यात्री कृपया ध्यान दें विषय पर इंदौर के ज्ञानशिखर ओमशांति भवन में आयोजित विशेष प्रशिक्षण में ब्रह्माकुमारी कविता बहन ने जीवन को सफल, शांत और सकारात्मक बनाने के 7 प्रभावशाली सूत्र बताए। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
यात्री कृपया ध्यान दें: जीवन की फोटो गैलरी से नकारात्मकता हटाकर सुखद यादों को संजोएं – ब्रह्माकुमारी कविता बहन
रिपोर्ट: इंदौर
इंदौर, 2 अगस्त। यात्री कृपया ध्यान दें केवल रेलवे स्टेशन पर सुनाई देने वाली घोषणा नहीं है, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला संदेश भी है। इसी विषय पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के यातायात एवं परिवहन प्रभाग द्वारा ज्ञानशिखर ओमशांति भवन, इंदौर में संस्थान से जुड़े भाई-बहनों के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुंबई (बोरीवली) से पधारी यातायात एवं परिवहन प्रभाग की राष्ट्रीय समन्वयक ब्रह्माकुमारी कविता बहन ने जीवन प्रबंधन, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक उन्नति पर प्रेरणादायक विचार साझा किए।
कार्यक्रम का उद्देश्य
यात्री कृपया ध्यान दें थीम पर आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल सड़क या यात्रा सुरक्षा तक सीमित नहीं था, बल्कि जीवन यात्रा को भी सकारात्मक, शांत और सफल बनाने के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शन देना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ब्रह्माकुमारी संस्थान से जुड़े भाई-बहन उपस्थित रहे।
जीवन की फोटो गैलरी से नकारात्मकता हटाने का संदेश
अपने संबोधन में ब्रह्माकुमारी कविता बहन ने कहा कि जैसे यात्रा के दौरान हम केवल सुंदर दृश्यों की तस्वीरें अपने कैमरे में संजोते हैं, उसी प्रकार जीवन में भी हमें नकारात्मक घटनाओं और दुखद यादों को मन से हटाकर केवल सुखद, प्रेरणादायक और शिक्षाप्रद अनुभवों को संजोना चाहिए।उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति अपनी मानसिक फोटो गैलरी में सकारात्मक यादों को स्थान देता है तो उसका जीवन अधिक सुखद, संतुलित और तनावमुक्त बन जाता है।
सफलता के लिए एकता और सरलता जरूरी
कविता बहन ने कहा कि संगठन की शक्ति ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। जब व्यक्ति एकता को अपना साथी बना लेता है, तब कठिन से कठिन लक्ष्य भी आसानी से प्राप्त किए जा सकते हैं।उन्होंने कहा कि जीवन में उतार-चढ़ाव आना स्वाभाविक है, लेकिन परिस्थितियां कैसी भी हों, मन को शांत रखना आवश्यक है। परेशान मन कभी समाधान नहीं खोज सकता, जबकि शांत मन हर चुनौती का रास्ता निकाल लेता है।उन्होंने यह भी कहा कि जितना व्यक्ति अपने स्वभाव को सरल और विनम्र बनाता है, उतना ही वह सभी के प्रिय बन जाता है।
मेडिटेशन से स्वयं को करें रिचार्ज
यात्री कृपया ध्यान दें कार्यक्रम में कविता बहन ने आधुनिक जीवनशैली पर भी महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज हर व्यक्ति मोबाइल नेटवर्क से जुड़ा है, लेकिन स्वयं से और परमात्मा से दूर होता जा रहा है।उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन कुछ समय “नो नेटवर्क ज़ोन” में बिताना चाहिए। इस दौरान परिवार के साथ समय बिताएं, स्वयं से जुड़ें, ईश्वर का स्मरण करें और राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से अपनी मानसिक ऊर्जा को पुनः रिचार्ज करें।
प्यार से खत्म करें लड़ाई
उन्होंने संबंधों को मजबूत बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश दिया। उनका कहना था कि लोगों की गलतियों को गिनने की बजाय सहयोग देना सीखें।उन्होंने कहा—“लड़ाई में प्यार खत्म करने से बेहतर है कि प्यार से लड़ाई खत्म कर दी जाए।”
कविता बहन ने मुस्कान को जीवन की सबसे बड़ी पहचान बताते हुए कहा कि मुस्कान बिना किसी प्रयास के हर दिल तक पहुंच जाती है और रिश्तों में मधुरता बढ़ाती है।
आध्यात्मिक चित्र प्रदर्शनी का महत्व
मुंबई से पधारी वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी राकेशा बहन ने “यात्री कृपया ध्यान दें” विषय पर आधारित आध्यात्मिक चित्र प्रदर्शनी का विस्तृत परिचय दिया।उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी के माध्यम से जीवन यात्रा के विभिन्न पड़ावों, चुनौतियों और उनके आध्यात्मिक समाधान को सरल चित्रों के माध्यम से समझाया गया है।
कार्यक्रम में प्रमुख अतिथि
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।इस अवसर पर वी वन हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. ए.एल. शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे।ट्रांसपोर्ट एवं ट्रेवल विंग की क्षेत्रीय समन्वयक ब्रह्माकुमारी अनीता दीदी ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा आभार व्यक्त किया।कार्यक्रम का सफल संचालन ब्रह्माकुमारी उषा बहन ने किया।
निष्कर्ष
यात्री कृपया ध्यान दें केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि जीवन को सकारात्मक दिशा देने का संदेश बनकर सामने आया। ब्रह्माकुमारी कविता बहन ने अपने सहज और प्रेरक उदाहरणों के माध्यम से बताया कि यदि व्यक्ति नकारात्मक सोच को त्यागकर सकारात्मक यादों को संजोए, मेडिटेशन को जीवन का हिस्सा बनाए, परिवार और परमात्मा से जुड़े तथा प्रेम और मुस्कान को अपनी पहचान बनाए, तो जीवन की हर यात्रा सुखद और सफल बन सकती है।


