रीवा में छात्र की मौत के बाद निजी अस्पतालों के इलाज और रेफरल पर सवाल
इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष के छात्र अक्षत शुक्ला की मौत; परिजनों ने इलाज में लापरवाही और जानकारी न देने के आरोप लगाए, जांच की मांग
रीवा। इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष के छात्र अक्षत शुक्ला की मौत के बाद रीवा के निजी अस्पतालों में इलाज और मरीजों को रेफर करने की प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। उरहट निवासी अक्षत को अचानक तबीयत बिगड़ने पर पहले संजीवन हॉस्पिटल ले जाया गया था। बाद में उसे प्रार्थना अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई। परिजनों ने उपचार में लापरवाही, अस्पतालों के बीच रेफर किए जाने और घटना के बारे में स्पष्ट जानकारी न मिलने के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
परिजनों के अनुसार, अक्षत को खांसी और बलगम निकलने में परेशानी हो रही थी। उसे संजीवन हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां मुकेश तिवारी ने उपचार शुरू किया। परिवार का कहना है कि रात में अक्षत को प्रार्थना अस्पताल रेफर किया गया। रेफर करने की वजह, उस समय अक्षत की स्थिति और आगे के उपचार की योजना के बारे में परिजनों ने सवाल उठाए हैं। इन बातों की पुष्टि अस्पताल के उपचार रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही हो सकेगी।
दूसरे अस्पताल में भर्ती करने पर परिजनों के सवाल
परिजनों का आरोप है कि प्रार्थना अस्पताल में अक्षत को भर्ती करने के बाद दवाइयां दी जाती रहीं और उन्हें बताया गया कि वह 24 घंटे के भीतर ठीक होकर घर जा सकता है। परिवार के मुताबिक, बाद में शाम के समय उन्होंने अक्षत के शव को एंबुलेंस में रखे देख लिया। उनका कहना है कि उस वक्त उन्हें यह स्पष्ट नहीं बताया गया कि शव को कहां ले जाया जा रहा है और अस्पताल में उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई।
परिवार ने अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों और उपलब्ध उपचार सुविधाओं को लेकर भी सवाल किए हैं। परिजनों के अनुसार, प्रार्थना अस्पताल के संचालक डॉ. राहुल कुंदर से यह पूछा गया कि यदि संबंधित बीमारी के विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध नहीं थे, तो अक्षत को वहां भर्ती क्यों किया गया। परिवार का दावा है कि उन्हें बताया गया कि उपचार मुकेश तिवारी कर रहे थे। इस बातचीत और उपचार की जिम्मेदारी से जुड़े दावों की पुष्टि अस्पताल प्रबंधन का पक्ष और दस्तावेज सामने आने के बाद ही हो सकती है।
मामले में यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि अक्षत को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल ले जाने का निर्णय किसने लिया, रेफरल के समय उसकी चिकित्सकीय स्थिति क्या थी और दोनों अस्पतालों के बीच उपचार से संबंधित जानकारी किस तरह साझा की गई। इन सवालों के जवाब उपचार पर्चे, जांच रिपोर्ट, दवाओं के रिकॉर्ड और रेफरल नोट से मिल सकते हैं।
अस्पताल प्रबंधन से जवाब मांगने का दावा
परिजनों का कहना है कि उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से इलाज और मौत से जुड़े सवालों के जवाब मांगे, लेकिन उन्हें संतोषजनक जानकारी नहीं मिली। परिवार के आरोप के मुताबिक, बातचीत के दौरान अस्पताल में दरवाजा बंद कर मीटिंग की बात कही गई। इसके बाद वहां तनाव बढ़ा और पुलिस को बुलाना पड़ा। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि विवाद के दौरान रीवा के कई निजी अस्पतालों के कर्मचारी और सुरक्षा गार्ड प्रार्थना अस्पताल पहुंचे। इन घटनाओं की पुष्टि और उनका संदर्भ पुलिस तथा संबंधित पक्षों की जानकारी से ही स्पष्ट हो सकेगा।
इस रिपोर्ट के लिए अस्पताल प्रबंधन का विस्तृत आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं है। अस्पताल या चिकित्सकों पर लगाए गए आरोपों को जांच के बिना प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। प्रबंधन का पक्ष सामने आने पर उसे भी शामिल किया जाना जरूरी होगा।
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग से निष्पक्ष जांच की मांग
परिजनों ने मामले की शिकायत पुलिस से करने की बात कही है। अब यह जरूरी है कि पुलिस और स्वास्थ्य विभाग उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच करें। इसमें भर्ती और उपचार का समय, दवाओं का रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट, रेफरल की वजह, अस्पताल में हुई चिकित्सकीय प्रक्रिया और मौत के बाद अपनाई गई कार्यवाही जैसे बिंदुओं को शामिल किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की समिति की राय भी ली जा सकती है।
अक्षत की मौत का कारण और उपचार के दौरान हुई घटनाओं की वास्तविक स्थिति जांच से ही सामने आएगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य चिकित्सकीय दस्तावेज भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। किसी चिकित्सक या अस्पताल को बिना जांच दोषी ठहराना उचित नहीं होगा, लेकिन परिजनों की शिकायतों की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच होना भी जरूरी है।
यह मामला रीवा की निजी स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और मरीजों के परिजनों को जानकारी देने की व्यवस्था पर भी ध्यान खींचता है। यदि किसी अस्पताल में किसी विशेष उपचार की सुविधा या विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं, तो भर्ती और रेफरल के समय मरीज की स्थिति तथा उपलब्ध विकल्पों के बारे में परिवार को स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। मरीज को दूसरे अस्पताल भेजते समय रेफरल का कारण और आगे के उपचार की व्यवस्था दर्ज होना भी जांच के लिए अहम रहेगा।
रीवा उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला का गृह क्षेत्र है। ऐसे में परिजन और स्थानीय लोग प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग से मामले में तथ्य सामने लाने की अपेक्षा कर रहे हैं। फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि अक्षत की मौत किन परिस्थितियों में हुई और उपचार से जुड़े आरोपों में कितनी सच्चाई है। इसका जवाब पुलिस जांच, चिकित्सकीय रिकॉर्ड और अस्पताल प्रबंधन के पक्ष के आधार पर ही दिया जा सकेगा।
अक्षत के परिवार ने जवान बेटे को खोया है और अब वह मौत की परिस्थितियों के बारे में स्पष्ट जवाब चाहता है। जांच में यदि लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। तब तक मामले से जुड़े सभी आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
