आत्मा शाश्वत है, शरीर नश्वर है : साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज
महिदपुर रोड। चातुर्मास के लिए महिदपुर रोड में विराजित परम पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब आदि ठाणा ने सोमवार को राजेंद्र सूरि ज्ञान मंदिर में आयोजित धर्मसभा को संबोधित किया। उन्होंने अपने प्रवचन में आत्मा और शरीर के वास्तविक स्वरूप को समझाते हुए कहा कि आत्मा शाश्वत है, जबकि शरीर नश्वर है। आत्मा अजर-अमर है और उसकी कभी मृत्यु नहीं होती, लेकिन शरीर का एक दिन समाप्त होना निश्चित है।
आत्मा और शरीर का अंतर समझाया
साध्वी जी ने कहा कि आत्मा और शरीर दोनों अलग-अलग हैं। आत्मा शरीर में निवास करने वाली चेतना है, जबकि शरीर पंचतत्वों से बना नश्वर पुतला है। मनुष्य शरीर को ही अपना सब कुछ मानकर उसके सुख-सुविधाओं और सजावट में पूरा जीवन लगा देता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि शरीर का अस्तित्व स्थायी नहीं है।
उन्होंने कहा कि जिस शरीर को हम जीवनभर “मैं” और “मेरा” कहते रहते हैं, वही शरीर आत्मा के निकल जाने के बाद निष्प्राण हो जाता है। इसलिए मनुष्य को शरीर की सुंदरता और भौतिक सुखों के बजाय आत्मा के कल्याण के बारे में चिंतन करना चाहिए।
मिठाई के डिब्बे का दिया उदाहरण
आत्मा और शरीर के संबंध को समझाने के लिए साध्वी जी ने मिठाई के डिब्बे का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि मिठाई से भरा डिब्बा तब तक आकर्षक और उपयोगी लगता है, जब तक उसमें मिठाई मौजूद रहती है। मिठाई समाप्त होने के बाद वही डिब्बा बेकार समझकर फेंक दिया जाता है।
इसी प्रकार शरीर का महत्व भी तब तक है, जब तक उसमें आत्मा विद्यमान है। आत्मा के शरीर से निकलते ही शरीर की उपयोगिता समाप्त हो जाती है। उन्होंने कहा कि मनुष्य जिस शरीर को सजाने-संवारने में अपना पूरा जीवन लगा देता है, मृत्यु के बाद उसी शरीर का अंतिम संस्कार करने में भी लोग देर नहीं करते।
संसार के रिश्ते और मोह स्थायी नहीं
साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज ने कहा कि संसार में जिन वस्तुओं और रिश्तों को मनुष्य अपना समझता है, वे भी स्थायी नहीं हैं। “मैं” और “मेरा” का भाव ही मनुष्य को मोह-माया में बांधे रखता है। उन्होंने कहा कि सांसारिक रिश्ते और संबंध स्वार्थ से जुड़े होते हैं तथा जीवन की अंतिम यात्रा में कोई भी व्यक्ति किसी के साथ नहीं जाता।
उन्होंने श्रद्धालुओं को जीवन के इस शाश्वत सत्य को स्वीकार करने और आत्मचिंतन करने का संदेश दिया। साध्वी जी ने कहा कि मनुष्य को यह समझना चाहिए कि वास्तविक पहचान शरीर की नहीं, बल्कि आत्मा की है।

धर्म आराधना और तप-साधना का मिले लाभ
साध्वी जी ने कहा कि परमात्मा ने मनुष्य को पंचेंद्रिय शरीर अत्यंत महत्वपूर्ण उद्देश्य के लिए दिया है। इस दुर्लभ मानव जीवन का उपयोग केवल भौतिक सुख-सुविधाओं को जुटाने में नहीं, बल्कि धर्म आराधना, तप, साधना और आत्मकल्याण के लिए किया जाना चाहिए।
उन्होंने श्रद्धालुओं से परमात्मा द्वारा बताए गए मार्ग पर चलने, धर्म के प्रति आस्था रखने और अपने जीवन को आध्यात्मिक साधना के माध्यम से सार्थक बनाने का आह्वान किया।
विभिन्न परिवारों ने लिया धर्मलाभ
जैन समाज मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने जानकारी देते हुए बताया कि सोमवार को आयोजित धार्मिक भक्ति-प्रभावना एवं संपूर्ण दिवस का लाभ जितेंद्र कुमार बापूलाल कोचर मावा वाला परिवार ने लिया। वहीं प्रवचन प्रभावना का लाभ अशोक कुमार एवं रौनक कुमार बोहरा, भाटपचलाना द्वारा लिया गया।
इसके अलावा रमेशचंद, मुकेश कुमार एवं अनिल कुमार कांकरिया परिवार, उज्जैन ने भी धार्मिक आयोजन में सहभागिता की और धर्मलाभ प्राप्त किया।
उज्जैन और भाटपचलाना से भी पहुंचे श्रद्धालु
मंगलमय धर्मसभा में सकल जैन श्रीसंघ सहित उज्जैन, भाटपचलाना और आसपास के क्षेत्रों से आए श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने साध्वी जी के प्रवचन का श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया।
धर्मसभा के दौरान आत्मा की शाश्वतता, शरीर की नश्वरता और मानव जीवन के वास्तविक उद्देश्य पर दिए गए संदेश ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया।
