ग्रेसिम की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा परियोजना का सफल समापन, 50 शिक्षक एवं शिक्षा दूत सम्मानित
Nagda क्षेत्र में शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने के उद्देश्य से संचालित “गुणवत्तापूर्ण शिक्षा परियोजना” ने अपने तय समय पर उल्लेखनीय सफलता के साथ समापन कर लिया। Grasim Janseva Trust द्वारा प्रायोजित और Add at Action संस्था द्वारा संचालित इस परियोजना का क्रियान्वयन 27 अप्रैल 2026 को पूर्ण हुआ। इस अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में परियोजना से जुड़े 50 शिक्षक एवं शिक्षा दूतों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया।
समारोह में सीएसआर प्रमुख सतीश भूयिर, सीएसआर मैनेजर जीवन पोरवाल, अरविंद सिकरवार और केमिकल विभाग से अजय नागर सहित अन्य अधिकारियों की उपस्थिति रही। सभी ने परियोजना के सफल संचालन और शिक्षा क्षेत्र में आए सकारात्मक बदलावों की सराहना की।
20 गांव, 37 स्कूल और 26 आंगनवाड़ी केंद्रों में बदलाव
यह परियोजना नागदा क्षेत्र के 20 गांवों में संचालित की गई, जिसमें 37 विद्यालयों और 26 आंगनवाड़ी केंद्रों को शामिल किया गया। परियोजना का उद्देश्य केवल शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना नहीं था, बल्कि समग्र रूप से विद्यालयी वातावरण, बच्चों की भागीदारी और समुदाय की भूमिका को भी सशक्त बनाना था।
Alok Mishra, परियोजना प्रबंधक, ने बताया कि शुरुआत में कई स्कूलों में स्वच्छता की स्थिति बेहद खराब थी। लेकिन लगातार प्रयासों के बाद अब सभी विद्यालय स्वच्छ और व्यवस्थित हो चुके हैं। विद्यालय परिसरों में मद्यपान और धूम्रपान जैसी गतिविधियों पर भी पूरी तरह रोक लगाई गई है।
पर्यावरण और बुनियादी सुविधाओं में सुधार
परियोजना के तहत पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया गया। कुल 1425 पौधे लगाए गए, जिनमें से 779 पौधे अब सुरक्षित रूप से विकसित हो रहे हैं।
इसके अलावा, 7 से अधिक आंगनवाड़ियों को “समृद्ध आंगनवाड़ी” के रूप में विकसित किया गया। बरछा गांव का विद्यालय क्षेत्र का पहला ग्रामीण ISO प्रमाणित स्कूल बना, जो इस परियोजना की एक बड़ी उपलब्धि है।
17 विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की शुरुआत की गई, जिससे बच्चों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से शिक्षा मिल रही है। इससे पढ़ाई को अधिक रोचक और प्रभावी बनाया गया।

बालिका शिक्षा में ऐतिहासिक बदलाव
इस परियोजना का सबसे बड़ा प्रभाव बालिका शिक्षा के क्षेत्र में देखने को मिला। अब ऐसा कोई गांव नहीं बचा है, जहां से लड़कियां उच्च शिक्षा के लिए बाहर न जा रही हों।
झांझखेड़ी की छात्रा मनीषा शम्भू चंद्रवंशी ने कक्षा 10वीं में 90% अंक प्राप्त कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया। यह इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर ग्रामीण क्षेत्र की बेटियां भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं।
इसके अलावा, शिक्षा दूत जागु गुर्जर और काजल, जिन्होंने 8वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी, अब 12वीं उत्तीर्ण कर चुकी हैं। यह बदलाव परियोजना की सफलता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
शिक्षा दूतों और शिक्षकों की प्रगति
परियोजना से जुड़े सभी 33 शिक्षा दूत और शिक्षक अब अपनी शिक्षा को आगे बढ़ा रहे हैं। कई लोगों ने डी.एड. और बी.एड. जैसे पाठ्यक्रमों में प्रवेश लिया है।
यह पहल न केवल बच्चों की शिक्षा तक सीमित रही, बल्कि शिक्षकों और स्वयंसेवकों के व्यक्तिगत विकास में भी सहायक साबित हुई।

