 करोड़ बताई गई।
एजेंसी का कहना है कि ट्रस्ट की ओर से उपलब्ध कराए गए रिकॉर्ड और अन्य स्रोतों की जांच के बाद कुल लागत में से ₹72.63 करोड़ के वैध स्रोतों का हिसाब मिला। शेष ₹426.46 करोड़ को ED ने कथित अपराध से अर्जित आय माना है। इसी आधार पर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों में बराबर मूल्य की संपत्ति को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अस्थायी रूप से अटैच किया गया।
जांच जारी, आरोपों पर अंतिम फैसला बाकी
अस्थायी अटैचमेंट ED की जांच के दौरान की गई कार्रवाई है। यह आरोपों पर अंतिम न्यायिक फैसला नहीं है। मामले में संबंधित पक्षों का जवाब और आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। ED ने बताया कि इससे पहले 19 अगस्त 2026 को यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े परिसरों पर तलाशी ली गई थी, जहां से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज जब्त किए गए। एजेंसी के मुताबिक, मामले की आगे की जांच जारी है।
