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8 मई को Indore में संयमोत्सव का भव्य आयोजन, आचार्य श्रीमद्विजय हितेशचंद्र सूरीश्वरजी म.सा. की रहेगी विशेष उपस्थिति

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Published On: 6 May 2026
Indore
— प्रकाशमुनिजी म.सा. के संयम जीवन के 52 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित होगा विशेष समारोह

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8 मई को Indore में संयमोत्सव का भव्य आयोजन, आचार्य श्रीमद्विजय हितेशचंद्र सूरीश्वरजी म.सा. की रहेगी विशेष उपस्थिति

Indore । जैन समाज के लिए 8 मई का दिन अत्यंत विशेष और प्रेरणादायक बनने जा रहा है। इस दिन शहर के कीमती गार्डन में भव्य संयमोत्सव का आयोजन किया जाएगा, जो श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्वितीय संगम होगा। यह आयोजन मालव केसरी, प्रख्यात वक्ता एवं श्रमण संघ निर्माता प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाशमुनिजी म.सा. (निर्भय) के संयम जीवन के 52 वर्ष पूर्ण होने और 53वें वर्ष में प्रवेश के पावन अवसर पर आयोजित किया जा रहा है।

यह अवसर न केवल एक साधु के तप, त्याग और साधना का उत्सव है, बल्कि पूरे जैन समाज के लिए गर्व और प्रेरणा का प्रतीक भी है। संयमोत्सव के माध्यम से समाज में संयम, अनुशासन और आध्यात्मिकता के मूल्यों को पुनः जागृत करने का प्रयास किया जा रहा है।

आचार्य श्री की गरिमामयी उपस्थिति से बढ़ेगी आयोजन की दिव्यता

इस भव्य आयोजन की सबसे खास बात यह है कि इसमें गच्छाधिपति आचार्यदेव श्रीमद्विजय हितेशचंद्र सूरीश्वरजी म.सा. (मोहनखेड़ा) आदि ठाणा की पावन उपस्थिति रहेगी। उनके सान्निध्य में आयोजित यह कार्यक्रम और अधिक दिव्य और प्रेरणादायक बन जाएगा।

आचार्य श्री का मार्गदर्शन जैन समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। उनके प्रवचन और आशीर्वचन श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। ऐसे में उनकी उपस्थिति इस आयोजन को विशेष महत्व प्रदान करती है।

हजारों श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना

आयोजन समिति के अनुसार इस संयमोत्सव में इंदौर ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे। कार्यक्रम को लेकर समाज में उत्साह का माहौल है और सभी धर्मप्रेमी इस आयोजन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

समिति ने सभी समाजजनों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर संयम मार्ग की अनुमोदना करें और इस पुण्य अवसर का लाभ उठाएं। आयोजन स्थल पर सभी व्यवस्थाएं श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए की जा रही हैं।

52 वर्षों का संयम जीवन: प्रेरणा का अद्वितीय उदाहरण

पूज्य श्री प्रकाशमुनिजी म.सा. का जीवन तप, त्याग और साधना का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने मात्र 14 वर्ष की अल्पायु में ही संयम पथ को अपनाया और तब से निरंतर साधना में लीन हैं। उनके संयम जीवन के 52 वर्ष पूर्ण होना जैन समाज के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण है।

उनका जीवन यह संदेश देता है कि यदि व्यक्ति दृढ़ संकल्प और आत्मअनुशासन के साथ जीवन जीए, तो वह आध्यात्मिक ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकता है। उनके प्रवचन और जीवनशैली ने हजारों लोगों को संयम और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी है।

समाजसेवियों का सहयोग बना आयोजन की ताकत

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में समाज के कई प्रतिष्ठित परिवारों और सेवाभावी व्यक्तियों का विशेष योगदान है। कार्यक्रम के प्रमुख लाभार्थी के रूप में श्रीमती अंगूरबाला जी जयंतिलाल जी जैन (मिर्ची वाले) परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका है।

इसके अलावा स्वर्ण एवं रजत लाभार्थियों सहित अनेक समाजसेवियों का सहयोग इस आयोजन को भव्यता प्रदान कर रहा है। सभी के सामूहिक प्रयासों से यह आयोजन एक ऐतिहासिक रूप लेने जा रहा है।

आयोजन समिति की सक्रिय भूमिका

इस कार्यक्रम की पूरी जिम्मेदारी राजमोहल्ला श्रीसंघ एवं ट्रस्ट मंडल द्वारा संभाली जा रही है। आयोजन की तैयारियों में अनिल चौरड़िया, संजय नवलखा, हेमेन्द्र बोकड़िया, उमराव सियाल सहित कई सदस्यों की सक्रिय भागीदारी है।

संयोजक शांता जी एवं कांता कटकानी ने बताया कि यह संयमोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में संयम, त्याग और आत्मअनुशासन जैसे मूल्यों को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने सभी से इस आयोजन में शामिल होकर इसे सफल बनाने का आग्रह किया है।

आध्यात्मिक संदेश से ओतप्रोत होगा आयोजन

संयमोत्सव केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आध्यात्मिक जागरण का भी माध्यम है। इस आयोजन के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया जाएगा कि जीवन में संयम और अनुशासन का कितना महत्व है।

“कर्म की भूमि पर ही किस्मत का फूल खिलता है, नसीब अगर बुलंदी पर हो तो ही संयम मार्ग मिलता है”—इस प्रेरणादायक संदेश के साथ यह आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगा।

निष्कर्ष

Indore में आयोजित होने जा रहा यह संयमोत्सव जैन समाज के लिए एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक अवसर है। यह आयोजन न केवल एक साधु के तप और त्याग का सम्मान है, बल्कि समाज को आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

ऐसे आयोजन समाज को एकजुट करते हैं और लोगों को जीवन के उच्च मूल्यों की ओर प्रेरित करते हैं। 8 मई को होने वाला यह संयमोत्सव निश्चित ही श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय अनुभव साबित होगा और उन्हें आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने की नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

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