परीक्षा परिणामों में उल्लेखनीय सुधार
शैक्षणिक परिणामों में भी इस परियोजना का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला। वर्ष 2024 की तुलना में 2026 में सभी कक्षाओं के परिणामों में सुधार दर्ज किया गया:
- कक्षा 5: 69% से बढ़कर 87%
- कक्षा 8: 64% से बढ़कर 82%
- कक्षा 10: 42% से बढ़कर 78%
- कक्षा 12: 60% से बढ़कर 67%
कक्षा 9 के परिणामों में भी सुधार देखा गया। यह दर्शाता है कि निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग से शिक्षा के स्तर में स्थायी सुधार संभव है।
स्कूलों में बढ़ी उपस्थिति और पुनः नामांकन
परियोजना के दौरान 666 ऐसे बच्चे, जो पहले अनियमित रूप से स्कूल आते थे, अब नियमित रूप से शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
इसके अलावा, 318 विद्यार्थियों ने निजी विद्यालयों से सरकारी स्कूलों में पुनः प्रवेश लिया। यह सरकारी शिक्षा प्रणाली पर बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।

प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को मिला मंच
10 विद्यार्थियों का चयन जिला स्तर पर मॉडल प्रस्तुति के लिए हुआ, जिनमें से एक छात्र राज्य स्तर तक पहुंचा।
16 विद्यार्थियों ने जवाहर नवोदय विद्यालय और उत्कृष्ट विद्यालयों में प्रवेश प्राप्त किया। वहीं 9 विद्यालयों के 24 विद्यार्थियों ने ओलंपियाड परीक्षा में सफलता हासिल की।
यह उपलब्धियां इस बात का संकेत हैं कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे भी सही मार्गदर्शन मिलने पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
मातृ समिति की सक्रिय भागीदारी
परियोजना के अंतर्गत 20 गांवों की 240 मातृ समिति सदस्य, जो पहले स्वयं को अनपढ़ मानती थीं, अब प्रशिक्षण के बाद विद्यालयी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
वे न केवल अपने बच्चों की शिक्षा में सहयोग कर रही हैं, बल्कि समुदाय के अन्य बच्चों को भी पढ़ाई के लिए प्रेरित कर रही हैं। यह सामाजिक परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण संकेत है।

‘प्रगति परियोजना’ से बालिकाओं को नई दिशा
वर्ष 2025 में शुरू की गई “प्रगति परियोजना” के अंतर्गत 580 बालिकाएं और महिलाएं, जिन्होंने 5वीं या 8वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी, अब फिर से शिक्षा से जुड़ चुकी हैं।
यह पहल Educate Girls और ग्रेसिम के सहयोग से शुरू की गई थी। ये सभी प्रतिभागी जून 2026 में मध्यप्रदेश ओपन बोर्ड की परीक्षा देने वाली हैं।
इससे क्षेत्र में महिला शिक्षा और सशक्तिकरण को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
समुदाय और पंचायत की बढ़ी भागीदारी
परियोजना के दौरान स्थानीय समुदाय, पंचायत और संबंधित सरकारी विभागों की भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
उनके सहयोग से 37 विद्यालयों और 26 आंगनवाड़ी केंद्रों के विकास के लिए बड़े स्तर पर संसाधन और धनराशि का निवेश किया गया। इससे स्थानीय स्तर पर जिम्मेदारी और स्वामित्व की भावना मजबूत हुई।
अधिकारियों ने की परियोजना की सराहना
सीएसआर प्रमुख सतीश भूयिर ने कहा कि इस परियोजना ने अपेक्षाओं से अधिक परिणाम दिए हैं और यह क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बालिका सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रभावी पहल साबित हुई है।
उन्होंने सभी से अपील की कि परियोजना के समापन के बाद भी शिक्षा सुधार के प्रयास लगातार जारी रखें।

आभार और भविष्य की शुभकामनाएं
कार्यक्रम के अंत में Praveen Bhope, रीजनल मैनेजर, ने ग्रेसिम जनसेवा ट्रस्ट का उनके निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया।
उन्होंने परियोजना से जुड़े सभी सदस्यों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं और आशा जताई कि यह पहल आने वाले समय में भी शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाती रहेगी।
निष्कर्ष
नागदा क्षेत्र में संचालित यह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा परियोजना केवल एक शैक्षणिक पहल नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। इससे यह साबित होता है कि यदि सही दिशा, संसाधन और सामुदायिक सहयोग मिले, तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव संभव है।
यह परियोजना आने वाले समय में अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकती है।
