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Ujjain में गूंजा ‘जय महाकाल’: भस्म आरती में अलौकिक श्रृंगार के दर्शन से भक्त हुए भाव-विभोर

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Published On: 30 April 2026
ujjain
— Shri Mahakaleshwar Temple में भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार

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Ujjain में गूंजा ‘जय महाकाल’: भस्म आरती में अलौकिक श्रृंगार के दर्शन से भक्त हुए भाव-विभोर

Ujjain में स्थित विश्व प्रसिद्ध Shri Mahakaleshwar Temple में 30 अप्रैल 2026 की सुबह भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। ब्रह्म मुहूर्त में आयोजित होने वाली प्रसिद्ध भस्म आरती के दौरान भगवान शिव के महाकाल स्वरूप का दिव्य श्रृंगार किया गया, जिसे देखने के लिए हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में एकत्रित हुए।

ब्रह्म मुहूर्त में शुरू हुई भस्म आरती

Ujjain भस्म आरती की शुरुआत तड़के ब्रह्म मुहूर्त में विधि-विधान के साथ हुई। यह आरती भगवान शिव के महाकाल स्वरूप को समर्पित होती है और इसकी खासियत यह है कि इसमें चिता की भस्म से बाबा का श्रृंगार किया जाता है। जैसे ही मंदिर के गर्भगृह के द्वार खुले, वैसे ही ‘जय महाकाल’ के जयघोष से पूरा वातावरण गूंज उठा।

पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा महाकाल का अभिषेक किया और उसके बाद भस्म से उनका अलौकिक श्रृंगार किया गया। इस दौरान मंदिर का माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। श्रद्धालु इस दिव्य दृश्य को देखकर मंत्रमुग्ध हो गए।

भक्ति में डूबा मंदिर परिसर

Ujjain भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी आए भक्त इस विशेष आरती में शामिल होने के लिए पहले से ही पंजीयन कराकर पहुंचे थे। मंदिर परिसर में हर तरफ श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं।

जैसे-जैसे आरती आगे बढ़ी, वैसे-वैसे भक्ति का उत्साह और बढ़ता गया। ढोल-नगाड़ों की ध्वनि, शंखनाद और मंत्रोच्चार के बीच पूरा माहौल शिवमय हो गया। श्रद्धालु हाथ जोड़कर और ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष के साथ बाबा के दर्शन करते नजर आए।

भस्म आरती का धार्मिक महत्व

Ujjain महाकाल मंदिर की भस्म आरती का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। यह भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहां होने वाली यह आरती दुनिया में अपनी तरह की अनोखी परंपरा के लिए जानी जाती है। मान्यता है कि इस आरती के दर्शन करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और उन्हें आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति होती है।

भस्म आरती का समय और इसकी प्रक्रिया अत्यंत विशेष होती है। इसमें पहले भगवान का जलाभिषेक किया जाता है, फिर उन्हें भस्म से अलंकृत किया जाता है। इसके बाद विशेष श्रृंगार और आरती के साथ पूजा संपन्न होती है। इस पूरी प्रक्रिया को देखने के लिए भक्तों में खास उत्साह रहता है।

श्रद्धालुओं का उमड़ा जनसैलाब

30 अप्रैल की इस भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। कई भक्त रात से ही मंदिर के बाहर कतार में लग गए थे, ताकि उन्हें आरती के दौरान बाबा के दर्शन का अवसर मिल सके। प्रशासन और मंदिर समिति द्वारा भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं।

श्रद्धालुओं का कहना था कि बाबा महाकाल के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर उन्हें अद्भुत शांति और ऊर्जा का अनुभव हुआ। कई भक्तों ने इसे जीवन का यादगार अनुभव बताया।

आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र

महाकाल मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि आस्था और ऊर्जा का केंद्र भी है। यहां की भस्म आरती विशेष रूप से लोगों को आकर्षित करती है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और आज भी उतनी ही श्रद्धा और भक्ति के साथ निभाई जाती है।

निष्कर्ष

Ujjain के महाकालेश्वर मंदिर में 30 अप्रैल 2026 को आयोजित भस्म आरती एक बार फिर आस्था और भक्ति का भव्य प्रतीक बनकर सामने आई। बाबा महाकाल के दिव्य श्रृंगार ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया और पूरा वातावरण ‘जय महाकाल’ के जयघोष से गूंज उठा।

यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपराओं की गहराई को भी दर्शाता है। महाकाल की नगरी उज्जैन में हर दिन इस तरह की आध्यात्मिक अनुभूति लोगों को एक नई ऊर्जा और विश्वास से भर देती है।

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