अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान ने विजयादशमी पर आचार्य वसुनंदीजी महाराज के मंगल आशीर्वाद से क्रोध, लोभ और मोह पर विजय तथा धर्म-सदाचार का संदेश दिया।
अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान ने दी विजयादशमी की शुभकामनाएं, आत्मविजय का दिया संदेश
आचार्यश्री वसुनंदीजी महाराज के मंगल आशीर्वाद से धर्म, संयम और सदाचार अपनाने का आह्वान, क्रोध, मान, माया और लोभ पर विजय को बताया सच्चा दशहरा
मुरैना/नई दिल्ली (मनोज जैन नायक)। दैनिक स्वराज वाणी। अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान (पंजी.) ने विजयादशमी के पावन अवसर पर देशभर के धर्मप्रेमी श्रावक-श्राविकाओं को मंगल शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए धर्म, सदाचार, संयम और आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश दिया है। संस्थान ने विजयादशमी को केवल बाहरी बुराइयों पर विजय का प्रतीक नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर विद्यमान विकारों को समाप्त कर आत्मशुद्धि की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर बताया।
अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान के राष्ट्रीय महामंत्री इंजीनियर भूपेंद्र जैन ग्रीनपार्क, दिल्ली की ओर से जारी शुभकामना संदेश में परम पूज्य प्राकृत भाषा चक्रवर्ती, अभिक्षण ज्ञानोपयोगी आचार्य श्री 108 वसुनंदीजी महाराज के मंगल आशीर्वाद का उल्लेख किया गया।
क्रोध, मान, माया और लोभ पर विजय ही सच्ची विजय
संस्थान के संदेश में कहा गया कि जैन धर्म के अनुसार सच्ची विजय दूसरों को पराजित करने में नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर मौजूद क्रोध, मान, माया, लोभ, राग और द्वेष जैसे विकारों पर नियंत्रण प्राप्त करने में निहित है।
भगवान जिनेंद्र के बताए मार्ग पर चलते हुए अहिंसा, सत्य, क्षमा, करुणा, संयम और अपरिग्रह को जीवन में अपनाना ही विजयादशमी पर्व की वास्तविक सार्थकता है।
सम्यक दर्शन, ज्ञान और चारित्र के मार्ग पर चलने का आह्वान
धर्म जागृति संस्थान ने मंगलकामना व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के जीवन में धर्म और सदाचार का प्रकाश बना रहे। परिवारों में सुख-शांति, प्रेम, आपसी सद्भाव और सकारात्मक वातावरण बना रहे तथा भगवान जिनेंद्र के प्रति श्रद्धा और भक्ति निरंतर बढ़ती रहे।
संस्थान ने सभी श्रद्धालुओं से सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र के मार्ग पर आगे बढ़ते हुए आत्मकल्याण की दिशा में प्रयास करने का आह्वान किया।
समाज सेवा और परोपकार को जीवन का हिस्सा बनाएं
शुभकामना संदेश में कहा गया कि धार्मिक जीवन का उद्देश्य केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं होना चाहिए। समाज सेवा, धर्मप्रभावना, जीवदया और परोपकार जैसे कार्य भी जीवन का अभिन्न अंग बनने चाहिए।
संस्थान के अनुसार सच्चा दशहरा तभी सार्थक होगा, जब मनुष्य अपने भीतर के विकारों पर विजय प्राप्त कर आत्मा के निर्मल स्वरूप की ओर अग्रसर होगा।
राष्ट्रीय महामंत्री भूपेंद्र जैन ने दी शुभकामनाएं
संस्थान के राष्ट्रीय महामंत्री इंजीनियर भूपेंद्र जैन (दिल्ली) ने समस्त धर्मप्रेमी श्रावक-श्राविकाओं को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि, धर्म और सदाचार की मंगलकामना की।
दैनिक स्वराज वाणी | मुरैना/नई दिल्ली | रिपोर्ट : मनोज जैन नायक


