IIST इंदौर में ‘अभिज्ञता पर्व 2026’ का शुभारंभ, 1200 से अधिक विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
इंदौर। इंदौर इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (IIST ) में बी.टेक. बैच 2026 के विद्यार्थियों के लिए दो दिवसीय इंडक्शन प्रोग्राम ‘अभिज्ञता पर्व 2026’ का मंगलवार को देवी अहिल्या विश्वविद्यालय ऑडिटोरियम में शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के पहले दिन 1200 से अधिक विद्यार्थियों और अभिभावकों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का उद्देश्य नवप्रवेशित विद्यार्थियों को संस्थान की शैक्षणिक व्यवस्था, अनुशासन, सुविधाओं, करियर अवसरों और सर्वांगीण विकास से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी देना रहा।
डॉ. राजेंद्र सिंह ने दिया प्रकृति और संस्कृति से जुड़ने का संदेश
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ‘वॉटरमैन ऑफ इंडिया’ डॉ. राजेंद्र सिंह रहे। उन्होंने ‘जीने योग्य भविष्य के लिए प्रकृति एवं संस्कृति का एकीकरण’ विषय पर विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग शिक्षा का उद्देश्य केवल तकनीकी ज्ञान हासिल करना नहीं, बल्कि समाज और पर्यावरण के सामने मौजूद वास्तविक समस्याओं के समाधान में उस ज्ञान का उपयोग करना भी होना चाहिए।
डॉ. सिंह ने विद्यार्थियों से जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति संवेदनशील बनने का आह्वान किया। उन्होंने प्रकृति और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
विद्यार्थियों को दिया ‘Learn, Build, Specialize, Create Value’ का मंत्र
आईआईएसटी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स के ग्रुप एडवाइजर श्री अरुण एस. भटनागर ने विद्यार्थियों को ‘Learn, Build, Specialize और Create Value’ का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में केवल इंजीनियरिंग की डिग्री और एक तकनीकी कौशल पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को लगातार Learn, Unlearn और Relearn करने की क्षमता विकसित करनी होगी।
उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को एआई से प्रतिस्पर्धा करने के बजाय इसे अपनी क्षमता बढ़ाने के माध्यम के रूप में अपनाना चाहिए। साथ ही उन्होंने मौलिक सोच और जिम्मेदार तकनीकी उपयोग को महत्वपूर्ण बताया।
चार साल का रोडमैप भी समझाया
श्री भटनागर ने विद्यार्थियों के लिए इंजीनियरिंग के चार वर्षों का रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने पहले वर्ष को ‘Learn’, दूसरे वर्ष को ‘Build’, तीसरे वर्ष को ‘Specialize’ और चौथे वर्ष को ‘Create Value’ से जोड़ते हुए विद्यार्थियों को आगे बढ़ने की दिशा दिखाई।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को प्रोजेक्ट, हैकाथॉन, तकनीकी क्लब, इंटर्नशिप और रिसर्च जैसी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए। इंजीनियरिंग पूरी होने तक उनके पास डिग्री के साथ मजबूत तकनीकी आधार, वास्तविक प्रोजेक्ट का अनुभव, डिजिटल पोर्टफोलियो और प्रभावी कम्युनिकेशन स्किल भी होनी चाहिए।
AI के साथ अन्य तकनीकों पर भी फोकस
विद्यार्थियों को एआई के साथ-साथ रोबोटिक्स, साइबर सिक्योरिटी, सेमीकंडक्टर्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी और क्लीन एनर्जी जैसे उभरते क्षेत्रों को समझने के लिए प्रेरित किया गया। उन्होंने कहा कि भविष्य का इंजीनियर केवल कोड लिखने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि बेहतर समस्या समाधानकर्ता, इनोवेटर, कम्युनिकेटर और तकनीक का प्रभावी उपयोग करने वाला प्रोफेशनल होना चाहिए।
संस्थान की सुविधाओं और प्लेसमेंट प्रक्रिया की जानकारी
आईआईएसटी इंदौर के प्रिंसिपल डॉ. केशव पाटीदार ने विद्यार्थियों को संस्थान में उपलब्ध शैक्षणिक और सह-पाठ्यक्रमीय अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों से कॉलेज जीवन का अधिकतम लाभ उठाने और पढ़ाई के साथ अन्य गतिविधियों में भाग लेने का आह्वान किया।
इंडक्शन प्रोग्राम में विद्यार्थियों और अभिभावकों को प्लेसमेंट सेल, प्लेसमेंट प्रक्रिया, अनुशासन एवं आचार संहिता, एंटी-रैगिंग व्यवस्था, कैंटीन, ऑर्गेनिक फार्मिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और बस परिवहन जैसी सुविधाओं के बारे में भी जानकारी दी गई।
दूसरे दिन इन गतिविधियों की मिलेगी जानकारी
कार्यक्रम के दूसरे दिन विद्यार्थियों को करियर डेवलपमेंट सेल (CDC), स्पोर्ट्स, एनसीसी, एनएसएस, स्किल इंप्रूवमेंट ग्रुप्स (SIGs), हैकाथॉन और विभिन्न स्टूडेंट क्लब्स से परिचित कराया जाएगा। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में नेतृत्व, टीमवर्क, इनोवेशन, कम्युनिकेशन और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे कौशल विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।
डॉ. राजेंद्र सिंह के योगदान को किया गया रेखांकित
कार्यक्रम में डॉ. राजेंद्र सिंह के जल संरक्षण और पर्यावरण के क्षेत्र में योगदान को भी रेखांकित किया गया। राजस्थान के अलवर क्षेत्र में उन्होंने ग्रामीण समुदायों के साथ मिलकर पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियों को पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से कई जलस्रोतों और नदियों के पुनर्जीवन को गति मिली।
जल संरक्षण के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें Ramon Magsaysay Award और Stockholm Water Prize जैसे प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं।
आईआईएसटी का ‘अभिज्ञता पर्व 2026’ नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए इंजीनियरिंग यात्रा की मजबूत शुरुआत कराने और उन्हें तकनीकी, सामाजिक एवं व्यावसायिक चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।
