सिहोनियांजी में 28 सितंबर को लगेगा वार्षिक मेला, अतिप्राचीन प्रतिमाओं का होगा महामस्तकाभिषेक
भगवान शांतिनाथ, कुंथनाथ एवं अरहनाथ स्वामी की प्रतिमाओं का होगा अभिषेक, आर्यिका संगममति माताजी ससंघ का मिलेगा पावन सान्निध्य
मनोज जैन नायक
मुरैना/सिहोनियांजी। जैन धर्मावलंबियों के प्रमुख तीर्थ एवं ऐतिहासिक अतिशय क्षेत्र श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र सिहोनियांजी में सोमवार, 28 सितंबर 2026 को वार्षिक मेला एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव आयोजित किया जाएगा। क्वार वदी दोज के अवसर पर होने वाले इस आयोजन में भगवान शांतिनाथ स्वामी सहित मूलनायक भगवान कुंथनाथ और अरहनाथ स्वामी की अतिप्राचीन प्रतिमाओं का श्रद्धापूर्वक महामस्तकाभिषेक किया जाएगा।
महोत्सव के दौरान विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश सहित आसपास के राज्यों से बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र कमेटी ने सभी साधर्मी बंधुओं से महोत्सव में शामिल होकर धर्मलाभ लेने की अपील की है।
ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व का प्रमुख तीर्थ
मुरैना जिला मुख्यालय से करीब 33 किलोमीटर दूर स्थित सिहोनियांजी जैन समाज की आस्था का प्रमुख केंद्र है। धार्मिक महत्व के साथ यह क्षेत्र ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक दृष्टि से भी विशेष स्थान रखता है। यहां भूगर्भ से प्रकट हुईं अतिप्राचीन और अतिशयकारी जैन प्रतिमाएं आज भी उसी स्थान पर विराजमान हैं, जहां से वे प्राप्त हुई थीं।
क्षेत्र में मिले शिलालेखों, साहित्यिक प्रमाणों और पुरातात्विक अध्ययनों के आधार पर इन प्रतिमाओं का इतिहास 11वीं शताब्दी से जुड़ा माना जाता है। प्रतिमाओं के दर्शन करने के लिए वर्षभर देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु सिहोनियांजी पहुंचते हैं।
16 फुट ऊंची भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा
मुख्य मंदिर के विशाल एवं भव्य हॉल में तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ स्वामी की 16 फुट ऊंची मनोहारी पाषाण प्रतिमा विराजमान है। उनके दोनों ओर भगवान कुंथनाथ स्वामी और भगवान अरहनाथ स्वामी की 11-11 फुट ऊंची प्रतिमाएं स्थापित हैं।
इन तीनों विशाल एवं प्राचीन प्रतिमाओं के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। सिहोनियांजी की प्रमुख विशेषता यह है कि भूगर्भ से प्राप्त इन प्रतिमाओं को उनके प्राकट्य स्थल पर ही प्रतिष्ठित कर विराजमान किया गया है।
परिसर में अनेक प्राचीन जिनालय
मुख्य मंदिर के परकोटे में श्री समवसरण जिनालय, श्री पार्श्वनाथ जिनालय, श्री पद्मप्रभु जिनालय और श्री नेमीनाथ जिनालय स्थित हैं। इन जिनालयों में अनेक प्राचीन जैन प्रतिमाएं विराजमान हैं।
मुख्य मंदिर परिसर के बाहर विशाल एवं भव्य श्री कमल मंदिर, श्री नेमीनाथ जिनालय और भगवान शांतिनाथ स्वामी की 31 फुट ऊंची मनोहारी प्रतिमा भी स्थापित की गई है। श्री समवसरण जिनालय और कमल मंदिर में श्री चौबीसी का निर्माण कराया गया है। विशाल परकोटे में स्थापित पांच भव्य मानस्तंभों का समूह तीर्थ क्षेत्र की सुंदरता एवं धार्मिक गरिमा को और बढ़ाता है।
प्रातःकाल से शुरू होंगे धार्मिक अनुष्ठान
वार्षिक मेले के अवसर पर परम पूज्य आर्यिका संगममति माताजी ससंघ का पावन सान्निध्य प्राप्त होगा। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातःकाल भगवान के अभिषेक, शांतिधारा और नित्यमह पूजन से होगा। इसके बाद श्री शांतिनाथ महामंडल विधान का भव्य आयोजन किया जाएगा।
दोपहर 2 बजे से मूलनायक भगवान शांतिनाथ, कुंथनाथ और अरहनाथ स्वामी की प्रतिमाओं का महामस्तकाभिषेक प्रारंभ होगा। श्रद्धालु भक्तिभाव के साथ भगवान का अभिषेक कर पुण्यार्जन करेंगे।
विधान एवं महामस्तकाभिषेक सहित सभी धार्मिक अनुष्ठान प्रतिष्ठाचार्य पंडित राजेंद्र जैन शास्त्री मगरौनी और संजय शास्त्री सिहोनियां के निर्देशन में मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ संपन्न कराए जाएंगे। कार्यक्रम के समापन के बाद आगंतुक साधर्मी बंधुओं के लिए आयोजकों की ओर से वात्सल्य भोज की व्यवस्था की जाएगी।
स्वप्न के बाद हुई थी प्रतिमाओं की खोज
सिहोनियांजी अतिशय क्षेत्र में विराजमान प्रतिमाओं के प्राकट्य का इतिहास अत्यंत रोचक बताया जाता है। स्थानीय ब्रह्मचारी श्री गुमानीलाल जैन भैयाजी को वर्ष 1937 में एक स्वप्न आया था। इसके बाद अम्बाह, मुरैना और आसपास के क्षेत्रों के समाजजनों ने संबंधित टीले की खुदाई कराई।
खुदाई के दौरान भूगर्भ से भगवान शांतिनाथ स्वामी की 16 फुट ऊंची तथा भगवान कुंथनाथ एवं अरहनाथ स्वामी की 11-11 फुट ऊंची पाषाण प्रतिमाएं प्राप्त हुईं। इन प्रतिमाओं को 11वीं शताब्दी से संबंधित माना जाता है।
खुदाई में अनेक खंडित प्रतिमाएं और अन्य पुरातात्विक सामग्री भी प्राप्त हुई थीं। इन्हें सुरक्षित रखने के लिए क्षेत्र में संग्रहालय बनाया गया है। यहां आने वाले श्रद्धालु प्राचीन प्रतिमाओं के साथ क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत का भी अवलोकन कर सकते हैं।
श्रद्धालुओं के लिए आवास और भोजन की व्यवस्था
तीर्थ क्षेत्र में बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवास सहित विभिन्न आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। परिसर में एसी एवं डीलक्स कमरे, धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों के लिए हॉल, भोजनालय तथा कैंटीन की व्यवस्था है।
सिहोनियांजी ग्वालियर-भिंड राजमार्ग पर मालनपुर एवं वाराहेट मार्ग से ग्वालियर से करीब 55 किलोमीटर और मुरैना से लगभग 33 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मुरैना रेलवे स्टेशन के आसपास से सिहोनियांजी पहुंचने के लिए बस और टैक्सी जैसे परिवहन साधन उपलब्ध रहते हैं।
श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र कमेटी ने जैन समाज और सभी साधर्मी बंधुओं से 28 सितंबर को आयोजित वार्षिक मेले एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर भगवान के दर्शन, पूजन और अभिषेक का धर्मलाभ लेने का आग्रह किया है।
