Bhopal Doctor Protest: इंटर्न डॉक्टरों पर वाटर कैनन चलाने के मामले में दो पुलिसकर्मी लाइन अटैच, लाठीचार्ज की होगी जांच
स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर तीन दिनों से आंदोलन जारी, वल्लभ भवन की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारी डॉक्टरों और पुलिस के बीच बनी टकराव की स्थिति
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों पर वाटर कैनन के इस्तेमाल और कथित लाठीचार्ज का मामला गरमा गया है। घटना को लेकर बढ़ते विरोध के बीच दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया गया है। इसके साथ ही गृह विभाग के सचिव द्वारा पूरे घटनाक्रम की जांच कराए जाने की बात सामने आई है।
इंटर्न डॉक्टर पिछले तीन दिनों से अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। मंगलवार, 8 सितंबर को डॉक्टरों और संबंधित अधिकारियों के बीच बातचीत हुई, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। वार्ता बेनतीजा रहने के बाद प्रदर्शनकारी डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर वल्लभ भवन की ओर बढ़े। इस दौरान पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया और स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर अड़े इंटर्न डॉक्टर
भोपाल के एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर लंबे समय से अपने स्टाइपेंड में वृद्धि की मांग कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इंटर्नशिप के दौरान उनसे अस्पतालों में नियमित रूप से चिकित्सा सेवाएं ली जाती हैं। लंबी ड्यूटी और जिम्मेदारियों के अनुपात में उन्हें मिलने वाला स्टाइपेंड पर्याप्त नहीं है।
इसी मांग को लेकर इंटर्न डॉक्टरों ने आंदोलन का रास्ता अपनाया है। लगातार तीन दिनों से धरना-प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने सरकार से उनकी मांगों पर जल्द निर्णय लेने की अपील की। डॉक्टरों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात शासन तक पहुंचाना चाहते हैं।
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों और अधिकारियों के बीच मंगलवार को बातचीत भी हुई, लेकिन स्टाइपेंड वृद्धि को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका। वार्ता विफल होने के बाद आंदोलनरत डॉक्टरों ने वल्लभ भवन की ओर जाने का प्रयास किया।
वल्लभ भवन की ओर बढ़ने पर पुलिस ने रोका
प्रदर्शनकारी इंटर्न डॉक्टर अपनी मांग सरकार तक पहुंचाने के लिए वल्लभ भवन की ओर बढ़ रहे थे। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था और प्रतिबंधित क्षेत्र का हवाला देते हुए उन्हें रास्ते में रोकने का प्रयास किया। डॉक्टर आगे बढ़ने की मांग पर अड़े रहे, जिसके चलते दोनों पक्षों के बीच तनाव की स्थिति निर्मित हो गई।
प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए मौके पर मौजूद पुलिस बल ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि इस दौरान उन पर लाठीचार्ज भी किया गया। घटना के बाद डॉक्टरों में नाराजगी बढ़ गई और पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए जाने लगे।
डॉक्टरों का कहना है कि वे अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। ऐसे में उनके खिलाफ बल प्रयोग करना उचित नहीं था। वहीं, घटनास्थल पर बनी परिस्थितियों और पुलिस द्वारा उठाए गए कदमों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होने की उम्मीद है।
दो पुलिसकर्मियों को किया गया लाइन अटैच
इंटर्न डॉक्टरों के विरोध और मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस प्रशासन ने प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया है। लाइन अटैच किए जाने का अर्थ है कि संबंधित पुलिसकर्मियों को उनकी मौजूदा ड्यूटी से हटाकर पुलिस लाइन में पदस्थ किया गया है।
यह विभागीय स्तर की प्रारंभिक प्रशासनिक कार्रवाई मानी जाती है। इससे किसी पुलिसकर्मी का दोष स्वतः सिद्ध नहीं होता। मामले की जांच के आधार पर ही यह तय होगा कि प्रदर्शन के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था या किसी स्तर पर लापरवाही हुई।
इस कार्रवाई के बाद भी प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने घटना की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उचित कदम उठाने की मांग की है।
गृह सचिव करेंगे लाठीचार्ज की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह विभाग के सचिव द्वारा कथित लाठीचार्ज की जांच कराए जाने का निर्णय लिया गया है। जांच में प्रदर्शन के दौरान उत्पन्न परिस्थितियों, पुलिस को दिए गए निर्देशों और वाटर कैनन के इस्तेमाल से जुड़े तथ्यों की समीक्षा की जाएगी।
इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि डॉक्टरों को रोकने के लिए बल प्रयोग की आवश्यकता क्यों पड़ी और क्या मौके पर उपलब्ध अधिकारियों द्वारा नियमों एवं निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था। घटनास्थल के वीडियो, तस्वीरों तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय हो सकती है।
डॉक्टरों के आंदोलन से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर की आशंका
एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर सरकारी मेडिकल कॉलेजों और उनसे जुड़े अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। वे वरिष्ठ चिकित्सकों की निगरानी में मरीजों की जांच, वार्ड ड्यूटी, इमरजेंसी सेवाओं और अन्य चिकित्सा कार्यों में सहयोग करते हैं।
आंदोलन लंबा चलने की स्थिति में अस्पतालों की व्यवस्था और मरीजों की सेवाओं पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में सरकार और इंटर्न डॉक्टरों के बीच जल्द बातचीत शुरू होने की आवश्यकता बताई जा रही है। डॉक्टरों ने सरकार से उनकी मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार कर समाधान निकालने की अपील की है।
बातचीत से समाधान निकालने की मांग
विवाद के बाद अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। एक ओर इंटर्न डॉक्टर स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर कायम हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस कार्रवाई को लेकर जांच की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
डॉक्टरों का कहना है कि उनकी मांग आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों से जुड़ी है। उन्होंने सरकार से बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की मांग की है। साथ ही आंदोलन के दौरान डॉक्टरों पर कथित रूप से किए गए बल प्रयोग की निष्पक्ष जांच की अपेक्षा जताई है।
फिलहाल दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया गया है और गृह विभाग के सचिव की जांच के बाद घटना से जुड़े तथ्य सामने आने की उम्मीद है। जांच रिपोर्ट से ही यह स्पष्ट होगा कि वल्लभ भवन की ओर बढ़ रहे डॉक्टरों को रोकने के दौरान पुलिस कार्रवाई किन परिस्थितियों में की गई और इसमें नियमों का कितना पालन हुआ।
