हेड-कॉन्स्टेबल फिरोज खान की संपत्तियों की जांच भोपाल से मॉनिटर
46 अचल संपत्तियों का पता चला; जमीनों के सौदों, स्टाम्प ड्यूटी और करीबियों की भूमिका की पड़ताल
इंदौर। पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में पदस्थ हेड-कॉन्स्टेबल चालक फिरोज खान से जुड़ी कथित आय से अधिक संपत्ति के मामले में लोकायुक्त जांच का दायरा बढ़ गया है। मामले की मॉनिटरिंग अब भोपाल स्थित लोकायुक्त मुख्यालय से की जा रही है। जांच एजेंसी फिरोज खान से जुड़ी संपत्तियों के साथ उनकी पत्नी, परिचितों और कुछ अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।
लोकायुक्त की प्राथमिक जांच में फिरोज खान, उनके परिजनों, सहयोगियों और उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम पर 46 अचल संपत्तियों की जानकारी सामने आई है। इनमें मकान, कृषि भूमि और आवासीय तथा व्यावसायिक भूखंड शामिल बताए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इन संपत्तियों का सरकारी दरों पर मूल्य करीब 17.19 करोड़ रुपये और अनुमानित बाजार मूल्य लगभग 64.01 करोड़ रुपये आंका गया है। अंतिम आकलन और संपत्तियों के स्वामित्व की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
जमीनों के सौदों और स्टाम्प ड्यूटी की जांच
जांच का एक प्रमुख पहलू जमीनों की खरीद-फरोख्त और रजिस्ट्री से जुड़े दस्तावेज हैं। लोकायुक्त यह पता लगाने में जुटी है कि संपत्तियां किन लोगों और संस्थाओं के नाम पर खरीदी गईं तथा सौदों में इस्तेमाल धन का स्रोत क्या था। कुछ जमीनों की रजिस्ट्रियों में फिरोज खान का नाम गवाह के तौर पर दर्ज होने की जानकारी भी जांच के दायरे में है। अधिकारी यह पता कर रहे हैं कि वे किन पक्षों की ओर से गवाह बने थे और इन सौदों से उनका क्या संबंध था।
स्टाम्प ड्यूटी में कथित अनियमितताओं की भी पड़ताल की जा रही है। आशंका है कि जमीनों के कुछ सौदों में वास्तविक मूल्य और दस्तावेजों में दर्ज मूल्य के बीच अंतर रहा हो सकता है। इससे शासन को राजस्व नुकसान होने की संभावना की जांच की जा रही है। इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है; जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
पत्नी, परिचितों और अधिकारियों की भूमिका पर नजर
लोकायुक्त की टीम फिरोज खान से जुड़ी अन्य संभावित संपत्तियों की जानकारी जुटाने के साथ उनकी पत्नी और परिचितों की संपत्ति तथा वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही है। कुछ संपत्तियां निजी कंपनियों या फर्मों के नाम पर खरीदी गई थीं। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन कंपनियों का संचालन कौन करता था और संपत्ति खरीदने में इस्तेमाल रकम कहां से आई।
फिरोज खान के करीबियों और कुछ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई गई है। एजेंसी यह देख रही है कि संपत्तियों के सौदों में किसी ने सहयोग किया या नहीं और संबंधित लेन-देन में उनकी क्या भूमिका रही। जांच में सामने आए नामों और दस्तावेजों की पुष्टि की जा रही है। किसी भी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय होना जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगा।
आय और संपत्तियों का मिलान कर रही एजेंसी
जांच एजेंसी संपत्तियों के दस्तावेज, रजिस्ट्री, वित्तीय लेन-देन और आय के ज्ञात स्रोतों का मिलान कर रही है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि संपत्ति अर्जित करने के लिए उपयोग की गई राशि का वैध स्रोत क्या था। लोकायुक्त की जांच में फिरोज खान के परिजनों और सहयोगियों के नाम पर दर्ज संपत्तियों को भी शामिल किया गया है।
फिलहाल जांच जारी है और लोकायुक्त मुख्यालय भोपाल से इसकी मॉनिटरिंग की जा रही है। जमीनों के सौदों, स्टाम्प ड्यूटी और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल के बाद ही मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। जब तक जांच पूरी नहीं होती, सामने आए आरोपों और आशंकाओं को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
