देवरा के प्राचीन शिव मंदिर के वैज्ञानिक जीर्णोद्धार की मांग, विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने पुरातत्व आयुक्त से की मुलाकात
मूल स्वरूप और ऐतिहासिक विरासत सुरक्षित रखने पर जोर, मंदिर परिसर में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था करने की भी उठाई मांग
रिपोर्टर: कौशिक पण्डित, कुशाग्र समाचार सेवा, मनावर जिला धार
दैनिक स्वराज वाणी | भोपाल। धार जिले के ग्राम देवरा स्थित प्राचीन शिव मंदिर के संरक्षण और जीर्णोद्धार की मांग को लेकर मनावर विधायक डॉ. हीरालाल अलावा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने भोपाल में पुरातत्व विभाग के आयुक्त मदन कुमार से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मंदिर के ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व को ध्यान में रखते हुए उसका जीर्णोद्धार वैज्ञानिक एवं पुरातात्विक पद्धति से कराने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल में मनावर के पन्नालाल गेहलोत और सैयद रिजवान अली भी शामिल थे। सभी सदस्यों ने आयुक्त के समक्ष मंदिर की वर्तमान स्थिति, इसके संरक्षण की आवश्यकता और परिसर में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के विषय को प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि जीर्णोद्धार के दौरान मंदिर के मूल स्थापत्य, प्राचीन स्वरूप और ऐतिहासिक पहचान में किसी प्रकार का अनावश्यक परिवर्तन नहीं होना चाहिए।
पुरातात्विक विशेषज्ञों की देखरेख में हो जीर्णोद्धार
विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने विभाग को दिए पत्र में मांग की कि देवरा शिव मंदिर का विस्तृत तकनीकी और पुरातात्विक सर्वे कराया जाए। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर विशेषज्ञों की देखरेख में संरक्षण एवं जीर्णोद्धार की कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि प्राचीन धरोहरों की मरम्मत सामान्य निर्माण कार्यों की तरह नहीं की जा सकती, क्योंकि अनुचित सामग्री या तकनीक के उपयोग से उनका वास्तविक स्वरूप प्रभावित होने का खतरा रहता है।
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि मंदिर के क्षतिग्रस्त हिस्सों की पहचान करने के बाद परंपरागत निर्माण सामग्री और वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग किया जाए। मरम्मत के दौरान मंदिर की पुरानी शिल्पकला, स्थापत्य शैली, पत्थरों, मूर्तियों और अन्य ऐतिहासिक अवशेषों को सुरक्षित रखने को प्राथमिकता दी जाए।
मंदिर के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ न करने की अपील
प्रतिनिधिमंडल ने पुरातत्व आयुक्त से कहा कि जीर्णोद्धार के नाम पर मंदिर की प्राचीन संरचना में ऐसा कोई बदलाव नहीं किया जाना चाहिए, जिससे उसकी ऐतिहासिक पहचान समाप्त हो। मंदिर का मूल स्वरूप उसकी सांस्कृतिक और पुरातात्विक महत्ता का प्रमुख आधार है। इसलिए प्रत्येक कार्य विभागीय विशेषज्ञों और प्रशिक्षित कारीगरों की निगरानी में कराया जाना आवश्यक है।
विधायक डॉ. अलावा ने कहा कि देवरा का शिव मंदिर स्थानीय श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा होने के साथ क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत भी है। ऐसी धरोहरों की सुरक्षा केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी जरूरी है। उन्होंने विभाग से मंदिर से संबंधित उपलब्ध ऐतिहासिक अभिलेखों, स्थापत्य विशेषताओं और पुरातात्विक तथ्यों का दस्तावेजीकरण कराने की भी मांग रखी।
मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने मंदिर परिसर की सुरक्षा का विषय भी आयुक्त के समक्ष उठाया। सदस्यों ने कहा कि प्राचीन मंदिर, मूर्तियों और अन्य पुरातात्विक अवशेषों की सुरक्षा के लिए परिसर में आवश्यक व्यवस्थाएं की जानी चाहिए। जरूरत के अनुसार परिसर की निगरानी, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी अन्य उपाय सुनिश्चित किए जाएं।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि मंदिर की ऐतिहासिक संपदा को किसी भी प्रकार की क्षति, चोरी या असामाजिक गतिविधि से बचाने के लिए संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए। इसके साथ ही मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाना आवश्यक है।
स्थानीय लोगों की सहभागिता पर जोर
विधायक डॉ. अलावा ने कहा कि किसी भी ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण में स्थानीय नागरिकों की सहभागिता महत्वपूर्ण होती है। देवरा और आसपास के ग्रामीण मंदिर की धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्ता से परिचित हैं। इसलिए संरक्षण योजना तैयार करते समय स्थानीय जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और मंदिर से जुड़े लोगों के सुझावों को भी शामिल किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को भी इस बात के लिए जागरूक किया जाना चाहिए कि वे मंदिर की दीवारों, मूर्तियों और प्राचीन संरचनाओं को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों से बचें। स्वच्छता और परिसर की मर्यादा बनाए रखने में स्थानीय नागरिकों का सहयोग लिया जा सकता है।
पर्यटन और स्थानीय पहचान को मिल सकता है बढ़ावा
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि मंदिर का उचित संरक्षण होने से देवरा की ऐतिहासिक पहचान और मजबूत हो सकती है। व्यवस्थित जीर्णोद्धार और बुनियादी सुविधाओं के विकास से क्षेत्र में धार्मिक एवं ऐतिहासिक पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और छोटे व्यवसायों के अवसर विकसित होने की उम्मीद की जा सकती है।
हालांकि, प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि पर्यटन सुविधाओं के विकास के दौरान मंदिर के मूल स्वरूप और परिसर की धार्मिक गरिमा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। प्राथमिक उद्देश्य प्राचीन विरासत को सुरक्षित रखना और संरचना को दीर्घकालीन क्षति से बचाना होना चाहिए।
शीघ्र सर्वे और कार्ययोजना बनाने का अनुरोध
विधायक डॉ. हीरालाल अलावा और प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने पुरातत्व विभाग से मंदिर का शीघ्र निरीक्षण कराने, विशेषज्ञों की टीम भेजने तथा चरणबद्ध संरक्षण कार्ययोजना तैयार करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि समय रहते संरक्षण कार्य प्रारंभ नहीं होने पर प्राचीन संरचना को और नुकसान पहुंच सकता है।
प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि पुरातत्व विभाग मंदिर की ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्ता को देखते हुए मांगों पर गंभीरता से विचार करेगा। साथ ही वैज्ञानिक पद्धति से जीर्णोद्धार, मूल स्वरूप की सुरक्षा और मंदिर परिसर में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाएगा।
